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MP के इस गांव में दशहरे पर मनाया जाता है मातम, नहीं जलता रावण: नाभि में तेल चढ़ाकर की जाती है पूजा

विदिशा जिले के रावण गांव में रावण दहन नहीं होता, बल्कि उन्हें 'रावण बाबा' मानकर पूजा की जाती है. यहां के स्थानीय निवासी और ब्राह्मण परिवार खुद को रावण का वंशज मानते हैं. चलिए जानते हैं अनोखी परंपरा के बारे में...

Written By Ranjana Kahar
Published: Oct 19, 2026, 08:05 AM IST | Updated: Oct 19, 2026, 08:09 AM IST
Image Credit: MP के इस गांव में दशहरे पर मनाया जाता है मातम!
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जहां पूरा देश विजयादशमी के दिन रावण के पुतले जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाता है, वहीं मध्य प्रदेश के विदिशा जिले की नटेरन तहसील में स्थित 'रावण गांव' की कहानी बिल्कुल अलग है. यहां के निवासियों के लिए रावण बुराई का प्रतीक नहीं, बल्कि उनके इष्ट देवता और परिवार के सदस्य है, जिन्हें वे प्यार से 'रावण बाबा' कहते हैं.

रावण दहन की जगह छाया रहता है मातम

विदिशा की नटेरन तहसील में स्थित यह गांव रावण गांव के नाम से जाना जाता है. यह नाम केवल नक्शे पर ही नहीं, बल्कि यहां के हर निवासी के दिल में गहराई से बसा हुआ है. दशहरे के दिन इस गांव में न तो पटाखे फोड़े जाते हैं और न ही रावण दहन किया जाता है.  इसके बजाय रावण के वध के प्रति एक खामोश मातम का माहौल रहता है.  मानो रावण की मृत्यु पर कोई शोक मनाया जा रहा हो.

12 फीट लंबी लेटी हुई प्रतिमा

गांव के बीचों-बीच परमार काल का एक प्राचीन मंदिर है. इसके अंदर रावण की 12 फुट लंबी एक विशाल प्रतिमा लेटी हुई अवस्था में मौजूद है. मंदिर की दीवारों पर लिखी 'आरती' आज भी हर सुबह और शाम उसी श्रद्धा के साथ गाई जाती है, जैसे पीढ़ियों पहले गाई जाती थी.  कहा जाता है कि यह परमार काल की 500 साल पुरानी लेटी हुई प्रतिमा है. ग्रामीण रावण को अपना आराध्य देव मानते हैं और उनके सम्मान में पूजा-अर्चना व आरती करते हैं.

नाभि में तेल चढ़ाकर की जाती है पूजा

इस गांव में रावण बाबा के आशीर्वाद के बिना कोई भी शुभ कार्य शुरू नहीं होता. यहां कई ब्राह्मण परिवार खुद को रावण का वंशज मानते हैं. गांव में कोई भी नया काम या शादी-ब्याह रावण बाबा की अनुमति के बिना शुरू नहीं होता. शादी का पहला निमंत्रण हमेशा उन्हीं को समर्पित किया जाता है. पूजा की शुरुआत उनकी मूर्ति की नाभि पर तेल लगाकर की जाती है. घरों, वाहनों और दुकानों पर 'जय लंकेश' लिखा हुआ साफ देखा जा सकता है. यहां तक कि, स्थानीय लोगों के शरीर पर भी यह टैटू के रूप में बना हुआ मिलता है.

'रावण लोक' बनाने की मांग

इसके अलावा, मंदिर के पास एक तालाब के बीचों-बीच पत्थर की एक तलवार धंसी हुई है. ग्रामीणों का मानना ​​है कि यह रावण की पौराणिक 'चंद्रहास' तलवार है. पीढ़ियों से यहां के लोग रावण को ज्ञान और वीरता के देवता के रूप में मानते आ रहे हैं. वे पूरी श्रद्धा के साथ अपने वाहनों और दुकानों पर 'जय लंकेश' या 'जय रावण बाबा' जैसे वाक्यांश भी लिखते हैं.  साथ ही, इस अनोखी जगह को 'रावण लोक' के रूप में विकसित करके एक पर्यटन स्थल बनाने की मांग भी उठती रही है.

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(डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और इंटरनेट पर उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित है. Zee News इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
 

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रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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