SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

'बैलेट' से हुए चुनाव में भी जीरो! EVM को कोसने वाले राहुल गांधी अब कांग्रेस की हार का ठीकरा किस पर फोड़ेंगे?

EVM को लगातार कोसने वाले राहुल गांधी अब 'बैलेट' से हुए चुनाव में भी फ्लॉप साबित हुए हैं. देश के कई राज्यों में हुए एमएलसी चुनावों में उनकी पार्टी सभी सीटें हार गई हैं. सवाल है कि अब वे अपनी हार का ठीकरा किस पर फोड़ेंगे.

Edited By Devinder Kumar
Published: Oct 28, 2026, 11:38 PM IST | Updated: Oct 28, 2026, 11:44 PM IST
Image Credit: बैलेट से हुए एमएलसी इलेक्शन में भी क्यों हार गई कांग्रेस
Join

विपक्ष की अगुवाई करने वाली कांग्रेस, EVM, SIR और वोट चोरी के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ पिछले कुछ समय से आक्रामक है और आंदोलन के मोड में है. लेकिन आज जब बैलेट पेपर से हुए चुनाव के नतीजे आए तो उसमें भी वो शून्य पर सिमट गई. MLC के चुनावी EXAM में कांग्रेस को ज़ीरो मार्क मिला है.

कांग्रेस की सभी 28 सीटों पर हार

चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों पर हुए चुनाव के नतीजे आए हैं. उसमें कांग्रेस का नुकसान इसलिए बड़ा है, क्योंकि उसे दो स्तर पर हार का सामना करना पड़ा है. एक तो कांग्रेस शासित राज्य में भी उसे हार मिली और दूसरा जिस बैलेट पेपर से चुनाव कराने की पैरोकारी करते हुए वो सरकार विरोधी अभियान चला रही है, उसमें भी उसे हार मिली. इसलिए बीजेपी इसे कांग्रेस की नैतिक पराजय बता रही है. अब हम बैलेट पेपर से हुए चुनाव में कांग्रेस की डबल हार का विश्लेषण करेंगे.

डॉक्टर भीमराव आंबेडकर का मानना था कि "लोकतंत्र का हर चुनाव देश की रगों में नया खून दौड़ने जैसा है. यह जनता को अपनी ताकत पहचानने और नई दिशा तय करने का अवसर देता है. दूसरा तथ्य ये भी है कि चुनाव जनता के साथ-साथ राजनीतिक दलों को भी अपनी ताकत पहचानने का अवसर देते हैं. चार राज्यों की 28 सीटों पर विधान परिषद के चुनाव के जो नतीजे आए हैं, उनका संदेश है कि कांग्रेस कमजोर हुई है. सबसे पहले हम आपको बताते हैं कि किन-किन राज्यों में किसकी जीत हुई है.

यूपी की 11 सीटों पर हुए चुनाव में मुकाबला बराबरी पर

उत्तर प्रदेश में 11 सीटों पर चुनाव हुए थे. इनमें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की 6 और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की 5 सीटें हैं. इन 11 सीटों पर बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला था, जिसमें अब तक नतीजे और रुझानों में बीजेपी को 6 और समाजवादी पार्टी को 5 सीटें मिलती दिख रही हैं.

बिहार में 8 सीटों पर चुनाव हुए थे. इनमें शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की 4-4 सीटें हैं. बिहार में तीन सीटों पर बीजेपी, एक पर जेडीयू, एक पर आरजेडी और एक पर प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज को जीत मिली, जबकि दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की.

महाराष्ट्र में 3 स्नातक और 2 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव हुए थे. इन पांच सीटों में से तीन पर NDA को जीत मिली जबकि दो सीटों पर शरद पवार की NCP ने जीत हासिल की. कर्नाटक में 2 शिक्षक और 2 स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव हुए थे. इनमें 3 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की और एक सीट पर बीजेपी के सहयोगी JDS को जीत मिली.

28 सीटों के नतीजों में सबसे ज्यादा परेशान करने वाले आंकड़े कांग्रेस के लिए ही हैं. कांग्रेस 28 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन किसी भी राज्य में उसे एक भी सीट नहीं मिली. जबकि उसके सहयोगी दलों का प्रदर्शन अच्छा रहा है. महाराष्ट्र, यूपी से लेकर बिहार तक कांग्रेस के सहयोगी दलों ने अपनी ताकत दिखा दी, लेकिन कांग्रेस शक्तिविहीन साबित हुई. सबसे पहले हम आपको विधान परिषद चुनाव के बारे में संक्षिप्त जानकारी देना चाहेंगे.

एमएलसी चुनाव में कौन देते हैं वोट?

