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Baba Vanga Prediction Gold Price 2027: आज की तारीख में गोल्ड का भाव प्रति दस ग्राम 1.5 लाख रुपये से ऊपर है. आज से ठीक एक साल पहले सितंबर अक्टूबर 2025 में ये एक लाख रुपये प्रति दस ग्राम के भाव से बिक रहा था. यही नहीं, सोने का भाव 2026 में 1 लाख 75 हजार से ऊपर तक जा चुका है. अब आप सोच रहे होंगे हम आपको सोने के नए पुराने भाव क्यों बता रहे हैं, तो इसके पीछे एक चौंकाने वाली भविष्यवाणी है.
अगर कोई आपसे ये कहे कि अगले साल यानी 2027 में सोना का भाव तीन लाख रुपये प्रति दस ग्राम जा सकता है, तो आपको हैरानी के सिवा कुछ नहीं होगी. इसकी वजह ये है कि पिछले कई महीनों से सोने में उतार-चढ़ाव जारी है. कभी सोना उछलकर डेढ़ लाख के पार चला जाता है, तो कभी अचानक गिर कर एक लाख 40 हजार के भाव के नीचे. ऐसे में 3 लाख रुपये वाली भविष्यवाणी का आधार क्या है.
बाबा वेंगा के बारे में आपने जरूर सुना होगा. इन्हें बाल्कन का नास्त्रेदमस कहा जाता है. बाबा वेंगा की वैसे तो कई भविष्यवाणियां सच साबित हुई हैं. लेकिन ये पहली बार है, जब उनकी भविष्यवाणी को बाजार और गोल्ड जैसी धातु से जोड़ा जा रहा है. ये भविष्यवाणी बाबा वेंगा ने करीब 50 साल पहले की थी.
आज हम आपको इसी भविष्यवाणी को मार्केट एक्सपर्ट्स के जरिए समझाएंगे. अगर आज से 50 साल पहले कोई भविष्यवक्ता गोल्ड की कीमत 3 लाख रु. प्रति दस ग्राम होने की बात कह गया है, तो आज की दुनिया में इस कीमत को लेकर समीकरण क्या है. अगर भाव इतनी तेजी से बढ़ेंगे, तो इसके फैक्टर क्या होंगे.
1940 के दशक में जब पूरा यूरोप दूसरे विश्वयुद्ध की त्रासदी से गुजर रहा था, तब युगोस्लाविया के मैसिडोनिया के रहने वाले 30 साल के वेंजेलिया पांडेवा गुश्टेरोवा यानी बाबा वेंगा ने एक भविष्यवाणी की थी. आज इसे उत्तर मैसिडोनिया कहते हैं.
एक ऐसी भविष्यवाणी थी, जिसे सुनकर तमाम युद्ध और बाजार विशेषज्ञ हैरान रह गए, बाबा वेंगा ने अपनी शुरूआती भविष्यवाणी में कहा था कि दूसरा विश्वयुद्ध धरती पर अब तक के सबसे बड़े महाविनाश के साथ खत्म होगा.
6 और 9 अगस्त 1945 को ठीक वैसा ही हुआ. जापान के दो शहरों पर एटम बम गिराने से जो तबाही मची, वैसी तबाही दुनिया ने नहीं देखी थी. इसी महाविनाश के बाद जापान ने सरेंडर किया और दूसरा विश्वयुद्ध खत्म हुआ.
जब बाबा वेंगा ने कहा, दूसरे विश्वयुद्ध के बाद सोना बनेगा वर्ल्ड इकोनॉमी का आधार!
हम बाबा वेंगा की उस पहली भविष्यवाणी की तह तक जाएंगे कि आखिरकार सोना कैसे दुनिया के कारोबार और देशों के मुद्राकोष की अहम धातु बन गया. उससे पहले आपकी जिज्ञासा होगी, क्या सोना अगले साल यानी 2027 में 3 लाख रुपये प्रति दस ग्राम तक जा सकता है...?
