SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

पानी के अंदर ईरान करेगा US की 'नस' पर वार: क्या डेटा सेंटर पर प्रहार से दुनिया में इंटरनेट हो जाएगा लाचार?

ईरान ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि वह डेटा सेंटर्स, केबल्स पर हमला करेगा. अगर ऐसा हुआ तो मिडिल ईस्ट में अमेरिका से जुड़े कारोबारों पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा दुनिया के अन्य हिस्सों में भी इंटरनेट प्रभावित हो सकता है.

Written By Rachit Kumar
Published: Oct 14, 2026, 08:18 AM IST | Updated: Oct 14, 2026, 08:32 AM IST
Image Credit: ईरान ने फिर दे दी धमकी.
Join

अगर अमेरिका के साथ फिर से युद्ध छिड़ता है तो पूरे इलाके में केबल, डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फैसिलिटीज पर हमला हो सकता है. यह चेतावनी दी है ईरान के सिक्योरिटी हेड मोहसिन रेजाई ने.

उन्होंने धमकी ऐसे वक्त पर दी है, जब पिछले महीने ईरान के समर्थन वाले हूतियों ने लाल सागर के तट पर यमनी इलाके पर कब्जा कर लिया. इसके बाद यूरोप और एशिया को जोड़ने वाली इंटरनेट केबल की सिक्योरिटी को लेकर टेंशन बढ़ गई है. यमन की इंटरनेशनल लेवल पर मान्यता प्राप्त सरकार और हूतियों के बीच कई जगहों पर जबरदस्त लड़ाई चल रही है, जिसमें बाब अल-मंदेब भी शामिल है. यहां से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा इंटरनेट ट्रैफिक गुजरता है.

ईरान के खिलाफ अमेरिकी-इजरायली एक्शन के दौरान बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात में डेटा सेंटर और अमेरिकी बिजनेस हब्स पर हमले हुए थे. ईरान ने कहा था कि ये हमले ईरानी नागरिक ठिकानों पर अमेरिकी हमलों का जवाब थे.

जून में ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते के बाद से सक्रिय लड़ाई काफी हद तक खत्म हो गई है, लेकिन दुनिया के तेल का अहम रास्ता यानी होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर हमले जारी हैं. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर इस एरिया में इंटरनेट कितना सेफ है. चलिए आपको इसका जवाब देते हैं.

डेटा सेंटर और इंटरनेट केबल पर क्यों मंडरा रहा संकट?

रिसर्च फर्म टेलीजियोग्राफी के अनुमान के मुताबिक, यूरोप और एशिया के बीच 90 प्रतिशत से ज्यादा डेटा लाल सागर के नीचे से गुजरने वाली केबल के जरिए जाता है.

ये केबल बाब अल-मंदेब से समुद्र के अंदर जाती हैं. बाब अल-मंदेब सबसे संकरे प्वॉइंट पर करीब 26 किमी चौड़ा स्ट्रेट है और यूरोप को एशिया से जोड़ने वाले सबसे बिजी समुद्री रास्तों में से एक है.

केबल को लंगर या तोड़फोड़ से काटा जा सकता है और जंगी वाली जगह पर मरम्मत के लिए परमिट और सुरक्षा गारंटी की जरूरत होती है. डेटा सेंटर, जो बैंकिंग ऐप और क्लाउड सर्विसेज चलाते हैं, उनके बड़े और सेट टारगेट होते हैं.

किंग्स कॉलेज लंदन में सिक्योरिटी स्टडी के सीनियर लेक्चरर एंड्रियास क्रीग ने अल जजीरा से बातचीत में कहा, 'किसी पूरी सुविधा को बेकार करने के लिए हमले में सर्वर को तबाह करना जरूरी नहीं है.' उन्होंने कहा कि डेटा सेंटर बिना रुकावट बिजली, कूलिंग और टेलीकम्युनिकेशन पर निर्भर करते हैं, जबकि समुद्र के नीचे की केबल की लगातार सुरक्षा करना मुश्किल है और उनमें रुकावट से एक साथ कई देश प्रभावित हो सकते हैं.