विधान परिषद में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में वही लोग वोट देते हैं, जिनके पास ग्रेजुएशन की डिग्री होती है. शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में वे लोग वोट देते हैं, जो हाई स्कूल या कॉलेज में शिक्षक होते हैं. शर्त ये भी है कि शिक्षकों के पास कम से कम तीन साल पढ़ाने का अनुभव हो. ग्रेजुएट शिक्षक एक ही चुनाव में स्नातक और शिक्षक, दोनों निर्वाचन क्षेत्रों के उम्मीदवारों को वोट दे सकता है.

सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि ये चुनाव पूरी तरह से बैलेट पेपर पर ही होते हैं. इनमें EVM का इस्तेमाल नहीं होता. कांग्रेस लगातार EVM हटाकर बैलेट पेपर लाने की मांग करती रही है. एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाले कांग्रेस और INDIA गठबंधन के 'वोट बचाओ, देश बचाओ' आंदोलन की एक महत्वपूर्ण मांग बैलेट पेपर से चुनाव कराना भी है. EVM को संदिग्ध बताकर जिस बैलेट पेपर से कांग्रेस चुनाव कराने की मांग कर रही है, उसी से हुए चुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए बड़ा झटका क्यों हैं, इसे समझिए.

अपने गढ़ कर्नाटक में ही हार गई कांग्रेस

कर्नाटक में बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जनता दल सेक्युलर के एपी रंगनाथ ने जीत हासिल की है. ये सीट परंपरागत रूप से कांग्रेस की रही है. कांग्रेस के दिग्गज नेता पुट्टन्ना आर पिछले पांच चुनावों से यहां जीत रहे थे लेकिन कांग्रेस की सरकार रहते हुए भी इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

कांग्रेस को दूसरा आघात बिहार में लगा है. वहां दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा पिछले दो टर्म से जीत रहे थे लेकिन इस बार हार गए. नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में पिछली बार कांग्रेस जीती थी लेकिन इस बार बीजेपी ने उससे ये सीट छीन ली है.

पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र भी कांग्रेस के जयंत आजगांवकर मौजूदा विधान परिषद सदस्य थे. इस बार बीजेपी के कौस्तुभ गावड़े ने कांग्रेस को रेस से बाहर कर दिया है. विधान परिषद चुनाव में चार से सीधे शून्य पर आना. ये नतीजे कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का विषय हैं.

बैलेट पेपर से हुए चुनाव में नहीं जीत पाई कांग्रेस

विशेषकर बेंगलुरु में 30 साल से जीत रहे उम्मीदवार जिस तरह कांग्रेस की सरकार रहते हुए हार गए, वो बताता है कि वहां कांग्रेस सत्ता और संगठन को वोटों में नहीं बदल सकी. ये नतीजे कांग्रेस के EVM से वोट चोरी के नैरेटिव को भी कमजोर करने वाले हैं. कांग्रेस हार का ठीकरा अक्सर EVM पर फोड़ती है, लेकिन बैलेट पेपर पर मिली हार की जिम्मेदारी किसकी है? इसलिए राजनीतिक धारणा के स्तर पर कांग्रेस को दोहरा नुकसान हुआ है.

ये भी पढ़ें- MLC चुनाव में खाता नहीं खुलने पर PM मोदी ने ले ली कांग्रेस की मौज! पूछा- बैलेट पेपर से हुए चुनाव, कितनी सीटें आईं?

इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तंज कसते हुए लिखा है कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक - इन चार बड़े राज्यों की 28 सीटों पर एमएलसी चुनाव हुए. चुनाव मतपत्रों के माध्यम से हुए. अनुमान लगाइए कि कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं?

पीएम मोदी ने जैसे ही शब्दों का नश्तर चलाया वैसे ही कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया आई. कांग्रेस के नेता कह रहे हैं कि सरकार फिर सभी चुनाव बैलेट से क्यों नहीं कराती? हम आपको सुनाते हैं कि इस हार के बाद कांग्रेस और क्या कह रही है?

महान स्वतंत्रता सेनानी और समाजवाद के विचारक..राम मनोहर लोहिया का मानना था कि "राजनीतिक दलों को चुनाव के नतीजों से घबराने या अहंकार करने की बजाय उनमें छिपे जनता के संदेश और उनकी ज़रूरतों को समझने का प्रयास करना चाहिए."

आखिर कहां चूकती जा रही है कांग्रेस?

कांग्रेस के लिए भी ये समझने का समय है कि आखिर कहां चूक हुई कि पार्टी चार से सीधे शून्य पर सिमट गई. वो भी तब, जब बैलेट पेपर से हुए चुनाव में उसे हार मिली है, जबकि कांग्रेस के सहयोगी दलों को इस चुनाव में फायदा हुआ है. वाराणसी और मथुरा के साथ-साथ लखनऊ और पटना में भी विपक्ष ने जीत हासिल की है.

