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घाट, गीत, ग्लैमर... बॉलीवुड में क्यों बढ़ा छठ का क्रेज! ‘छठी मैया’ के बाद ‘ये प्रेम मोल लिया’

Chhath Puja in Bollywood: बॉलीवुड की कहानियों में अब रीजनल त्योहारों का बोलबाला काफी तेजी से बढ़ रहा है. तमन्ना भाटिया और सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म 'द वन' से लेकर आयुष्मान खुराना और शरवरी की 'ये प्रेम मोल लिया' तक, जानिए कैसे छठ पूजा का विजुअल ग्रामर और आस्था अब हिंदी सिनेमा के मेनस्ट्रीम कैनवास का अहम हिस्सा बन रहे हैं.

घाट, गीत, ग्लैमर... बॉलीवुड में क्यों बढ़ा छठ का क्रेज! ‘छठी मैया’ के बाद ‘ये प्रेम मोल लिया’
Image Credit: बॉलीवुड पर छठ का रंग (एआई फोटो)

Chhath Puja in Bollywood: छठ पूजा अब सिर्फ बिहार, झारखंड और पूर्वांचल की लोक आस्था तक सीमित नजर नहीं आ रही, बल्कि बॉलीवुड के मेनस्ट्रीम कैनवास पर भी इसकी मौजूदगी काफी तेजी से दिखाई देने लगी है. कभी फिल्मों में दिवाली और होली जैसे त्योहारों के रंग देखने को मिलते थे, लेकिन अब रीजनल कल्चर और स्थानीय परंपराओं की कहानियां भी तेजी से हिस्सा बन रही हैं. दो फिल्मों में एक ही फेस्टिवल यानी छठ का दिखाई देना अपने आप में किसी बड़े इंडस्ट्री ट्रेंड का अंतिम प्रमाण भले न हो, लेकिन इसे उस बड़े बदलाव से जरूर जोड़ा जा सकता है.

यह बदलाव हिंदी सिनेमा में क्षेत्रीय पहचान, लोक-संस्कृति और छोटे शहरों की वास्तविकताओं को ज्यादा जगह दे रहा है. पिछले कुछ वर्षों में दर्शकों के सामने सिर्फ महानगरीय भारत (Metropolitan India) की कहानियां रखने के बजाय फिल्म मेकर्स ने अलग-अलग भाषाओं, इलाकों और समुदायों की पहचान को कहानी का हिस्सा बनाया है. डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और ओटीटी ने भी इस बदलाव को रफ्तार दी है.

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सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की अपकमिंग फिल्म 'द वन: फोर्स ऑफ फॉरेस्ट' को लेकर फैंस काफी एक्साइटेड हैं. इस फिल्म का छठ गीत सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. हालांकि, ऐसा पहला मौका नहीं है, जब बॉलीवुड फिल्म में छठ को इतने बड़े पैमाने पर दिखाया गया है. इस छठ गीत को मिली लोकप्रियता के बीच आयुष्मान खुराना और शरवरी वाघ भी छठी मैया की पूजा करते दिखे. शरवरी और आयुष्मान की फिल्म 'ये प्रेम मोह लिया' में नजर आने वाले हैं. इस फिल्म का निर्देशन फैमिली फिल्मों के किंग सूरज बड़जात्या कर रहे हैं.

दोनों फिल्मों के गानों को देखते हुए ऐसा माना जा रहा है कि अब बॉलीवुड पर भी छठ का रंग चढ़ चुका है. अब तक जहां फिल्मों में पंजाब और नॉर्थ कल्चर का ट्रेंड देखने को मिलता था, वहीं अब फिल्ममेकर्स आगे बढ़कर भारत के दूसरे कल्चर को भी उतनी ही तवज्जो दे रहे हैं.

कैमरे को क्यों भाता है छठ का सीन?

छठ पूजा की सबसे बड़ी सिनेमैटिक ताकत उसका 'विजुअल ग्रामर' है. नदी या तालाब का घाट, डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य, पानी में खड़े श्रद्धालु, सूप में रखे फल और प्रसाद, ठेकुआ, दीपों की जगमगाहट और हजारों लोगों की सामूहिक मौजूदगी मिलकर बेहद आकर्षक सीन बनाते हैं. लेकिन छठ सिर्फ खूबसूरत दृश्यों तक सीमित नहीं है. इसकी असली ताकत इसमें छिपे अनुशासन, आस्था, त्याग, परिवार और प्रकृति से जुड़े गहरे भावों में है.

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घाट अब सिर्फ लोकेशन क्यों नहीं रहा?

सैकड़ों लोगों का एक साथ पानी में उतरना, सूर्य की ओर हाथ जोड़ना और सामूहिक रूप से अर्घ्य देना किसी एक किरदार की निजी पूजा से आगे बढ़कर एक सामुदायिक अनुभव (Community Experience) बन जाता है. इसलिए अगर किसी फिल्म मेकर को अपनी कहानी में फेथ और कम्युनिटी दोनों को एक साथ पर्दे पर उतारना हो, तो छठ पूजा का घाट स्वाभाविक रूप से एक बेहद प्रभावशाली सिनेमैटिक फ्रेम बन जाता है.

क्या है असली छठ और बॉलीवुड सीन में अंतर?

फिल्म 'द वन' के 'छठी मैया' गाने को लेकर बिहार और झारखंड के लोगों ने इसकी सिनेमैटिक लिबर्टी (Cinematic Liberties) पर कई सवाल भी उठाए हैं. फेस्टिवल से परिचित लोगों का मानना है कि गाने में छठ की भावनाएं और प्रमुख सीन तो दिखाई देते हैं, लेकिन बॉलीवुड एस्थेटिक्स और ग्लैमर के चक्कर में कुछ पारंपरिक रीति-रिवाजों और वेशभूषा के साथ बदलाव किया गया है.

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क्या अब क्षेत्रीय संस्कृति 'नीश' नहीं रही?

यह बदलाव सिर्फ छठ तक सीमित नहीं है, हिंदी सिनेमा में क्षेत्रीय भाषाएं, लोक संगीत और स्थानीय परंपराएं लगातार ज्यादा विजिबल हुई हैं. आज का दर्शक सिर्फ पॉलिश की हुई महानगरीय कहानियां नहीं देख रहा. क्षेत्रीय सिनेमा और ओटीटी ने यह साबित कर दिया है कि किसी कहानी का स्थानीय होना उसकी पहुंच को सीमित नहीं करता. जब दर्शक स्क्रीन पर अपनी जानी-पहचानी परंपरा या घाट को देखता है, तो फिल्म का भावनात्मक प्रभाव काफी हद तक बढ़ जाता है.

1961 में हुई थी सिनेमाई छठ की शुरुआत?

साल 1961 में पर्दे पर आई फिल्म ‘भैया’ मुख्य रूप से मगही भाषा की फिल्म थी, लेकिन इसकी सरल और सहज भाषा के कारण हिंदी दर्शकों के लिए भी इसे समझना बेहद आसान था. इस फिल्म में तरुण चौधरी, पद्मा खन्ना, हेलेन, शुभा खोटे, अचला सचदेव और रामायण तिवारी जैसे दिग्गज कलाकार नजर आए थे. फिल्म 'भैया' की सबसे खास बातों में से एक इसका छठ पूजा पर आधारित भावपूर्ण गीत 'सूपवे नरियरवे बोझली मोरी मइया' था, जिसने पहली बार बड़े पर्दे पर इस महापर्व की महत्ता को स्थापित किया.

60 साल पहले, इस फिल्म में पर्दे पर आई थी छठ पूजा, लता मंगेशकर की बहन ने  गाया था मैया का गीत - chhath puja song first film bhaiya 1961 bhojpuri films

किसने तैयार की थी इस कालजयी गीत की धुन?

छठ के इस मशहूर गीत को लता मंगेशकर की बहन उषा मंगेशकर ने अपनी मधुर आवाज दी थी. दिग्गज संगीतकार चित्रगुप्त ने अपनी धुन के जरिए छठ पूजा की शांति, भक्ति और पवित्रता को खूबसूरती से पेश किया, जबकि इसके बोल विंध्यवासिनी देवी और प्रेम धवन ने लिखे थे. यह गीत भक्ति के साथ-साथ अपनी मिट्टी और परंपरा से गहरा जुड़ाव महसूस कराता है. आज छह दशक से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी यह गीत बिहार और उत्तर प्रदेश के गांवों तथा शहरों में छठ पर्व के दौरान पूरी आस्था के साथ गूंजता है.