क्या ईरान ने डेटा सेंटरों और केबलों पर हमला करने की धमकी दी है?

फरवरी में जब से अमेरिका से उनकी जंग शुरू हुई है. ईरान ने कई बार डेटा सेंटर्स पर हमला करने की चेतावनी दी है. 11 मार्च को तस्नीम न्यूज एजेंसी ने कहा कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ईरान के नए टारगेट्स की एक लिस्ट जारी की है, जिसमें इजरायल और कुछ खाड़ी देशों में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और ओरेकल का क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है.

उसी महीने, IRGC ने टेलीग्राम पोस्ट में कहा कि उसने Google, Meta और Apple समेत 17 अमेरिकी कंपनियों के अलावा अमीराती AI कंपनी G42 का नाम टारगेट लिस्ट में रखा है.

क्रीग ने कहा कि वह रेजाई की धमकी को गंभीरता से लेंगे. लेकिन उन्होंने ईरान की बड़ी रुकावट पैदा करने की ताकत और खाड़ी के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह करने की काबिलियत के बीच अंतर बताया.

उन्होंने कहा, 'रेजाई की चेतावनी खास तौर पर इसलिए अहम है क्योंकि वह किसी खास टारगेट की धमकी नहीं दे रहे हैं. वह सामरिक रूप से इन्फ्रास्ट्रक्चर की एक ऐसी कैटेगरी ढूंढ रहे हैं, जो खाड़ी के इकोनॉमिक डाइवर्सिफिकेशन को सीधे अमेरिकी तकनीकी ताकत से जोड़ती है.'

उन्होंने इस चेतावनी को मूल रूप से प्रतिरोध बताया, जिसका मकसद अमेरिका के साथ-साथ अबू धाबी, रियाद और दोहा को भी संदेश देना था, ताकि खाड़ी देशों की सरकारों को अमेरिका के किसी और हमले को रोकने के लिए मजबूर किया जा सके.

क्या पहले भी हुए हैं इंटरनेट केबल्स पर हमले?

इसका जवाब है हां. मार्च में अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) ने बताया था कि UAE में उसकी दो फैलिसिटीज पर ड्रोन अटैक हुआ, जबकि बहरीन में एक फैसिलिटी के पास हुए हमले से इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा. अबू धाबी कमर्शियल बैंक ने कहा कि पूरे इलाके में IT में आई खराबी के कारण उसका ऐप काम नहीं कर रहा था, हालांकि उसने इसे सीधे AWS से नहीं जोड़ा.

सितंबर में AWS ने कहा कि वह बहरीन में कई साइट्स और UAE में एक साइट को ठीक नहीं कर सका. Data Center Dynamics की रिपोर्ट के अनुसार, इंडस्ट्री की आम राय है कि फरवरी 2024 में समुद्र के नीचे तीन केबल्स क्षतिग्रस्त हो गए थे. ऐसा शायद 'रूबीमार' कार्गो जहाज के लंगर के घिसटने से हुआ, जो हूती मिसाइल हमले के कारण खराब हो गया था. इनकी मरम्मत में महीनों का समय लगा. सितंबर 2025 में, जेद्दा के पास दो केबल्स कट गए, जिससे मिडिल ईस्ट और दक्षिण एशिया में इंटरनेट की स्पीड स्लो हो गई.

क्रीग ने कहा कि मार्च के हमलों ने कारोबारी इंफ्रास्ट्रक्चर को ऐसी चीज मानने की सीमाओं को सामने ला दिया, जिसे नेशनल एयर डिफेंस से खुद ही सिक्योरिटी मिलती है. उन्होंने कहा, 'खाड़ी देशों की सेनाएं आने वाले ज्यादातर खतरों को रोक सकती हैं, लेकिन सफल हमलों की थोड़ी सी संख्या भी बहुत बड़े आर्थिक नतीजे पैदा कर सकती हैं. उन्होंने आगे कहा कि सस्ते ड्रोन अरबों डॉलर के डिवाइस फैसिलिटी के लिए खतरा बन सकते हैं.