तो सबसे पहले उस जिज्ञासा को शांत करते हैं, आखिर बाबा वेंगा ने गोल्ड को लेकर 2027 में सबसे ऊंची कीमत की बात क्यों कही. बाबा वेंगा की भविष्यवाणी को लेकर दावा किया जा रहा है कि वर्ष 2027 में गोल्ड ऑलटाइम हाई रहने वाला है.
कहा जा रहा है कि वर्ष 2027 में ऐसा ग्लोबल फाइनेंशियल संकट आ सकता है कि कैश की भारी कमी हो जाएगी. इससे सोने की कीमत में जबरदस्त तेजी आ सकती है. तब सोने का भाव 2.82 लाख रुपये के पार चला जाएगा.
सवाल ये है कि मौजूदा हालत में सोना अगर ऑलटाइम हाई पर जाएगा, तो इसकी वजहें क्या हो सकती. इस बारे में हमने एक्सपर्ट्स से ये जानने की कोशिश की.
अलग अलग प्लेटफॉर्म्स पर किये जा रहे दावों के मुताबिक, बाबा वेंगा ने 2027 में सोने की कीमत बढ़ने की भविष्यवाणी 1980 के दशक में की थी. कुछ रिपोर्ट्स में ये दावा किया जा रहा है कि 10 ग्राम सोने की कीमत 2027 में 2.62 लाख रुपये से 2.82 लाख रुपये प्रतिग्राम 10 ग्राम तक पहुंच सकता है. इन दावों के पीछे कोई प्रमाणित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है. लेकिन सोना में पिछले एक डेढ साल में जो उतार चढाव हुआ है, वो अपने आप में बहुत सारे संकेत दे रहा है.
साल 2026 की हालत किसी से छिपी नहीं. मिडिल ईस्ट में जंग के साथ जिस तरह कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं और दुनिया भर में उर्जा संकट खड़ा हुआ है, उसने सबसे ज्यादा अनिश्चित बाजार को बनाया है.
दुनिया भर के शेयर बाजार गिरावट से अब तक नहीं उबर पा रहे. इसी दौरान सोना अपने ऑल टाइम हाई पर पहुंचा. यानी लोगों ने दुनिया भर की तमाम अनिश्चिताओं को छोड़कर सबसे ज्यादा भरोसा सोने पर जताया. सोने की चमक 2025 से बढ़ती चली गई. 1 जनवरी 2025 को यह 76,162 रु प्रति तोला था, जो 7 मार्च को 85,966 रुपये प्रति तोला हो गया.
सोने की कीमतों में ये पहली बड़ी छलांग थी. इसके आधार पर तमाम कयास लगाए जाने लगे और इस आधार पर सोने की खरीदारी बढ़ने लगी. आम लोगों के साथ दुनिया के सभी देशों ने अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ाने शुरू कर दिए. इसका अंजाम सोने की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल में दिखा.
सोने का भाव 21 अप्रैल 2025 को 99,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंचा. इसके बाद 31 दिसंबर 2025 को 1,33,195 रुपये हो गया. जबकि 29 जनवरी 2026 को यही दाम बढ़कर 175340 रुपये हो गए. वहीं 8 अक्टूबर 2026 को इसका रेट 147463 रुपये रहा. सवाल है कि सोने की कीमतों में ये उतार चढ़ाव क्या संकेत देता है.
यह भी सवाल है कि क्या बाबा वेंगा को गोल्ड की कीमतों में इन्हीं उतार चढ़ाव का आभास 50 साल पहले हो गया था? इस भविष्यवाणी का आधार सीधा सीधा आर्थिक संकट से जुड़ा है, जिसे लेकर कई अर्थशास्त्री और वैज्ञानिक भी अनुमान लगा चुके हैं. संभावना जताई जा रही है कि 2027 का साल आर्थिक संकट का साल हो सकता है. इसलिए सोना ऑल टाइम हाई प्राइस पर पहुंच सकता है.
