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मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में नानपा-कुल्हड़ा सड़क की बदहाली को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है. शुक्रवार को आंदोलन के तीसरे दिन उन्होंने ऐसा प्रदर्शन किया जिसने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी. युवा, महिलाएं और अन्य ग्रामीण लगभग 40 किलोमीटर पैदल चलकर नर्मदापुरम कलेक्ट्रेट पहुंचे और सड़क बनाने की मांग को लेकर मुख्य गेट पर ही डेरा डाल दिया. ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक कलेक्टर खुद उनका ज्ञापन स्वीकार नहीं कर लेते और सड़क निर्माण के बारे में लिखित आश्वासन नहीं देते. स्थिति तब और गंभीर हो गई जब ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट गेट के ठीक सामने लकड़ी और गोबर के उपलों का इस्तेमाल करके दाल-बाटी बनाना शुरू कर दिया. "नो रोड, नो वोट" (सड़क नहीं तो वोट नहीं) लिखे पोस्टर लिए ग्रामीणों ने जोर-शोर से नारे भी लगाए.
वर्षों से गड्ढों और कीचड़ का दंश झेल रहे ग्रामीण
यह घटना नानपा-कुल्हड़ा रोड की है, जहां सड़क की खराब हालत साफ दिखाई देती है. कई जगहों पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं और बारिश के बाद उनमें पानी भर जाता है. सड़क पर कीचड़ जमा होने के कारण ग्रामीणों को आने-जाने में बहुत परेशानी हो रही है. ग्रामीणों का कहना है कि लगभग चार किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण की मांग कई सालों से की जा रही है, लेकिन बार-बार शिकायत और मांग करने के बावजूद, अब तक इस समस्या का समाधान नहीं हुआ है. इस खराब सड़क का सबसे बुरा असर दोपहिया वाहन चालकों, स्कूली बच्चों, किसानों और महिलाओं पर पड़ रहा है.

स्कूली बच्चों और हादसों की चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर गड्ढों और कीचड़ की वजह से हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है, और बारिश के मौसम में यह स्थिति और भी खराब हो जाती है.इसी समस्या को लेकर ग्रामीणों ने तीन दिवसीय आंदोलन शुरू किया था. पहले दिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुआ, जबकि दूसरे दिन ग्रामीणों ने अपना विरोध जताने के लिए पानी से भरे गड्ढों और कीचड़ के बीच प्रदर्शन किया. तीसरे दिन उन्होंने नर्मदापुरम कलेक्ट्रेट तक लगभग 40 किलोमीटर का मार्च निकाला और मुख्य गेट पर प्रदर्शन शुरू कर दिया.
लिखित आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
ग्रामीणों की मांग है कि सड़क निर्माण का लंबे समय से रुका हुआ काम तुरंत शुरू किया जाए. उनका कहना है कि अब सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा. वे सड़क निर्माण के बारे में लिखित गारंटी मिलने के बाद ही अपना विरोध प्रदर्शन खत्म करेंगे.