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Explainer: आधी दुनिया, 32 ट्रिलियन डॉलर की ताकत, Cross Border पैमेंट पर नजर... BRICS से भारत को कितना आर्थिक फायदा?

Takeaways for India in BRICS: भारत अगले हफ्ते BRICS समिट का आयोजन करने जा रहा है. इसी बीच आइए जानते हैं कि भारत को BRICS से कितना आर्थिक फायदा है?

Explainer: आधी दुनिया, 32 ट्रिलियन डॉलर की ताकत, Cross Border पैमेंट पर नजर... BRICS से भारत को कितना आर्थिक फायदा?
Image Credit: ब्रिक्स समिट के कारण 11 सितंबर को केंद्र और दिल्ली सरकार के दफ्तर बंद रहेंगे.

BRICS Summit 2026: भारत 12 और 13 सितंबर को दिल्ली में ब्रिक्स समिट की मेजबानी कर रहा है. भारत हर बार की तरह इस बार भी BRICS समिट में सिर्फ घोषणाओं पर नहीं, बल्कि कारोबार जगत से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए आपसी सहयोग पर जोर देगा. लोकल करेंसी में पेमेंट, मजबूत सप्लाई चेन, न्यू डेवलपमेंट बैंक की ताकत, एआई और ग्लोबल साउथ की आवाज के साथ भारत ने इस बार अपना विजन और लक्ष्य हर बार की तरह बड़ा रखा है.

भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है. इसमें दुनिया की पांच प्रमुख उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका जुड़ी हैं. कुछ अन्य देशों ने ब्रिक्स में शामिल होकर इसे नए आयाम दिए हैं. 

ब्रिक्स की कामयाबी जरूरी है

अपनी सामूहिक ताकत और अहमियत को समझकर ब्रिक्स देश वैश्विक स्तर पर आर्थिक शक्ति संतुलन बदलने जैसी चर्चा कर चुके हैं. ब्रिक्स करेंसी वाले कॉन्सेप्ट से इतर, ये जानते हैं कि क्या भारत को BRICS से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कुछ आर्थिक और रणनीतिक लाभ मिलते हैं. यानी भारत को इससे क्या आर्थिक फायदा होता है? 

जानकारों का मानना है कि ब्रिक्स का सबसे प्रमुख मकसद वैश्विक कारोबार से अमेरिकी डॉलर की दादागिरी खत्म करना है, क्योंकि आज भी दुनिया का करीब आधा कारोबार डॉलर में होता है, जिसका बुरा असर बाकी देशों की करेंसी, जीडीपी और इकोनॉमी पर पड़ता है.

भारत को क्या फायदा?

ब्रिक्स का एजेंडा विशाल है, जिसमें भारत की अहम भूमिका है. आगामी समिट में 'सीमा पार भुगतान' यानी Cross-Border Payments पर खास ध्यान रहने की संभावना है. भारत चाहता है कि BRICS देशों के बीच व्यापार में स्थानीय मुद्राओं का इस्तेमाल बढ़े और अलग-अलग देशों के पेमेंट सिस्टम को आपस में ज्यादा बेहतर तरीके से जोड़ा जाए. भारत की ये कोशिश रुपये के अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल को बढ़ाने की उसकी व्यापक रणनीति से जुड़ी है.

BRICS के जरिए भारत को न सिर्फ आर्थिक बल्कि कई रणनीतिक फायदे मिलते हैं. इनमें वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार को लेकर अपनी बात प्रभावी ढंग से रखना, वैकल्पिक वित्तीय तंत्र विकसित करना और ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक तथा जलवायु परिवर्तन जैसे अहम मुद्दों पर सहयोग बढ़ाना शामिल है.

BRICS की सदस्यता भारत को Global South में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने का मौका देती है. इसके साथ ही भारत दूसरे उभरते देशों के साथ आर्थिक और सांस्कृतिक रिश्ते मजबूत करता है.

