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मुख्य जनगणना से करीब 5 महीने पहले मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत देश के आदिवासी आंचलों में जनजातीय समाज की धार्मिक पहचान को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है. सरकारी संस्था ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI) और रायपुर स्थित रिसर्च संस्था सेंटर फॉर स्टडी ऑन हॉलिस्टिक डेवलपमेंट की रिपोर्ट के हवाले से दावा किया गया है कि आदिवासियों को जनगणना में हिंदू धर्म के बजाय ORP (Other Religions and Persuasions) श्रेणी में दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.
रिपोर्ट में इसे मध्य भारत के आदिवासी समाज को हिंदू समाज से अलग करने की सुनियोजित कोशिश बताया गया है. दावा है कि देशभर में सैकड़ों संगठन इस काम में लगे हैं. अलग-अलग तरह के प्रलोभन दिए जा रहे हैं.
सबसे ज्यादा आदिवासी समाज टारगेट
TRI के कमिश्नर लक्ष्मण मरकाम ने ZEE NEWS से खास बातचीत करते हुए दावा किया कि आदिवासी इलाकों में धर्मांतरण और डेमोग्राफी चेंज का खेल चल रहा है. उन्होंने आगे बाताया कि केंद्र की ओर से डेमोग्राफी को लेकर जस्टिस नावलेकर की कमेटी बनाई गई थी, जिसकी जांच में आदिवासी समाज को सबसे ज्यादा टारगेट किए जाने की बात भी सामने आई थी.
फंडिंग के जरिए धर्मांतरण कराने का दावा
कमिश्नर लक्ष्मण मरकाम ने बताया कि सीधे धर्मांतरण पर रोक होने के चलते पहले आदिवासियों के बीच हिंदू देवी-देवताओं को कमतर बताने और ईसाई धर्म को बेहतर तरीके से पेश करने की कोशिश की जाती है. इसके साथ ही इलाज और शिक्षा का लालच दिया जाता है. इसके बाद जनगणना में हिंदू धर्म छोड़कर ORP कॉलम में टिक कराने और आगे फंडिंग के जरिए धर्मांतरण कराने का दावा किया गया है.
धर्मांतरण का ‘टू-स्टेप फॉर्मूला’ बताया
लक्ष्मण मरकाम ने इसे धर्मांतरण का ‘टू-स्टेप फॉर्मूला’ बताया. उन्होंने ZEE NEWS टीम को बताया कि पहले जनजातीय समाज में यह प्रचार किया जाता है कि आदिवासी हिंदू नहीं हैं. उन्हें गोंडी धर्म कोड, सरना कोड या ORP श्रेणी में अपनी धार्मिक पहचान दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया जाता है.
भील प्रदेश बनाने की मांग
दूसरे चरण में मुख्यधारा से अलग धार्मिक पहचान बनने के बाद उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तित करने की प्रक्रिया शुरू होने का दावा किया गया है. रिपोर्ट में ORP आबादी में बढ़ोतरी को केवल धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं माना गया है, बल्कि मध्य भारत में गोंडवाना लैंड और मालवा क्षेत्र को मिलाकर अलग भील प्रदेश बनाने की मांग को भी जनसंख्या में बदलाव से जोड़ने का दावा किया गया है.
ORP श्रेणी में कितने लोगों के नाम दर्ज?
रिपोर्ट में 2011 की जनगणना में करीब 79 लाख लोगों के ORP श्रेणी में दर्ज होने का आंकड़ा बताया गया है. लक्ष्मण मरकाम का दावा है कि आगामी जनगणना में यह संख्या कम से कम चार गुना तक बढ़ सकती है और इसके जरिए आगे चलकर डेमोग्राफी के साथ राजनीतिक डेमोग्राफी में भी बदलाव हो सकता है. उन्होंने इस पूरे मामले में राजनीतिक समर्थन होने का भी दावा किया है. हालांकि, धर्मांतरण, संगठनों की भूमिका और इन दावों से जुड़े निष्कर्षों को लेकर स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है. रिपोर्ट और संबंधित पक्षों के आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही इन दावों की अंतिम पुष्टि की जा सकती है.
अब तक हुई जनगणना में देखिये कितने लोगो ने धर्म छोड़ ORP कॉलम में टिक किया.
1. 1951 जनगणना लगभग 18 लोगो ने ORP)
2. 1961 की जनगणना 16 लाख लोगों ने (ORP)
3. 1971 की जनगणना 21 लाख (ORP)
4. 1981 जनगणना 27 लाख (ORP)
5. 1991 जनगणना में 32 लाख (ORP)
6. 2001 जनगणना में 65 लाख (ORP)
7. 2011 जनगणना में 79 लाख (ORP)
आंकड़ों के मुताबिक, 2011 की जनगणना में ORP श्रेणी में दर्ज करीब 79 लाख लोगों में झारखंड में 42 लाख ने सरना, पश्चिम बंगाल में करीब 9 लाख ने संथाल और सरना, ओडिशा में 4.7 लाख ने सरना, मध्य प्रदेश में 5.9 लाख ने गोंड, छत्तीसगढ़ में 4.9 लाख ने गोंड और महाराष्ट्र में 1.7 लाख लोगों ने गोंड पहचान दर्ज की थी. लक्ष्मण मरकाम ने बताया कि हमारी रिसर्च के मुताबिक, आगामी जनगणना में 79 लाख की ORP आबादी कम से कम चार गुना तक बढ़ सकती है. उनका दावा है कि आगे चलकर इससे डेमोग्राफी चेंज और राजनीतिक डेमोग्राफी में बदलाव हो सकता है, क्योंकि इस पूरे मामले में राजनीतिक समर्थन भी है.