आज सोना की मात्रा और इसकी कीमतें किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और उसकी मुद्रा की ताकत तय करती हैं. यहां कुछ तथ्य आप गोल्ड के बारे में और जान लीजिए. सोना खदान की किसी एक चट्टान में ठोस रूप में नहीं मिलता, बल्कि ये चट्टानों में बिखरा होता है. अमेरिकी जियोलॉजिकल सोसायटी के मुताबिक धरती पर सभ्यता के विकास के साथ अब तक 2 लाख 44 हजार मीट्रिक टन सोने का पता लगाया जा चुका है. लेकिन पूरी धरती पर सोना कितना है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है.
अगर सिर्फ भारत का ही इतिहास देखें, तो बुद्ध काल से लेकर मध्ययुग तक स्वर्ण मुद्राओं की अहमियत साफ दिखती है. राजा महाराजाओं के खजाने से लेकर आम लोगों में इसके इस्तेमाल और संग्रह करने की ललक तक, भारत में इतना सोना था कि इसे सोने की चिड़िया कहा जाता था.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक भारत में आज भी आम लोगों के पास 22 हजार टन सोना है. सरकार के गोल्ड रिजर्व में 841 टन सोना है. 3 से 4 हजार टन सोना 13 मंदिरों के पास है. 13 मंदिरों का सोना सभी अरबतियों की संपत्ति से ज्यादा है. भारत में 10 हजार टन का अनुमानित स्वर्ण भंडार है.
आधुनिक युग में स्वर्ण भंडार को लेकर सबसे बड़ी बाजी अमेरिका ने मारी. अमेरिका में सोने की खदानें सबसे कम हैं, लेकिन उसका गोल्ड रिजर्व पूरी दुनिया के टॉप 5 स्वर्ण संपन्न देशों के बराबर है.
पूरी दुनिया में गोल्ड रश यानी सोना को अपने खजाने में सुरक्षित करने की होड़ 19वीं सदी में शुरु होती है. 20वीं सदी में दो विश्वयुद्धों के बाद जब पूरी दुनिया की अर्थव्यस्था चरमराई तब गोल्ड रिजर्व ने ही ये तय किया किसकी मुद्रा कितनी ताकतवर होगी. इकोनॉमिस्ट आकाश जिंदल के मुताबिक, अमेरिका ने पहले से ही गोल्ड रिजर्व इकट्ठे करने शुरू कर दिए थे. धीरे-धीरे वो सोने के मामले में धनकुबेर बन गया. यही वजह है कि आज यूएस की करंसी डॉलर में ही दुनिया का अधिकतर व्यापार होता है.
आज भी किसी देश की मुद्रा की ताकत का पैमाना यही सोना है. आज भी अगर किसी देश की करेंसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर होती है, तो सोने का भंडार उस देश की क्रय शक्ति और उसकी आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने में मदद करता है.
मिसाल के तौर पर भारत का आर्थिक संकट ही लीजिए. वर्ष 1991 में जब भारत की इकोनॉमी डूब रही थी और उसके पास जरूरत की चीजें आयात करने के लिए विदेशी मुद्रा नहीं थी, तब सरकार ने सोना गिरवी रख पैसे जुटाए थे. बाद में जब आर्थिक हालात सुधरे, तो वो गोल्ड रिजर्व वापस आया.
यानी किसी देश के पास जितना स्वर्ण भंडार, उतनी ही उस देश की अर्थव्यवस्था मजबूत. इसी गोल्ड रिजर्व के आधार पर दुनिया की वित्तीय संस्थाएं किसी देश पर भरोसा करती हैं. यानी एक लफ्ज में कहें, तो सोना है तभी आज का संसार है.
