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ट्रंप-वेंस में दरार! मिडटर्म में हार से हिला रिपब्लिकन दरबार, क्या हेगसेथ पर फूटेगा हार का ठीकरा?

मिडटर्म चुनाव में हार के बाद रिपब्लिकन पार्टी ही नहीं, बल्कि माना जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप और जेडी वेंस के बीच भी दरार आ गई है. वेंस 2028 में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सपना पाले हुए हैं. ऐसे में अब आगे क्या होगा, यह देखने वाली बात होगी.

Written By Rachit Kumar
Published: Nov 05, 2026, 09:52 AM IST | Updated: Nov 05, 2026, 09:56 AM IST
Image Credit: ट्रंप-वेंस के बीच सब ठीक नहीं.
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मिडटर्म चुनावों में मिली करारी हार के बाद रिपब्लिकन पार्टी में हड़कंप मच गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी साफ-साफ कर दिया कि ईरान युद्ध और महंगाई ने चुनाव में उनकी पार्टी की लुटिया डुबो दी. इसी के साथ उन्होंने 2028 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान की शुरुआत भी कर दी.लेकिन माना जा रहा है कि इन चुनावी नतीजों के बाद से ट्रंप और वेंस के बीच दरार आ गई है.जिस वक्त रिपब्लिकन पार्टी हार का गम मना रही थी, उस वक्त डोनाल्ड ट्रंप के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी. वह चुनावी नतीजों के बाद व्हाइट हाउस के आधे बने बॉलरूम में छत पर आखिरी बीम को लगते हुए देख रहे थे.

शायद उनको आम अमेरिकियों की बढ़ती महंगाई और आर्थिक तकलीफ दिखाई नहीं दे रही है. इस दौरान ट्रंप ने कहा,'यह ड्रोन प्रूफ, मिसाइल प्रूफ और बुलेटप्रूफ है. इसकी छत, दीवारें और खिड़कियां इस तरह बनाई जा रही हैं कि किसी भी संभावित हमले का सामना कर सकें. अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, नए बॉलरूम में एक समय में 2,000 से 2,500 मेहमानों के लिए रात्रिभोज आयोजित किया जा सकेगा. यहां चीन और रूस समेत विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और दूसरे शीर्ष नेताओं की मेजबानी भी की जा सकेगी. उन्होंने इसे वॉशिंगटन का सबसे सुरक्षित जगह बताते हुए कहा, 'इसकी मजबूत छत इतनी मजबूत होगी कि उस पर हेलीकॉप्टर भी उतारे जा सकेंगे.'

ट्रंप को बॉलरूम के सजावट की फिक्र

जहां एक ओर ट्रंप बॉलरूम की  सजावट के बारे में सोच रहे थे, वहीं वेंस कहीं ज्यादा मुश्किल काम को लेकर परेशान थे. रिपब्लिकन पार्टी को हाउस और सीनेट में मिली हार के दलदल से कैसे बाहर निकाला जाए? अब उपराष्ट्रपति के सामने भी एक बड़ा काम है. एक नया चुनावी गठबंधन तैयार करना, जो उनके अपने राष्ट्रपति बनने के सपनों को भी बचा सके.

वेंस की सोशल मीडिया पोस्ट काफी बेबाक थी. इसमें उन्होंने अपने बॉस यान ट्रंप के कार्यकाल और उनके दूसरे कार्यकाल की रणनीति की कई बार तीखी आलोचना की. व्हाइट हाउस में मिली करारी हार के कुछ ही घंटों बाद, एक उपराष्ट्रपति का इस तरह का कदम उठाना वाकई चौंकाने वाला था. अगर देखा जाए तो वेंस ने लीडरशिप की भूमिका संभालने की कोशिश की है.

नई रणनीति की तलाश में वेंस

वेंस की यह पोस्ट एक तरह से रिपब्लिकन नेताओं के बीच खुद को सबसे आगे रखने की कोशिश के रूप में देखी जा सकती है, जो अब एक नई राह तलाश रहे हैं. इस लिहाज से, यह एक सोची-समझी राजनीतिक चाल थी. लेकिन क्या यह एक सही फैसला है? अभी दो हफ्ते भी नहीं हुए हैं, जब वेंस के गलत फैसले सबके सामने आए थे. उन्होंने एक बेहद भद्दे और अपमानजनक विज्ञापन का समर्थन किया था, जिसका उल्टा असर हुआ और ओहायो के गवर्नर पद के उम्मीदवार विवेक रामास्वामी को ही नुकसान उठाना पड़ा.

वेंस ने बहुत ही संयमित शब्दों में लिखा कि वे GOP (रिपब्लिकन पार्टी) के एक पोलस्टर की इस बात से सहमत हैं कि चुनाव के आखिरी दौर में हमारा आर्थिक संदेश उतना असरदार नहीं था. यह वह समय था जब ट्रंप एक 'गोल्डन पीरियड' की बात कर रहे थे, जबकि दूसरी तरफ पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रही थीं. उन्होंने ट्रंप के कार्यकाल के दो अहम मुद्दों यानी ईरान युद्ध और बिना दस्तावेजों वाले प्रवासियों को आक्रामक तरीके से बाहर निकालने की नीति  पर भी खुद को उनसे अलग दिखाने की कोशिश की.

उन्होंने लिखा,'हमारी हार का कारण युद्ध है.मैं इस विचार के पक्ष में हूं कि हमें अपनी प्रवर्तन नीति में बदलाव करना चाहिए .उदाहरण के लिए, उन कारोबारों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए जो अवैध रूप से लोगों को काम पर रखते हैं.' इस दूसरे मुद्दे पर वेंस ने खुद को राजनीतिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए एक तर्क गढ़ा. उन्होंने यह संकेत दिया कि इसका एकमात्र दूसरा विकल्प अवैध प्रवासियों को माफी देना होगा, जिसे लोगों को गुमराह करने वाले स्थापित राजनेता बढ़ावा दे रहे हैं.

वेंस ने बताया नाराज वोटर्स को मनाने का तरीका

उपराष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने एक पोलस्टर से पूछा था कि नाराज मतदाताओं को वापस कैसे लाया जा सकता है. इस पर उन्होंने एक लिस्ट दी. इसमें पहला है युद्ध खत्म करना. दूसरा महंगाई. तीसरा अमेरिका फर्स्ट की नीति और चौथा इजरायल के साथ हमारे संबंधों में बदलाव.

वेंस ने फॉक्स न्यूज की होस्ट रेचल कैंपोस-डफी के उस सुझाव का भी समर्थन किया, जिसमें उन्होंने ईरान युद्ध को कूटनीतिक तरीके से खत्म करने की बात कही थी. चूंकि ऐसी खबरें हैं कि ट्रंप नए हमले करने के बारे में सोच रहे हैं, इसलिए वेंस का यह रुख राष्ट्रपति के साथ उनके संभावित मतभेद का संकेत भी देता है.

जब वेंस ने रिपब्लिकन पार्टी की हार के कारण को लेकर युद्ध का हवाला दिया, तो उन्होंने सावधानी से यह भी जोड़ा कि राष्ट्रपति ने भी ऐसा कहा था. इस संघर्ष को लेकर उन्होंने सार्वजनिक रूप से ट्रंप से अलग रुख नहीं अपनाया है. साथ ही, वे उस बातचीत करने वाली टीम के मुखिया थे, जिसने गर्मियों में तेहरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए एक MOU तैयार किया था. लेकिन असल स्थिति सामने आते ही यह समझौता फेल हो गया.

क्या हेगसेथ बनेंगे बलि का बकरा?

अब करारी हार के बाद सोचा जा रहा है कि ठीकरा किस पर फोड़ा जाए. सीबीएस न्यूज ने मामले की जानकारी रखने वाले कई सूत्रों के हवाले से बताया है कि ट्रंप इस बात पर विचार कर रहे हैं कि पीट हेगसेथ को रक्षा मंत्री के पद पर बनाए रखा जाए या नहीं क्योंकि ईरान वॉर को लेकर रणनीति वही बना रहे थे. सूत्रों ने बताया कि ट्रंप ने अपने सलाहकारों के साथ और फोन पर हुई बातचीत में यह सवाल उठाया है. हालांकि, उन्होंने अभी तक यह तय नहीं किया है कि हेगसेथ को उनके पद से हटाया जाए या नहीं.

व्हाइट हाउस के कुछ सहयोगियों का मानना ​​है कि चुनाव के नतीजों को लेकर वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की भी जांच-पड़ताल हो सकती है. सीबीएस न्यूज के सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन उन लोगों में शामिल हैं, जिन्हें ईरान युद्ध में अपनी भूमिका के कारण आलोचना का सामना करना पड़ सकता है.

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About the Author

रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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