क्रिकेट की पिच पर लगे चौके-छक्के, फिर 10 हजार लोगों के सामने कैदी को मारे गए कोड़े... PAK में जिया-उल-हक के मार्शल लॉ का खौफनाक दौर
Pakistan General Zia Ul Haq Martial Law: पाकिस्तान में साल 1977 में तख्तापलट करने वाले पूर्व सैन्य तानाशाह जनरल जिया-उल-हक ने लोगों के मन में अपने लिए बड़ा खौफ पैदा कर दिया था. इसका एक वाकया पूर्व क्रिकेटर रमीज राजा ने सुनाया था कि कैसे लोगों के मन में डर बिठाने के लिए हजारों लोगों के बीच क्रिकेट स्टेडियम में एक व्यक्ति को कोड़े मारे गए.
General Zia Ul Haq Rule In Pakistan: पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास में साल 1977 एक महत्वपूर्ण मोड़ था. ये वही समय था, जब जनरल मोहम्मद जिया उल-हक ने बड़े नाटकीय तरीके से पाकिस्तानी सरकार का तख्तापलट किया और पूरे देश पर अपना कब्जा जमा लिया. पाकिस्तान की राजनीति में यह तख्तापलट सबसे बड़े उथल-पुथल के रूप में जाना जाता है.
जिया उल-हक ने 5 जुलाई 1977 की रात आर्मी का कंट्रोल अपने हाथ में लिया और देश में मार्शल लॉ लागू कर दिया. उन्होंने आर्मी चीफ रहते हुए चीफ मार्शल लॉ एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर सत्ता संभाली और 16 सितंबर, 1978 को पाकिस्तान के राष्ट्रपति बने. पाकिस्तान के पूर्व सैन्य तानाशाह जनरल जिया-उल-हक का शासनकाल साल 1977 से 1988 के बीच चला था. इस दौरान देश में सख्त इस्लामीकरण और हुदूद अध्यादेश यानी शरिया कानून लागू किया गया था. इस दौर में मामूली अपराध या सरकार के खिलाफ बयान देने के लिए सरेआम कोड़े मारने की सजा दी जाती थी. इसी से जुड़ा एक खौफनाक मामला लाहौर के क्रिकेट ग्राउंड गद्दाफी स्टेडियम का है.
रमीज राजा ने बताया किस्सा
पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर रमीज रजा ने बीते सालों एक पॉडकास्ट में जनरल जिया-उल-हक के कार्यकाल के समय की एक घटना सुनाई, जब उन्होंने पाकिस्तान में मार्शल लॉ लागू किया था और वह गुजरांवाला में फोर डे फर्स्ट क्लास क्रिकेट मैच खेल रहे थे.
उन्होंने बताया कि शुरुआत में स्टेडियम खाली था, लेकिन अचानक 10,000 लोग अंदर आ गए. उन्हें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि कुछ पुलिसकर्मी भी आ गए थे और एक अधिकारी ने उन्हें पिच से विकेट हटाने के लिए बुलाया. जब रमीज राजा ने पूछा कि ऐसा क्यों हो रहा है, तो उन्हें बताया गया कि किसी को सजा के तौर पर कोड़े मारे जाने वाले हैं.
कैदी ने हिलाया हाथ
रमीज रजा ने बताया,' उसके बाद एक कैदी को लाया गया और एक आदमी ने हारिस रऊफ की तरह दौड़कर उस कैदी पर हमला कर दिया. फिर कैदी ने भीड़ की ओर ऐसे हाथ हिलाया जैसे वह कोई हीरो हो. इसके तुरंत बाद सभी लोग स्टेडियम से बाहर चले गए और खेल फिर से शुरू हो गया.' रमीज ने इस घटना को अपने जीवन का एक ऐतिहासिक पल बताया.
बीच स्टेडियम में मारे कोड़े
लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में एक शानदार क्रिकेट मैच का आयोजन हुआ. पूरा स्टेडियम दर्शकों से खचाखच भरा हुआ था, जश्न का माहौल था कि तभी मैच खत्म होने के तुरंत बाद लाउडस्पीकर में एक घोषणा की गई.
दर्शकों से स्टेडियम में रुकने के लिए कहा गया, क्योंकि एक गुनहगार को सजा दी जानी थी. उसे तकरीबन 10,000 लोगों की मौजूदगी में ग्राउंड के बीचोंबीच लाया गया.
लकड़ी से बांधकर मारे कोड़े
गुनहगार को लकड़ी के एक ढांचे से बांधा गया और सबके बीच सामने से जल्लाद ने उसे कोड़े मारना शुरू कर दिया. जो दर्शक कुछ समय पहले तालियों की गूंज और जश्न में डूबे थे, वे अचानक इस खौफनाक मंजर को देखकर डर गए. स्टेडियम की तालियां पहले चीखती-चिल्लाती गूंज और फिर सन्नाटे में बदल चुकी थी.
आवाज उठाने वालों को मिली सजा
जनरल जिया उल-हक के शासनकाल में इस तरह की सार्वजनिक घटनाएं बेहद आम थीं. इसका मकसद जनता के दिल में खौफ पैदा करना था, ताकि कोई भी सरकार या सेना के खिलाफ आवाज उठाने की बिल्कुल हिम्मत न करें. पॉलिटिकल प्रिजनर से लेकर पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को डराने के लिए आमतौर पर खुलेआम सार्वजनिक जगहों पर ऐसी सजा दी जाती थीं.
जनरल जिया-उल-हक की मौत
पाकिस्तानी सेना के अधिकारी जनरल जिया-उल-हक बाद में पाकिस्तान के राष्ट्रपति भी बने. उन्हें तानाशाह भी कहा जाता है, जो हमेशा अपने गुस्सैल रवैये और सख्त फैसलों के लिए जाने जाते थे.
जिया-उल-हक की मौत 17 अगस्त साल 1988 में सतलुज नदी के पास बहावलपुर में एक विमान दुर्घटना के बाद हुई थी. इसमें उनके करीबी सहायक अख्तर अब्दुर रहमान और अमेरिकी डिप्लोमैट अर्नोल्ड लुईस राफेल समेत 27 लोगों की मौत हुई.