सरकारी स्कूल की अनोखी पहल: दिवाली पर गरीब बच्चों को बांटे नए कपड़े, पटाखे और मिठाइयां; चेहरे पर खिली मुस्कान
दमोह के एक सरकारी स्कूल में कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जहां स्कूल प्रिंसिपल की पहल पर न सिर्फ स्कूल स्टाफ, बल्कि शहर के लोगों ने भी गरीब बच्चों को दिवाली की खुशिया बांटी.
महंगाई के इस दौर में त्योहारों की चमक हर किसी के जीवन में वैसी नहीं होती, जैसी होनी चाहिए, लेकिन मध्य प्रदेश के दमोह जिले के एक सरकारी स्कूल ने इस सोच को बदलते हुए एक बेहद अनूठी और प्रेरणादायक पहल की है. जिले के हिरदेपुर स्थित शासकीय स्कूल में दीपावली के पावन पर्व पर एक ऐसा नवाचार देखने को मिला, जिसने सैकड़ों गरीब बच्चों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी. इस स्कूल में पढ़ने वाले लगभग 95 फीसदी बच्चे बेहद गरीब तबके से आते हैं, जिनके परिवारों के लिए दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर नए कपड़े, मिठाइयां या पटाखे खरीदना आर्थिक रूप से मुमकिन नहीं हो पाता था.
दमोह के हिरदेपुर में स्थित सरकारी स्कूल में बच्चों की इस कमी को महसूस करते हुए स्कूल के प्रिंसिपल और अन्य टीचर्स ने खुद आगे बढ़कर एक सराहनीय पहल की. इस नेक काम में शहर के अन्य संभ्रांत और मददगार लोग भी जुड़ गए. देखते ही देखते जनसहयोग से स्कूल के तमाम बच्चों के लिए नए कपड़े, मिठाइयां, खिलौने, पटाखे और आकर्षक उपहार जुटाए गए. जब ये सभी सामग्रियां बच्चों को सौंपी गईं, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा.
हद भावुक कर देने वाला था पल
इस पूरी पहल ने न केवल बच्चों को त्योहार की वास्तविक खुशियां दीं, बल्कि वहां मौजूद शिक्षकों के लिए भी यह पल बेहद भावुक कर देने वाला था. शिक्षकों का कहना था कि वे इन बच्चों को सिर्फ पढ़ाते ही नहीं, बल्कि अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं. इस छोटी सी कोशिश से गरीब बच्चे भी बाकी बच्चों की तरह धूमधाम से दीपावली मनाने में सक्षम हो सके. दमोह के इस सरकारी स्कूल की यह मानवीय और संवेदनशील पहल अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों के लिए एक मिसाल बन गई है.
स्कूल प्रबंधन की इस पहल ने सैकड़ों बच्चों को त्यौहार की खुशियां दी, तो ये दृश्य देखकर खुद टीचिंग स्टाफ भावुक हो गया. उन्हें सुकून मिला कि जिन बच्चों को वो शिक्षा दीक्षा दे रहे है, जिन्हें परिवार की तरह मान रहे है, उन बच्चों को पारिवारिक आर्थिक कमजोरी का एहसास नहीं होगा.