ये भी पढ़ें- MLC Elections 2026: UP-बिहार समेत 4 राज्य और 28 सीटें, देखिए बैलेट पेपर वाले इलेक्शन में किसने मारी बाजी

वाराणसी के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा बढ़त बनाए हुए हैं. 2020 में भी समाजवादी पार्टी के आशुतोष सिन्हा ने ही वहां जीत हासिल की थी. हालांकि इस बार बीजेपी का आरोप है कि उन्हें जिताने के लिए धांधली की जा रही है. ऑब्जर्वर प्रांजल यादव पर गड़बड़ी करने का आरोप लगाते हुए बीजेपी कार्यकर्ता हंगामा कर रहे हैं.

वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने जीत हासिल की है. हालांकि, पहले भी यह सीट एसपी के लाल बिहारी यादव के पास ही थी. मथुरा-आगरा शिक्षक सीट पर समाजवादी पार्टी के डॉ. आकाश अग्रवाल चुनाव जीते हैं. पिछली बार आकाश अग्रवाल ने यह सीट निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीती थी. मतलब समाजवादी पार्टी के लिए ये लाभ जरूर है लेकिन बीजेपी के लिए लॉस नहीं है.

लखनऊ स्नातक सीट पर समाजवादी पार्टी की कांति सिंह चुनाव जीतती दिख रही हैं. यह बीजेपी के लिए झटका इसलिए है क्योंकि 2020 में बीजेपी के अवनीश सिंह ने यहां जीत हासिल की थी. इसी तरह पटना में भी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में आरजेडी के डॉ. संजीव कुमार ने जीत हासिल की है. वहां उन्होंने 30 साल से लगातार जीत रहे बीजेपी के नवल किशोर यादव को हरा दिया.

यूपी-बिहार में बीजेपी को मिली सीटों पर विपक्ष क्यों खुश?

यूपी और बिहार की दो महत्वपूर्ण सीटों पर बीजेपी की हार से विपक्षी पार्टियां खुश हो सकती हैं, लेकिन सियासी तौर पर बीजेपी इसलिए आश्वस्त है क्योंकि 2020 के मुकाबले इस बार बीजेपी को दो और NDA को कुल तीन सीटें ज्यादा मिली हैं.

एनडीए को जो तीन ज्यादा सीटें मिली हैं, वो तीनों सीटें भी कांग्रेस से ही छीनी हैं. बैलेट पेपर से हुए चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद बीजेपी कह रही है कि EVM को हार का बहाना बनाने वाली पार्टी को इस चुनाव ने आईना दिखा दिया है. हम आपको सुनाते हैं कि बीजेपी के नेता बैलेट पेपर वाले नैरेटिव को लेकर राहुल गांधी पर किस तरह शब्दों के नश्तर चला रहे हैं.

राजनीति की बिसात पर हर दल एक सही अवसर की तलाश में रहता है. आज की राजनीतिक परिस्थितियों में बीजेपी के पास कांग्रेस को चौतरफा घेरने का यह एक बेहद अनुकूल और बड़ा मौका है. बीजेपी के नेता यही कर रहे हैं. बीजेपी के लिए यह अवसर इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि 2024 के बाद से EVM से हुए चुनावों में तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकायों और उपचुनावों में कांग्रेस जीत हासिल कर चुकी है.

केरल में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा EVM से कराए गए स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बड़ी जीत हासिल की. आज वहां कांग्रेस की सरकार है. लेकिन आज बैलेट से हुए चुनाव में कांग्रेस 2020 में जीती हुई सीटें भी हारकर शून्य पर सिमट गई है. इससे पहले असम और गुजरात के नगर निकाय चुनावों में बैलेट पेपर से मतदान हुआ था और कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था.

आखिर क्यों जनसमर्थन घट रहा है कांग्रेस का?

इसलिए बीजेपी कह रही है कि कांग्रेस अपनी हार को EVM की दीवार के पीछे छिपाना चाहती है, जबकि सच्चाई ये है कि उसे जमीनी स्तर पर जनसमर्थन नहीं मिल रहा है. ध्यान देने वाली बात ये है कि, कांग्रेस के सहयोगी दल इसी बैलेट पेपर से हुए चुनाव में जीत रहे हैं. लेकिन शून्य पर सिमटने के बाद भी कांग्रेस कह रही है कि सरकार लोकसभा या विधानसभा का चुनाव बैलेट पेपर से क्यों नहीं करवाती. कांग्रेस के इस कॉन्फिडेंस पर वैसे अलग से पॉलिटिकल डिबेट भी हो सकती है. लेकिन

एक दूसरी सच्चाई ये भी है कि विधान परिषद के चुनाव विधानसभा या लोकसभा चुनावों से बिल्कुल अलग होते हैं. इनमें वोटिंग का गणित अलग तरह से काम करता है. इसलिए कांग्रेस अब भी EVM के खिलाफ आक्रामक है. हालांकि, इस आक्रामकता के साथ-साथ कांग्रेस को जमीनी स्तर पर भी काम करना चाहिए और इस पर आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर वोटर उससे क्यों नहीं जुड़ पा रहे हैं.
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES