न सोना, न चांदी... 40 लाख के नोटों से सजा मां गजलक्ष्मी का दरबार, जानिए खास मान्यता
उज्जैन के प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर में धनतेरस से पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत हुई. मां गजलक्ष्मी का दरबार करीब 40 लाख रुपये के नोटों से सजाया गया है. पांच दिनों तक विशेष पूजा, अभिषेक, 56 भोग, अन्नकूट और महिलाओं को सौभाग्यवती सिंदूर वितरित किया जाएगा.
दीपावली के पांच दिवसीय पर्व की शुरुआत धनतेरस के साथ हो गई है. उज्जैन में भी दीपोत्सव की रौनक दिखाई देने लगी है. बाजारों के साथ ही मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. शहर के प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर में धनतेरस से ही दीपोत्सव की विशेष शुरुआत हुई. यहां मां गजलक्ष्मी का दरबार करीब 40 लाख रुपये के नोटों से सजाया गया है. माता के इस भव्य श्रृंगार को देखने और दर्शन करने के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं.
मंदिर के पुजारी पंडित अवधेश शर्मा का कहना है कि धनतेरस की सुबह मां गजलक्ष्मी का 501 लीटर दूध से अभिषेक किया गया. इसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत हुई. इन पांच दिनों तक मंदिर में विशेष पूजन, पंचामृत अभिषेक और सुगंधित फूलों से माता का अर्चन किया जाएगा. श्रीसूक्त और कनकधारा स्तोत्र का पाठ भी होगा.
राजा विक्रमादित्य से जुड़ी है मंदिर की मान्यता
मंदिर की मान्यता को लेकर पुजारी अवधेश शर्मा बताते हैं कि स्कंद पुराण के अवंती खंड में मां गजलक्ष्मी का उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि राजा विक्रमादित्य ने अपने राज्य में सुख-समृद्धि और स्थिर लक्ष्मी के वास के लिए यहां मां गजलक्ष्मी की स्थापना कर पूजा-अर्चना की थी. तभी से यहां माता की विशेष पूजा की परंपरा चली आ रही है. श्रद्धालु मानते हैं कि मां गजलक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और स्थिर लक्ष्मी का वास होता है.
40 लाख के नोटों से सजा माता का दरबार
इस बार मंदिर के गर्भगृह को करीब 40 लाख रुपये के नोटों से सजाया गया है. इस सजावट में उज्जैन के व्यापारियों और श्रद्धालुओं का सहयोग लिया गया है. मंदिर के पुजारी के मुताबिक, पांच दिनों तक नोटों से सजा माता का दरबार भक्तों के दर्शन के लिए रहेगा. इसके बाद सहयोग के रूप में मिली यह राशि संबंधित लोगों को प्रसाद स्वरूप वापस लौटा दी जाएगी.
भक्तों को दिया जा रहा पीले चावल और कौड़ियों का प्रसाद
मंदिर में आने वाले श्रद्धालु मां गजलक्ष्मी को पीले चावल अर्पित कर अपने घर आने का निमंत्रण देते हैं. पूजा के बाद भक्तों को माता को अर्पित किए गए पीले चावल और कौड़ियां प्रसाद के रूप में दी जाती हैं. श्रद्धालु इन्हें अपने घर ले जाते हैं और मान्यता के अनुसार, इन्हें घर में रखने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है.
मंदिर में पांच दिवसीय दीपोत्सव के दौरान हर दिन अलग-अलग धार्मिक आयोजन होंगे. धनतेरस के बाद रूप चौदस पर मां गजलक्ष्मी को तिल्ली और विभिन्न औषधीय द्रव्यों से स्नान कराया जाएगा. इसके बाद माता का विशेष श्रृंगार होगा. दिवाली के दिन 5100 लीटर दूध से अभिषेक किया जाएगा. इसके बाद महाआरती होगी और दोपहर में माता का विशेष श्रृंगार कर 56 भोग लगाया जाएगा. शाम को अन्नकूट का भोग अर्पित किया जाएगा और रात 2 बजे विशेष आरती होगी.
माता को अर्पित अन्नकूट का प्रसाद भी श्रद्धालुओं में बांटा जाएगा
इसके बाद एक दिन के अंतराल के बाद 10 तारीख को सुबह 4 बजे से रात 12 बजे तक महिलाओं को सौभाग्यवती सिंदूर का वितरण किया जाएगा. इसी दिन माता को अर्पित अन्नकूट का प्रसाद भी श्रद्धालुओं में बांटा जाएगा. मंदिर प्रबंधन के अनुसार, सिंदूर वितरण के दिन सबसे ज्यादा महिलाओं की भीड़ उमड़ती है. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है.
पुराने शहर के नई पेठ इलाके में स्थित इस प्राचीन मंदिर में धनतेरस की सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है. कोई परिवार की खुशहाली तो कोई व्यापार में तरक्की और आर्थिक समृद्धि की कामना लेकर माता के दरबार में पहुंच रहा है. पांच दिनों तक चलने वाले इस दीपोत्सव में मंदिर में विशेष पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजन जारी रहेंगे.
(रिपोर्टः अनिमेष सिंह, उज्जैन)