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पुतिन की 'सीक्रेट फौज', दुश्मनों में खौफ: कौन हैं रूस के खूंखार किलर्स, साए की तरह घूमते हैं साथ

पुतिन के बॉडीगार्ड्स की चर्चा अकसर होती है. ये लोग हर वक्त परछाई की तरह पुतिन के साथ रहते हैं. लेकिन कई ऐसी बातें हैं, जनता नहीं जानती. जैसे ये लोग पुतिन के लिए खाना बनाते हैं और उनके घर की सफाई भी करते हैं.

पुतिन की 'सीक्रेट फौज', दुश्मनों में खौफ: कौन हैं रूस के खूंखार किलर्स, साए की तरह घूमते हैं साथ

रूस पर राज करते हुए व्लादिमीर पुतिन को 25 साल हो चुके हैं. हमेशा वह ऐसे लोगों से घिरे रहते हैं, जो उनके बेहद करीबी हैं. कुछ तो उनको बरसों से जानते हैं. जैसे सेंट पीटर्सबर्ग के सहयोगी यूरी कोवलचुक, जिनको पुतिन का पर्सनल बैंकर भी कहा जाता है. साथ ही बिलिनेयर ग्रेनेडी टिमचेनको भी पुतिन के खास हैं. रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई लावरोव भी पुतिन के करीबी हैं जबकि उनके बचपन के दोस्त प्योत्र कोलबिन का निधन हो गया है.

लेकिन पुतिन के सबसे करीबी लोगों में एक ग्रुप ऐसा है, जो अलग है. वे ऊंचे ओहदे नहीं मांगते, फिर भी अक्सर उन्हें ये मिल जाते हैं. वे पुतिन के प्रति वफादार हैं और अपनी जान देकर भी उनकी रक्षा करने को तैयार हैं. वे कोविड-19 महामारी के दौरान भी उनके साथ रहे, जब पुतिन ने खुद को राष्ट्रपति भवन में अलग-थलग कर लिया था. वे उनके बच्चों को भी सिक्योरिटी देते हैं. ये हैं व्लादिमीर पुतिन के बॉडीगार्ड्स.

पुतिन से फिदेल कास्त्रो ने क्या कहा था?

डोजियर सेंटर ने इस बात की जांच की है कि प्रेसिडेंशियल सिक्योरिटी सर्विस (SBP FSO) कैसे काम करती है. इसके लिए पुतिन के बॉडीगार्ड्स और सहयोगियों की पहचान की गई. उनकी गतिविधियों के पैटर्न का विश्लेषण किया है और यह पता लगाया गया कि पुतिन को हत्या की कोशिशों, जहर देने और निगरानी से कैसे बचाया जाता है.

एक बार डायरेक्टर ऑलिवर स्टोन से बातचीत में पुतिन ने याद करते हुए बताया, 'फिदेल कास्त्रो ने मुझसे कहा, क्या तुम जानते हो कि मैं अब तक जिंदा कैसे हूं'. पुतिन ने पूछा-'कैसे?', कास्त्रो ने कहा, 'क्योंकि मैं हमेशा अपनी सिक्योरिटी खुद चुनता हू्ं'. पुतिन के बॉडीगार्ड्स में बेलेन्की भी शामिल हैं. वह प्रेसिडेंशियल सिक्योरिटी सर्विस (एसबीपी) का हिस्सा हैं, जो फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस (एफएसओ) के तहत आती है. SBP सिर्फ पुतिन की ही नहीं , बल्कि उनके कई घरों की भी सुरक्षा करती है. उनका खाना बनाती है और परिसर की सफाई करती है.

बेलेन्की उन लोगों में से एक हैं, जो पुतिन के साथ हर जगह साये की तरह रहते हैं. उन्हें पुतिन की लगभग हर तस्वीर में देखा जा सकता है, चाहे वह देश के अंदर की यात्रा हो या विदेश की. ये उनके पर्सनल बॉडीगार्ड हैं, वे शायद ही कभी लाइमलाइट में आते हैं, फिर भी किसी भी भीड़ में अलग ही दिखते हैं, खासकर बेलेन्की. उनकी हाईट 6 फुट 5 इंच है. वे पुतिन से काफी लंबे हैं. जवानी के दिनों में वे एक प्रोफेशनल बास्केटबॉल खिलाड़ी थे.

