विकास भी, आस्था भी: जब भोपाल, वाराणसी, दिल्ली और आजमगढ़ ने दिखाई राह, क्या उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर का भी निकलेगा ऐसा रास्ता?
उज्जैन में सती गेट के पास मौजूद खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा अपनी जगह से टस से मस नहीं हो रही है. सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रशासन प्रतिमा हटाने की पूरी कोशिश कर रहा है. लेकिन इसी बीच श्रद्धालु इसे न हटाने की अपील कर रहे हैं. वहीं पूर्व सीएम ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है. उन्होंने भोपाल का उदाहरण देते हुए मंदिर को यथा स्थान बनाए रखने का एक सुझाव दिया है. आइए आपको देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे उदाहरणों के बारे में बताते हैं.
महाकाल की नगरी उज्जैन में इन दिनों खड़े हनुमान जी की प्रतिमा की खूब चर्चा हो रही है. इसकी वजह भी खास है. क्योंकि, उज्जैन में सती गेट के पास सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रशासन पिछले 6 दिन से प्रतिमा को हटाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन मूर्ति अपनी जगह से टस से मस नहीं हो रही है. अब यह मामला सिर्फ प्रशासन तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी चर्चा सोशल मीडिया पर जमकर हो रही है. हर कोई सोशल मीडिया पर इस मूर्ति को वायरल कर रहा है.
दरअसल, 2028 में होने वाले सिंहस्थ को लेकर सती गेट के पास सड़क चौड़ीकरण की तैयारी चल रही है. इसी के चलते 4 सितंबर से खड़े हनुमान मंदिर के पास कार्रवाई शुरू की गई थी. करीब एक हफ्ते में मंदिर के आसपास का ज्यादातर हिस्सा तोड़ दिया गया है. लेकिन प्रतिमा को फिलहाल टेंट में रखा गया है. हालांकि, प्रशासन अब कह रहा है कि प्रतिमा को हटाने की कोशिश की ही नहीं गई. वहीं दूसरी तरफ खड़े हनुमान जी की प्रतिमा के वीडियो और रील्स सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. इस प्रतिमा के दर्शन करने के लिए मध्य प्रदेश के अलावा, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से भी श्रद्धालु उज्जैन पहुंच रहे हैं.
पूर्व सीएम का सीएम को पत्र
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मामले में सीएम मोहन यादव को एक पत्र लिखा है. उसमें उमा भारती ने पत्र के जरिए मंदिर के संरक्षण की मांग उठाते हुए विकास कार्यों के साथ धार्मिक आस्था का संतुलन बनाए रखने की अपील की है. उन्होंने पत्र के जरिए कहा कि सीएम मोहन यादव खुद ही उज्जैन के रहने वाले हैं. ऐसे में उज्जयिनी शहर और वहां मौजूद धार्मिक स्थलों की गरिमा को उनसे बैहतर कोई नहीं समझ सकता है. उन्होंने खड़े हनुमान मंदिर को लेकर ऐसा समाधान निकालने की अपील की है, जिससे विकास कार्य भी प्रभावित न हों और मंदिर की आस्था भी सुरक्षित रहे.
उमा भारती ने दिया उदाहरण
उमा भारती ने अपने पत्र में भोपाल का उदाहरण बताते हुए कहा कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान एक मस्जिद को हटाए बिना योजना में बदलाव कर समाधान निकाला गया था. उन्होंने सुझाव दिया कि इसी तरह से उज्जैन में भी खड़े हनुमान मंदिर का भी तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर ऐसा विकल्प ढूंढा जाए, जिससे मंदिर को नुकसान पहुंचाए बिना सड़क चौड़ीकरण का काम पूरा हो सके. ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां पर धार्मिक स्थानों को हटाए बिना रास्ता निकाला गया है.
कहां-कहां पर निकाला रास्ता
1. आजमगढ़ की मिसाल: यूपी के आजमगढ़ जिले में भी ऐसा ही मामला सामने आया था. जहां पर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का निर्माण होना था, लेकिन एक्सप्रेस-वे के बीचों बीच श्रीराधा-कृष्ण शिव मंदिर आ रहा था. सिक्स लेन सड़क बनाते समय मंदिर को तोड़ने के बजाय एक्सप्रेस-वे का रास्ता दो हिस्सों में बांट दिया गया. इससे सड़क भी बन गई और मंदिर भी हटाने से बच गया. ऐसा ही एक वाराणसी में भी देखने को मिला था.
