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Hyderabad Nizam Necklace To Queen Elizabeth: हैदराबाद के आखिरी निजाम मीर उस्मान अली खान वैसे तो अरबपति होने के बावजूद बेहद कंजूस माने जाते थे, लेकिन उन्होंने साल 1947 में रानी एलिजाबेथ द्वितीय को 300 हीरों से जड़ा बेशकीमती हार दिया था. ये नेकलेस उन्होंने रानी को उनके शादी के तोहफे के रूप में दिया था. यह नायाब नेकलेस ब्रिटिश रॉयल फैमिली के सबसे महंगे और खास आभूषणों में शामिल है. वर्तमान में इसकी कीमत 88 मिलियन डॉलर यानी करीब 831.52 करोड़ रुपये के बराबर है.
बता दें कि रानी एलिजाबेथ द्वितीय ब्रिटिश इतिहास में 70 साल यानी सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली रानी थीं. उनका जन्म 21 अप्रैल 1926 को हुआ था. 70 साल तक राज करने के बाद 8 सितंबर 2022 को 96 की उम्र में उनका निधन हो गया. ऐसे में उनके जीवन से जुड़ा ये बड़ा किस्सा जानते हैं.
रानी एलिजाबेथ द्वितीय के गहनों का कलेक्शन काफी चर्चा में रता था, जिनमें पिछली पीढ़ियों से मिले कीमती रत्न, हीरे, कोलंबियाई पन्ने, बर्मा के रूबी और प्लेटिनम से बने चमकदान टियारा भी शामिल हैं.
हैदराबाद के निजाम उस्मान अली खान से मिला बेशकीमती हार भी रानी एलिजाबेथ द्वितीय के गहनों में शामिल खास कलेक्शन में से एक है.
हैदराबाद के निजाम ने खुद लंदन के प्रसिद्ध ज्वैलर कार्टियर को आदेश दिया था कि एलिजाबेथ अपनी पसंद से खुद के लिए कोई भी तोहफा चुन लें. वहीं, राजकुमारी ने भी अपने लिए इस खूबसूरत डायमंड नेकलेस और एक मैचिंग टियारा को चुना था.

निजाम की ओर से दिया गया यह हार प्लैटिनम से बना है. इसमें तकरीबन 300 चमचमाते डायमंड जुड़े हैं. हार का डिजाइन अंग्रेजी गुलाब के फूलों की तरह है.
बता दें कि महारानी एलिजाबेथ के निजाम की ओर से दिया गया यह नेकलेस इतना पसंद था कि उन्होंने अपने पूरे जीवनकाल में इसे महत्वपूर्ण सरकारी समेत आधिकारिक कार्यक्रमों में पहना. उनके शुरुआती पोटरेट्स में भी आप एलिजाबेथ को ये हार पहने हुए देख सकते हैं.
अपने जीवनकाल में एलिजाबेथ ने इस खूबसूरत नेकलेस को अपनी पोती-बहू और वेल्स की राजकुमारी केट मिडलटन को भी पहनने के लिए दिया था. उन्हें कई खास मौकों पर इस हार को पहने हुए देखा जा चुका है.
आमतौर पर माना जाता है कि यह नेकलेस खास तौर पर एलिजाबेथ के लिए बनाया गया था. हालांकि, ऐसा नहीं है. बताया जाता है कि कार्टियर ने इसे साल 1935 में ही बना दिया था और 1936 में इसे किसी अज्ञात खरीदार को बेच दिया गया था. हालांकि, इसके एक साल बाद ही कार्टियर ने इसे वापस ले लिया.

1930 के दशक में वारविक की काउंटेस एलफ्रिडा ग्रेविले ने इसे अपने पोट्रेट के लिए कार्टियर से इसे उधार मांगा था. इसके बाद साल 1947 में राजकुमारी एलिजाबेथ ने इसे अपने तोहफे के तौर पर चुना.
कार्टियर ने जब इस नेकलेस को साल 1935 में बनाया , तब इसके पेंडेंट में 5 हीरे लटके हुए थे, लेकिन 1937 में इसे वापस खरीदने पर इसके ओरिजिनल रूप में बदलाव किया गया और इसमें लटकते 4 हीरों को हटा दिया गया. आज इसमें केवल एक डबल-ड्रॉप पेंडेंट ही है, जिसमें 13 इमेरेल्ड कटे लगें और एक पीयर शेप का लटकता हुआ डायमंड शामिल है.

महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को यह नेकलेस इतना ज्यादा पसंद था कि साल 1952 में गद्दी पर बैठने के बाद उन्होंने अपनी पहली फोटो में इसे ही पहना था. उनकी ये फोटोज साल 1971 तक ब्रिटिश डाक टिकटों पर पर इस्तेमाल की गईं. इससे यह नेकलेस महारानी के साथ ही दुनियाभर में जाना पहचाना नाम बन गया.
महारानी एलिजाबेथ के देहांत के बाद अब यह हार ब्रिटेन की रॉयल फैमिली की एक अमूल्य विरासत बन चुका है.
2014 में इसे महारानी की पोती-बहू और वेल्स की राजकुमारी केट मिडिलटन ने नेशनल पोर्ट्रेट गैलरी के एक बड़े कार्यक्रम में पहना था.

इसके अलावा केट साल 2019 में बकिंघम पैलेस में हुए डिप्लोमैटिक रिसेप्शन के दौरान भी इस चमचमाते ऐतिहासिक नेकलेस को पहने नजर आईं थीं.