गोल्ड माइनिंग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में सबसे ज्यादा सोने के ज्ञात-अज्ञात भंडार रेगिस्तानी इलाके में ही हैं. चाहे वो भारत का थार रेगिस्तान हो, अफ्रीका का सहारा मरुअस्थल हो या फिर मिडिल ईस्ट के सैंड डेजर्ट्स. वैज्ञानिकों की इस मान्यता पर बड़ी मुहर सऊदी अरब के रेगिस्तान में लगी, जहां एक रिसर्च के दौरान पूरे अरब जगत की सबसे बड़े स्वर्ण भंडार का पता चला. इसी तरह चीन के रेगिस्तान में भी 1000 टन स्वर्ण भंडार मिला.
धरती की क्रस्ट, यानी ऊपरी परत के नीचे जिस गहराई पर मिलता है सोना, वो अपने आप हैरान करने वाला है. वो गहराई, जहां कुछ हजार साल पहले समुद्र था, आज उसी गहराई के ऊपर रेगिस्तानी या पठारी चट्टानों की ऊंची परत दब चुकी है.
इसे आप दुनिया की सबसे बड़ी 4 गोल्ड माइन्स की भौगोलिक स्थिति से समझिए
1. ग्रासबर्ग, इंडोनेशिया
(तटीय पठार)
सबसे बड़ी खदान
2. नेवाडा, अमेरिका
(शुष्क रेगिस्तान)
बड़ा गोल्ड माइंनिंग कैंपस
3. मपनोंग, दक्षिण अफ्रीका
(रेगिस्तानी पठार)
सबसे गहरी खदान
4. ओलंपियाडा, रूस
(बर्फीला रेगिस्तान)
सबसे समृद्ध खदानों में एक
दुनिया की इन चार बड़ी स्वर्ण खदानों और इनकी भौगोलिक स्थिति पर गौर कीजिए. इंडोनेशिया की खदान अगर सबसे अमीर और सबसे बडी है, तो वो 3 से 4 हजार मीटर की ऊंचाई वाले पठारों के नीचे है. इसी तरह अमेरिका का नेवाडा माइन्स, बेहद ही सूखे पठारी रेगिस्तान के बीच है. यही स्थिति दक्षिण अफ्रीका के मपनोंग खदान की है. रूस का ओलंपियाडा खदान तो बर्फीले रेगिस्तान के बीचोबीच है, जहां गोल्ड रॉक्स की खुदाई सबसे मुश्किल हो जाती है.
रेगिस्तान, गहराई और सोने की बेहद ही मुश्किल खुदाई. ये सब कुछ मिलकर ही सोने को धरती के सबसे दुर्लभ धातुओं में से एक बनाता है. आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे, कि जिस 10 ग्राम सोने की कीमत आजकल डेढ़ लाख रु. के करीब है, उसे निकालने के लिए 10 टन चट्टानों की पिसाई करनी पड़ती है.
अगर दुनिया भर का औसत देखें, तो 4 ग्राम सोना प्रति 1 टन चट्टान है. सोने की मात्रा सीधे तौर पर चट्टान की किस्म और गहराई पर निर्भर है. सामान्य तौर पर प्रति टन 5 ग्राम सोना निकलने वाली चट्टानों को अच्छा माना जाता है. बेहतरीन गुणवत्ता वाली चट्टानों से 10 से 15 ग्राम प्रतिटन सोना निकलने का भी रिकार्ड है. खदान जितनी गहरी है, उतना ही गोल्ड रॉक्स की ढुलाई मुश्किल होती है. खदान के बाहर गोल्ड रॉक्स को निकालने के बाद महीन पिसाई और उसके बाद छनाई करनी पड़ती है.
सऊदी अरब वाली गोल्ड माइन की सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है, कि यहां प्रति टन दस ग्राम से ज्यादा सोना वाली चट्टानें बेहद कम गहराई पर मिलती हैं. लेकिन ऐसी स्थिति के बावजूद सोचिए कि यही सोना 2027 में 3 लाख रूपये प्रति 10 ग्राम पहुंचेगा और आर्थिक संकट के बीच दुनिया के लिए सहारे और ताकत का पर्याय बनेगा.
(पैकेज स्टोरी)