2. वाराणसी का मॉडलः जब वाराणसी में कैंट-चौकाघाट फ्लाईओवर का निर्माण किया जा रहा था. इस दौरान फ्लाईओवर के बीच में कई पुराने मंदिर आ रहे थे. लेकिन इन मंदिरों को हटाने के बजाय फ्लाईओवर के नीचे से मंदिरों को सुरक्षित जगह दी गई. बताया जाता है कि यहां पर दशकों पुराने मंदिर आज भी मौजूद हैं. इन मंदिरों में श्रद्धालु पूजा अर्चना भी करने के लिए आते हैं. अगर उज्जैन में यही मॉडल अपनाया जाए, तो खड़े हनुमान जी का मंदिर सुरक्षित बचाया जा सकता है. इससे सड़क चौड़ीकरण का काम नहीं बल्कि लोगों की आस्था भी बनी रहेगी.
3. तीसरा उदाहरण दिल्ली काः दिल्ली में कई ऐसे उदाहरण हैं, जहां पर धार्मिक स्थलों को हटाए बिना सड़कों, हाईवों, फ्लाईओवर के निर्माण किए गए हैं. इनमें दिल्ली की रिंग रोड और मथुरा रोड के विस्तार के दौरान कई पुराने धार्मिक, हेरिटेज स्थलों को बचाने के लिए फ्लाईओवर को रीडिजाइन किया गया. इसमें पिलर्स के बीच थोड़ी ज्यादा जगह छोड़कर सड़क को इन धार्मिक स्थलों के ऊपर से निकाला गया.
4. चौथा गुजरात का उदाहरणः गुजरात में भी हाईवे और एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान सड़क के बीच आने वाले पुराने पेड़, धार्मिक स्थानों को सुरक्षित रखा गया है. बता दें कि एक्सप्रेस-वे निर्माण के दौरान हनुमान और शिव मंदिरों को बचाने के लिए सड़क का रूट ही डायवर्ट कर दिया गया. लेन को थोड़ा मोड़कर मंदिर और पेड़ों को सुरक्षित रखा गया. इससे साफ है कि सड़क की डिजाइन में मामूली बदलाव भी आस्था से जुड़े स्थलों को बचाने का रास्ता बन सकता है.
उज्जैन में अपनाए ये ट्रिक
ऐसा ही दक्षिण भारत में भी देखने को मिला है. तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कुछ जगहों पर सड़क चौड़ीकरण के दौरान बीच में आने वाले पुराने मंदिरों और पेड़ों को बचाने कि लिए ट्रैफिक आइलैंड या रोटरी बनाई गई. मंदिर को सड़क के बीच सुरक्षित जगह देकर निर्माण पूरा किया गया. इन उदाहरणों को देखा जाए तो उज्जैन में भी तकनीक विकल्प निकालकर विकास और आस्था, दोनों को साथ रखा जा सकता है.
सामने आई हर्षानंद गिरी
वहीं खड़े हनुमान मंदिर को सुरक्षित बचाने के लिए आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि की शिष्या हर्षानंद गिरी भी सामने आई हैं. उन्होंने संत समाज से अपील की है, मंदिर और आस्था को बचाने के लिए आगे आएं. इतना ही नहीं उन्होंने सरकार से भी अपील की है, कि चार बार प्रयास करने के बाद पांचवां प्रयास नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि जो हनुमान जी का मंदिर तोड़ा गया है, अब वहीं पर दोबारा मंदिर का निर्माण किया जाए. इतना नहीं उन्होंने भव्य मंदिर बनाने की मांग की है.
ज्योतिषाचार्य ने क्या कहा ?
ज्योतिषाचार्य मनीष अग्रवाल ने बताया कि दक्षिणमुखी हनुमान जी का विशेष संबंध पंचमुखी हनुमान जी से है. दक्षिण की दिशा यमराज और सारी नेगेटिव एनर्जी का सूचक है. वहीं दक्षिण में ही हनुमान जी ने लंका दहन किया था. अगर दक्षिण दिशा में हनुमान जी मुख करके विराजमान हैं, तो उन्होंने सारी नेगेटिविटी, यमराज और हर चीज को रोका हुआ है.
'बहुत बड़े प्रलय का संकेत'
उन्होंने यह भी बताया कि अगर कोई प्रतिमा वहां से नहीं हिल रही है और प्रशासन सोच रहा है कि हम उसको हटाएं और उनका मुख बदल दें, तो यह बहुत बड़े प्रलय का संकेत माना जाता है. क्योंकि अगर वह नहीं हट रही है तो वह प्राण-प्रतिष्ठित मूर्ति है. उसमें हनुमान जी की पूरी की पूरी ताकत विराजमान है. अगर उनको आपने वहां से हटाने की चेष्टा की और हटाया, तो वहां पर प्रलय आ सकती है. उन्होंने कहा कि ज्योतिष और शास्त्र के मुताबिक, इसको हटाना बिल्कुल गलत है और यह बिल्कुल भी हटनी नहीं चाहिए.