सबसे बड़ा वित्तीय हथियार

डेवलपमेंट और फाइनेंस (फंडिंग) के मामले में BRICS काफी प्रगति कर चुका है. 2015 में संस्थापक देशों ने न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की स्थापना की थी. यह बैंक उभरते बाजारों में इंफ्रास्ट्रक्चर और टिकाऊ विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराता है. यानी कारोबारी और कूटनीतिक शतरंज की बिसात बिछ चुकी है. बस कुछ सही कदम बढ़ाकर ब्रिक्स जल्द ही नया इतिहास रच सकता है. 

भारत चाहता है कि BRICS कारोबारियों के लिए ज्यादा उपयोगी बने ताकि ब्रिक्स देशों के बाजारों को आपस में जोड़ा जा सके. बाजार जुड़ेंगे तो कारोबार बढ़ेगा. कारोबार बढ़ेगा तो लोगों को रोजगार मिलेगा. देश में कैश का फ्लो बढ़ेगा. रुपया मजबूत होगा. रुपया मजबूत होगा तो पहले जीडीपी फिर इकोनॉमी मजबूत होगी.

  1. भारत और ब्रिक्स देशों के बीच का कारोबार 416 अरब डॉलर हो चुका है.
  2. भारत के निर्यात की बात करें तो ब्रिक्स देशों में भारत का कुल निर्यात लगभग 96 अरब डॉलर रहा. जो भारत के कुल निर्यात का करीब 22 फीसदी बैठता है.


 

NDB अब तक बुनियादी ढांचे और सतत विकास से जुड़ी करीब 120 परियोजनाओं के लिए लगभग 39 अरब डॉलर की मंजूरी दे चुका है. इसकी अधिकृत पूंजी 100 अरब डॉलर है. बैंक की स्थापना के समय इसकी कुल 50 अरब डॉलर की सदस्यता वाली कैपिटल में भारत की हिस्सेदारी 20 फीसदी थी. 

भारत में बीते कुछ सालों में मेट्रो, रोड और ट्रांसपोर्ट की दर्जनों परियोजनाओं में एनडीबी की फंडिंग हुई है. जो अन्य संस्थाओं से होने वाली फंडिंग की तुलना में ज्यादा किफायती है. 

इस तरह ब्रिक्स, भारत के लिए कई मायनों में आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हुआ है, हालांकि इसके अपेक्षित आर्थिक नतीजे मिलने अभी बाकी हैं.

भारत BRICS के भीतर जटिल समीकरणों को संभालने और विभिन्न बड़ी शक्तियों के साथ अपने रिश्तों में संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है. 2026 की समिट में भी भारत का फोकस इसके सामूहिक लक्ष्यों की पूर्ति पर रहेगा.

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About the Author

Shwetank Ratnamber

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श्वेतांक रत्नाम्बर वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 22 वर्षों से ज्यादा का व्यापक अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय (देश-दुनिया) खबरों की डेस्क पर कार्यरत हैं. समसामयिक मुद्दों, वैश्विक राजनीति और कूटनीति पर गहरी समझ रखने वाले श्वेतांक जटिल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और राजनीतिक समीकरणों का सटीक विश्लेषण करने के विशेषज्ञ हैं.Zee News डिजिटल से पहले उन्होंने ज़ी मीडिया नेटवर्क के ग्लोबल न्यूज़ चैनल 'WION' के साथ काम किया है. इस दौरान उन्होंने 'Gravitas', 'The West Asia Post' और 'One Africa' जैसे कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्राइम-टाइम शोज़ के हिंदी प्रोडक्शन और इंटरप्रिटेशन में अहम भूमिका निभाई. 2004 से शुरू हुए अपने पत्रकारिता करियर में श्वेतांक ने रिपोर्टिंग और एंकरिंग के साथ-साथ चार लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की व्यापक ग्राउंड कवरेज की है.जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा के बाद मास कम्युनिकेशन और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाले श्वेतांक लंबे समय से 'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया' (PCI) के सम्मानित सदस्य हैं.आप श्वेतांक रत्नाम्बर से सीधे shwetank.ratnamber@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), मेटा (फेसबुक) और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.' 
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