कैसे 'भैया' ने बदली फिल्मों में कहानियां दिखाने की सोच?

फिल्म ‘भैया’ उस दौर में रिलीज हुई थी, जब मुख्यधारा की हिंदी फिल्मों में क्षेत्रीय कहानियों और स्थानीय परंपराओं को कोई खास जगह नहीं मिलती थी. ऐसे समय में इस फिल्म ने छठ पूजा और ग्रामीण जीवन को कहानी का मुख्य हिस्सा बनाकर एक नई मिसाल पेश की. इसने साबित किया कि यदि सांस्कृतिक परंपराओं को सच्चाई और संवेदनशीलता के साथ दिखाया जाए, तो दर्शक उन्हें बहुत पसंद करते हैं. इसके बाद ही 'नदिया के पार' और 'लागी नाहीं छूटे रामा' जैसी फिल्मों में ग्रामीण ताने-बाने और लोक-परंपराओं को प्राथमिकता दी जाने लगी.

सिद्धार्थ मल्होत्रा-तमन्ना भाटिया की फिल्म 'द वन' में दिखा छठ महापर्व का  रंग, 'छठी मैया' गीत हुआ रिलीज - sidharth malhotra and tamannaah bhatia  movie tha vvan chhathi maiya ...

कैसे 2026 में फिर बड़े पर्दे पर लौट रही है छठ?

आज के दौर में छठ पूजा का स्वरूप हिंदी फिल्मों में और भी भव्य पैमाने पर दिखाई दे रहा है. आगामी 25 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही फिल्म ‘द वन’ (The Vvaan) में तमन्ना भाटिया का किरदार छठ पूजा करता नजर आता है, जिसके लिए विशेष रूप से ‘छठी मैया’ गीत भी जारी किया गया है. वहीं दूसरी तरफ, 27 नवंबर 2026 को आने वाली सूरज बड़जात्या की फिल्म ‘ये प्रेम मोल लिया’ में आयुष्मान खुराना और शरवरी की जोड़ी के साथ छठ का खूबसूरत दृश्य शामिल किया गया है, जिसकी झलक 21 सितंबर को जारी हुए टाइटल ट्रैक में देखने को मिली है.

क्या शुरू हो रहा है त्योहारों का नया दौर?

हालांकि, हो सकता है, क्योंकि एक तरफ मेकर्स ऐसी कहानियां तलाश रहे हैं, जिनमें लोकल आइडेंटिटी हो, वहीं दूसरी तरफ दर्शक भी क्षेत्रीय संस्कृति को अपनाने के लिए तैयार हैं. बॉलीवुड को अब सिर्फ बड़े शहरों की कहानी नहीं सुनानी है, बल्कि उसे उस भारत को भी दिखाना है, जहां घाट पर खड़े हजारों लोगों के लिए उगता हुआ सूरज सिर्फ एक नजारा नहीं, बल्कि उम्मीद और आस्था का प्रतीक है. यही वजह है कि छठ अब सिर्फ कैलेंडर का त्योहार न रहकर बड़े पर्दे की कहानियों का अहम हिस्सा बन रहा है.

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About the Author

Kajol Gupta

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काजोल गुप्ता जी न्यूज में सब एडिटर हैं और पिछले साढ़े 3 साल से डिजिटल मीडिया में काम कर रही हैं. कुछ समय तक उन्होंने नेशनल, बिहार-झारखंड और पॉलिटिकल बीट पर काम किया. इसके बाद बीते 2 साल से उन्होंने जी न्यूज में एंटरटेनमेंट बीट पर काम करना शुरू किया. अभी फिलहाल वह एंटरटेनमेंट बीट पर ही एक्टिव हैं. जी न्यूज से पहले उन्होंने सुदर्शन चैनल, इनखबर वेबसाइट और फ्रीलांस काम किया है. पिछले साढ़े तीन साल से जी न्यूज के साथ काम कर रही हैं. उन्होंने मास कम्युनिकेशन में सिंघानिया यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में ही पोस्ट ग्रेजुएशन की है. पत्रकारिता के साथ उन्हें कहानियां लिखने का भी काफी शौक है. आप काजोल के साथ kajol.gupta@India.com पर या एक्स और इंस्टाग्राम हैंडल्स पर कनेक्ट कर सकते है. सीधे ईमेल पर इनसे जुड़ सकते हैं.     
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