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अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट के दोषी शफीक को 8 दिन की पैरोल: गुजरात पुलिस के साथ उज्जैन पहुंचा

Ujjain News: अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट केस में मौत की सजा पाए शफीक को आठ दिन की पैरोल दी गई है. गुजरात पुलिस की एक टीम उसे उज्जैन लाई है, जहां उसकी सुरक्षा और निगरानी के लिए स्थानीय पुलिस बल भी तैनात किया गया है.

Written By Ranjana Kahar
Published: Oct 04, 2026, 07:05 AM IST | Updated: Oct 04, 2026, 07:12 AM IST
Image Credit: अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट के दोषी शफीक को 8 दिन की पैरोल
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अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट केस में मौत की सजा पाए दोषी शफीक को आठ दिन की पैरोल मिलने के बाद मध्य प्रदेश के उज्जैन लाया गया है. गुजरात हाई कोर्ट से फांसी की सजा मिलने के बाद से वह जेल में बंद था. गुजरात पुलिस की एक स्पेशल टीम उसे उज्जैन लाई है ताकि पैरोल के दौरान उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.पैरोल के दौरान सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक या अप्रिय घटना को रोकने के लिए स्थानीय उज्जैन पुलिस भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर है. थाना प्रभारी विवेक कनोडिया ने बताया कि गुजरात पुलिस के गार्ड्स के अलावा, स्थानीय पुलिस स्टेशन और पुलिस लाइंस से भी पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है. शफीक की हर गतिविधि पर 24 घंटे कड़ी नजर रखी जा रही है.

शफीक को 8 दिन की पैरोल क्यों मिली
पुलिस पूछताछ के दौरान दोषी शफीक ने बताया कि उसे सुप्रीम कोर्ट में अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखने और पैरवी से संबंधित फंड जुटाने के उद्देश्य से लोगों से संपर्क करने के लिए यह 8 दिनों की पैरोल दी गई है. पैरोल की मियाद समाप्त होते ही गुजरात पुलिस की टीम उसे वापस ले जाएगी.

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
थाना प्रभारी विवेक कनोडिया के अनुसार, गुजरात हाई कोर्ट ने शफीक को फांसी की सजा सुनाई है. स्थानीय पुलिस बल लगातार नजर रखे हुए है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो और उसे ऐसी किसी गतिविधि में शामिल होने का कोई मौका न मिले. पुलिस का कहना है कि गुजरात पुलिस की सुरक्षा टीम के अलावा, स्थानीय पुलिस स्टेशन और पुलिस लाइन्स से भी पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं शफीक की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है.

18 साल से जेल में बंद है
बताया जा रहा है कि शफीक की यह चौथी पैरोल है और पहले भी पैरोल पर उज्जैन जा चुका है. वह लगभग 18 साल से जेल में बंद है. उसकी मौजूदा आठ दिन की पैरोल 8 अक्टूबर को खत्म होगी. पैरोल की अवधि खत्म होने के बाद, गुजरात पुलिस उसे वापस साबरमती जेल ले जाएगी.

56 लोगों की हुई थी मौत
गौरतलब है कि 2008 में अहमदाबाद में हुए सीरियल बम धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. इसी मामले में शफीक को दोषी ठहराया गया था. इस मामले की जानकारी चिमनगंज थाना टीआई विवेक कनोडिया ने दी है.
 

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रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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