 

मां के निधन के बाद बने पुतिन के बॉडीगार्ड

आवर सर्विस (Our Service) डॉक्युमेंट्री के मुताबिक, अपनी मां की मौत के बाद बेलेन्की को खेल छोड़ना पड़ा. इसके बाद उन्होंने अपने पिता से बात की. उन्होंने कहा, 'मेरे नक्शेकदम पर चलो' और फिर सर्विस में शामिल होने का फैसला कर लिया.' SBP में कई लोगों की तरह, पुतिन के भविष्य के बॉडीगार्ड ने भी अपने करियर की शुरुआत क्रेमलिन की कमांडेंट सर्विस से की थी. ये वे लोग होते हैं, जो यूनिफॉर्म पहनकर अपनी पोस्ट पर तैनात रहते हैं. छुट्टियों और 9 मई जैसे मौकों पर अक्सर उन्हें टीवी पर दिखाया जाता है.'

हालांकि, SBP में सभी लोगों को गार्ड सर्विस के जरिए भर्ती नहीं किया गया था. डोजियर सेंटर ने 33 ऐसे राष्ट्रपति बॉडीगार्ड्स की पहचान की है, जो 2024 में पुतिन के साथ यात्राओं पर गए थे. क्रेमलिन प्रेस सर्विस ने बिना नाम बताए उनकी तस्वीरें जारी की थीं, लेकिन फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके उनकी पहचान की गई.

पुतिन के बॉडीगार्ड्स की औसत उम्र 36 साल है. उनमें से ज्यादातर लोग अलग-अलग प्रांतों (14 लोग) या मॉस्को इलाके के छोटे कस्बों (10 लोग) से हैं. 8 मॉस्को से हैं और एक सेंट पीटर्सबर्ग से है. वे सभी रूस के यूरोपीय हिस्से से हैं और उनमें से ज्यादातर लोग काफी लंबे-चौड़े हैं.

 

कहां और कैसे चुने जाते हैं बॉडीगार्ड्स

SBP स्पेशल फोर्स के चीफ अलेक्जेंडर डुम्स्की ने 'आवर सर्विस' (Our Service) डॉक्यूमेंट्री में बताया है कि भर्ती के लिए कुछ जरूरी शर्तें हैं. कर्मचारी को हर चीज ऊपर से देखनी होती है. उन सभी के बाल छोटे कटे होते हैं. मूंछ, दाढ़ी, टैटू और पियर्सिंग (कम से कम शरीर के दिखाई देने वाले हिस्सों पर) मना हैं.

कई बॉडीगार्ड्स ने ओरियोल (Oryol) में FSO एकेडमी से ग्रेजुएट होने के बाद यह सर्विस जॉइन की. यह फेडरल सिक्योरिटी गार्ड्स के लिए मुख्य ट्रेनिंग यूनिट है, लेकिन कुछ लोग दूसरे डिपार्टमेंट से भी आए. उदाहरण के लिए, कम से कम दो लोग पहले FSB में काम कर चुके थे, जो KGB की जगह बनी संस्था है. डुम्स्की ने बताया कि राष्ट्रपति की सुरक्षा टीम अक्सर SBP स्पेशल फोर्स से लोगों को भर्ती करती है, जो बदले में दूसरी एजेंसियों और सीधे मिलिट्री एकेडमी से कैंडिडेट चुनती है.

इसके कुछ अपवाद भी हैं. SBP ऑपरेशनल ग्रुप के डिप्टी चीफ मिखाइल पोद्रेजोव ने बताया कि मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ जियोडेसी एंड कार्टोग्राफी से ग्रेजुएट होने के बाद, उन्होंने पहले FSO की स्पेशल कम्युनिकेशन और इन्फॉर्मेशन सर्विस जॉइन की, अपनी क्वालिफिकेशन बदली और आखिरकार प्रेसिडेंट सिक्योरिटी सर्विस में चले गए. पुतिन के बॉडीगार्ड्स में 'ऑल-रशियन स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ जस्टिस' और MGIMO के ग्रेजुएट की भी पहचान की गई है. MGIMO रूस की टॉप यूनिवर्सिटी है, जहां से डिप्लोमैट, इंटेलिजेंस ऑफिसर और सरकारी अधिकारी निकलते हैं.

सिलेक्शन का क्या प्रोसेस है?

बॉडीगार्ड्स को भी FSO के दूसरे कर्मचारियों की तरह ही कई इंटरव्यू और सिलेक्शन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. 'डोजियर' को दिए एक इंटरव्यू में FSO कैप्टन ग्लेब काराकुलोव ने कहा, 'यह प्रोसेस बहुत बारीकी से होता था. इसमें प्रोफेशनल सिलेक्शन, पॉलीग्राफ टेस्ट और कई तरह के इंटरव्यू होते हैं. वे यह पता लगाते थे कि आप कौन हैं और आपके दिमाग में क्या चल रहा है.

काराकुलोव अक्टूबर 2022 में देश छोड़कर भाग गए थे. वे स्पेशल कम्युनिकेशन सर्विस में काम करते थे, इसलिए उनके मामले में प्रोफेशनल सिलेक्शन में लॉजिक और मैथ के टेस्ट भी शामिल थे. बाकी चरण FSO में सभी के लिए एक जैसे होते हैं.

पॉलीग्राफ टेस्ट का इस्तेमाल यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि कहीं किसी का दूसरे देशों या आपराधिक संगठनों से कोई संबंध तो नहीं है. इसके अलावा, एक साइकोलॉजिस्ट भी हर उम्मीदवार से मिलता है, जिसका काम उनकी देशभक्ति को परखना होता है.

 

SBP अफसर ओलेग मखालिन ने ‘आवर सर्विस’ (Our Service) डॉक्यूमेंट्री में बताया, 'पर्सनल इंटरव्यू में, यह पता लगाया जाता है कि क्या यह शख्स सोच-समझकर इसमें शामिल होने का फैसला कर रहा है, क्या यह सच में उसकी अपनी पसंद है, न कि उसके माता-पिता या रिश्तेदारों की, जो कहते हैं- वहां जाओ, यह अच्छी जगह है, यहां इज्जत मिलती है, वे तुम्हें सब कुछ सिखाएंगे. ये लोग पूरी तरह समर्पित और देशभक्त होते हैं, जो अपनी मातृभूमि की रक्षा और देश की सेवा के लिए इस सर्विस में शामिल होते हैं. वे मौजूदा सरकार की नीतियों का पालन करते हैं.' मखालिन सरकारी आवासों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं.

कितनी मिलती है इन बॉडीगार्ड्स को सैलरी

इस पेशे की बेहद जरूरी चीज है शारीरिक फिटनेस. मखालिन ने जोर देते हुए कहा, 'बेशक, हमारे पास फुटबॉल और हॉकी खिलाड़ी हैं, लेकिन हमारे ज्यादातर लोगों के पास अलग-अलग मार्शल आर्ट्स में स्पोर्ट्स टाइटल या रैंक हैं.' कुछ समय पहले तक, पुतिन के पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर्स की आधिकारिक सैलरी काफी कम थी. टैक्स रिकॉर्ड से पता चलता है कि 2015 में उनमें से एक की तनख्वाह 56,000 रूबल (87,913 रुपये) प्रति महीना थी, जबकि 2018 में SBP के तीन कर्मचारियों की सैलरी 80,000 रूबल (1,22,042 रुपये) थी.

तब से, सैलरी शायद बढ़ गई है, और अब कई लोग 180,000 से 226,000 रूबल (1,85,447 से 2,32,928 रुपये) के बीच कमा रहे हैं. यह औसत FSO सैलरी से ज्यादा है. उदाहरण के लिए, काराकुलोव ने बताया कि 2022 के आखिर में, देश छोड़ने से कुछ समय पहले, वह लगभग 82,000 रूबल (1,14,129 रुपये) कमा रहे थे और ट्रैवल अलाउंस और पेड ओवरटाइम के साथ उनकी कमाई 100,000 रूबल (1,39,206 रुपये) तक पहुंच सकती थी.

पुतिन के बॉडीगार्ड्स की कुंडली

SBP की ट्रैवल यूनिट में कई लोग शामिल हैं, जो साए की तरह व्लादिमीर पुतिन के दौरों के वक्त उनके साथ रहते हैं. सरकारी फोटो रिकॉर्ड के आधार पर, पिछले साल पुतिन के साथ सबसे ज्यादा यात्रा करने वाले बॉडीगार्ड्स में एंटोन एफिनोजेनोव, आंद्रे एनेनकोव, अलेक्जेंडर गोरेलिकोव, अनातोली कोचकिन, कॉन्स्टेंटिन पैनिन, मैक्सिम स्टेपानोव, दिमित्री फोमिन, यारोस्लाव चुबको और यूरी श्चुरोव शामिल थे.

डोजियर ने इस बात की जांच की कि कई बॉडीगार्ड्स के फोन नंबर उनके जानने वालों की कॉन्टैक्ट लिस्ट में किस तरह सेव किए गए हैं. SBP के पांच कर्मचारियों के लिए कुछ अजीब टैग मिले. पावेल ग्नेजडिलोव, मैक्सिम गुत्सेन्को और विटाली केमेनोव के नंबरों के साथ 'पहाड़' नोट सेव था, जबकि निकिता बेलेंकी और आंद्रे लास्तोवेत्स्की के कॉन्टैक्ट्स के साथ 'किनारा' लिखा था. हो सकता है कि ये उन SBP ट्रैवल ग्रुप्स के कॉल साइन हों जिनसे ये कर्मचारी जुड़े हैं.

 

सिस्टम में दर्ज नहीं होतीं यात्राएं

बॉडीगार्ड्स राष्ट्रपति के विमान में व्लादिमीर पुतिन के साथ यात्रा करते हैं. ये यात्राएं उस नेशनल डेटाबेस में दर्ज नहीं होतीं, जिसमें रूस के भीतर सभी तरह के ट्रांसपोर्ट के लिए टिकट खरीद का रिकॉर्ड रखा जाता है. हालांकि, अधिकारियों की कमर्शियल एयरलाइन उड़ानें इस सिस्टम में दिखती हैं. एक सूत्र ने डोसियर को डेटाबेस से जानकारी दी, जिससे पता चला कि पुतिन के बॉडीगार्ड अक्सर सोची और सिम्फरोपोल की उड़ानों के साथ-साथ मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग के बीच तेज रफ्तार वाली 'सपसान' (Sapsan) ट्रेनों से यात्रा करते हैं.

पुतिन के पास तीन घर

सोची और उसके आस-पास पुतिन के तीन घर हैं. शहर के भीतर बोचारोव रुचेई; क्रास्नाया पोल्याना रिजॉर्ट के पास अचिप्स, जहां वह और उनका परिवार स्कीइंग के लिए जाते हैं. और सोची और गेलेनद्जिक के बीच केप इडोकोपास पर बना एक महल. आखिरी वाले में अभी भी रेनोवेशन चल रहा है. लेकिन निर्माण के पैमाने और खर्च को देखते हुए ऐसा लगता है कि इसे रूसी नेता के मुख्य घर के तौर पर बनाया जा रहा है.

सिम्फरोपोल एयरपोर्ट, ओलिवा गांव में मौजूद 'स्टेट डाचा नंबर 6' के सबसे पास का सिविलियन एयरपोर्ट है, जहां पुतिन का परिवार अक्सर अगस्त में रहता है. सपसान ट्रेन उगलोव्का और ओकुलोव्का स्टेशनों पर रुकती है, जहां SBP अधिकारी उतरते हैं.

पुतिन के बच्चों की मां अलीना काबेवा, उनके रिश्तेदार, पुतिन की बेटी मारिया वोरोन्त्सोवा और राष्ट्रपति के लंबे समय से सहयोगी रहे गेनाडी टिमोचेंको भी इन्हीं रास्तों का इस्तेमाल करते हैं. इसी तरह वे मॉस्को के उत्तर में वाल्दाई झील के किनारे बने राष्ट्रपति के घर पहुंचते हैं. यह एक बहुत बड़ी और आलीशान जगह है, जहाँ उनका परिवार साल का ज्यादातर वक्त बिताता है.
 

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About the Author

Rachit Kumar

Rachit Kumar

रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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