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सतना के चित्रकूट में लगातार बारिश और मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से आई भीषण बाढ़ के बीच, आस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने सभी का ध्यान खींच लिया. प्रसिद्ध रामघाट पर स्थित बड़ा मठ भी बढ़ते पानी की चपेट में आ गया है. मंगलवार सुबह जिलाधिकारी पुलकित गर्ग और पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह हालात का जायजा लेने पहुंचे और सुरक्षा के लिहाज से मठ को खाली करवाने की कोशिश की. अधिकारियों ने बड़े मठ के पुजारी से सम्मानपूर्वक सुरक्षित जगह पर जाने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया.
बाढ़ में भगवान को अकेला छोड़ने से पुजारी का इनकार
डीएम पुलकित गर्ग और एसपी अरुण कुमार सिंह ने हाथ जोड़कर पुजारी से सुरक्षित स्थान पर चलने की अपील की. जहां मठ में मौजूद दूसरे लोग अधिकारियों की बात मानकर वहां से जाने को तैयार हो गए, वहीं पुजारी ने वहां से हटने से इनकार कर दिया. भावुक होकर उन्होंने अधिकारियों से कहा, "आप सभी को ले जाइए, लेकिन मैं अपने भगवान को छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा. पूरी जिंदगी इनके चरणों में बिताई है, संकट में इन्हें अकेला कैसे छोड़ दूं." जहां प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है, वहीं पुजारी की अटूट भक्ति और पक्के इरादे ने सभी का दिल जीत लिया है.
मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ा
बता दें कि चित्रकूट में लगातार हो रही बारिश की वजह से प्रशासन अलर्ट पर है. बारिश के बीच सड़कों पर जमा कीचड़ को हटाना एक चुनौती है, फिर भी सफाई का काम जारी है. चित्रकूट नगर परिषद की टीम पहले से ही सड़कों की सफाई में जुटी है और सतना नगर निगम की टीम ने भी सफाई का काम शुरू कर दिया है. JCB मशीनों की मदद से सड़कों से कीचड़ और मलबा हटाया जा रहा है. रुक-रुक कर हो रही बारिश से मंदाकिनी नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है.
सतना में बारिश से हाल बेहाल
इस बीच, सतना की रघुराजनगर तहसील के सोहास गांव में बाढ़ के कारण हालात और खराब हो गए हैं. पिछले एक महीने से यह गांव पूरी तरह से कटा हुआ है, जिससे गाड़ियों की आवाजाही ठप पड़ गई है. इस संकट के दौरान, गांव के एक बुजुर्ग की हालत अचानक बिगड़ गई. परिवहन का कोई साधन न मिलने पर, बेबस परिवार वालों और गांव वालों ने उन्हें एक चारपाई पर लिटाया और अस्पताल पहुंचाने के लिए तीन किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक अपने कंधों पर उठाकर ले गए.