क्या रेड सी का कोई विकल्प है?

जी हां. कुछ विकल्प तो हैं लेकिन वे ज्यादा महंगे हैं और अभी भी बन रहे हैं. कम्युनिकेशन मिनिस्ट्री ने एक बयान में कहा कि 10 सितंबर को इराक ने खाड़ी से यूरोप तक अपने इलाके से डेटा ले जाने के लिए कतर की कंपनी Ooredoo के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था. 

मंत्री मुस्तफा जब्बार सनद ने इराकी न्यूज एजेंसी को बताया कि अंडरग्राउंड केबल अल-फॉ से तुर्की की सीमा के पास राबिया तक जाती है. 7 अक्टूबर को, Ooredoo की इंटरनेशनल यूनिट ने सरकार की मंजूरी मिलने पर, तुर्की की ओर रूट बढ़ाने के लिए इराक की iQ नेटवर्क्स से फाइबर खरीदने पर मंजूरी दी.

माइक्रोसॉफ्ट ने सितंबर में एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि वह 2030 तक मिडिल ईस्ट में सबसी (समुद्र के नीचे) और जमीनी कनेक्टिविटी में 400 मिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश करेगा.

टेक्नोलॉजी न्यूज साइट 'रेस्ट ऑफ वर्ल्ड' ने 7 अक्टूबर को एक अज्ञात सूत्र के हवाले से रिपोर्ट दी कि गूगल और मेटा ने इराक के जरिए कुछ ट्रैफिक भेजना शुरू कर दिया है.  क्रीग ने कहा कि असली मजबूती के लिए भौगोलिक रिडंडेंसी की जरूरत होगी, जिसमें शायद खाड़ी के बाहर की सुविधाएं भी शामिल हों.

उन्होंने कहा, "इससे डिजिटल संप्रभुता और ऑपरेशनल सुरक्षा के बीच तनाव पैदा होता है क्योंकि खाड़ी देशों की सरकारों ने संवेदनशील डेटा और कंप्यूटिंग को अपनी सीमाओं के भीतर रखने में भारी निवेश किया है.

क्या खाड़ी देशों के टेक हब बनने के इरादों पर पड़ेगा असर?

निवेश जारी है, लेकिन जंग का इस सेक्टर पर पहले ही असर पड़ा है. खाड़ी देशों ने तेल के बाद की अपनी अर्थव्यवस्थाओं को टेक्नोलॉजी पर आधारित बनाया है. अबू धाबी में, अमीराती कंपनी G42, OpenAI, Nvidia और अन्य कंपनियों के साथ मिलकर 'स्टारगेट UAE' बना रही है. यह 5-गीगावाट वाले UAE-US AI कैंपस का हिस्सा है.

सऊदी प्रेस एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड ने मई 2025 में 'Humain' नाम की एक AI कंपनी शुरू की, जिसके चेयरमैन क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान हैं. यह कंपनी डेटा सेंटर और अरबी भाषा का AI मॉडल बनाएगी. सितंबर 2025 में, कतर के सॉवरेन वेल्थ फंड ने US इन्वेस्टर 'ब्लू आउल' के साथ मिलकर 3 अरब डॉलर के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट में हिस्सा लिया.

सितंबर में, माइक्रोसॉफ्ट ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि वह 2030 तक कुवैत, कतर, सऊदी अरब और UAE में 10 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश करेगा और उसका नया फोकस 'डिजिटल रेजिलिएंस' (डिजिटल मजबूती) पर होगा. 

लेकिन AWS ने कहा कि बहरीन में होस्ट किए गए कुछ डेटा को वापस पाने के लिए उसने हर मुमकिन कोशिश कर ली थी. क्रीग ने कहा कि इन खतरों से खाड़ी देशों के इरादों में कोई बुनियादी बदलाव नहीं आएगा, लेकिन इससे AI निवेश के अर्थशास्त्र और भूगोल में बदलाव जरूर आएगा.
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES