100 की स्पीड में बस, शराब पीकर ड्राइविंग: कानून में क्या हैं स्कूल बसों के नियम, अभिभावक कैसे जांचें अपने बच्चों की सुरक्षा? 3 पॉइंट
स्कूल बसों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी केवल ड्राइवर की गलती नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन की भी सीधी लापरवाही है. सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत यदि बस में किसी दुर्घटना या लापरवाही की पुष्टि होती है, तो ड्राइवर के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी FIR दर्ज की जा सकती है.
मंदसौर में महू नीमच हाईवे पर 100 की रफ्तार से बेतहाशा भागती स्कूल बस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. दावा किया जा रहा है कि वीडियो मंदसौर का है और इसकी स्पीड वीडियो बनाने वाले की गाड़ी में स्पीडोमीटर पर तकरीबन 100 किलोमीटर प्रति घंटा दिखा रही है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि रफ्तार से भागती स्कूल बस में बच्चे बैठे थे या नहीं. साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कब का है. Zee Media वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है. इसके साथ ही एक मामला छत्तीसगढ़ से आया है, जहां सक्ति जिले में शराब पीकर स्कूली वाहन चलाने वाले चालक पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगा है.
मंदसौर में 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बेतहाशा दौड़ती स्कूल बस और छत्तीसगढ़ के सक्ति जिले में शराब के नशे में स्कूल बस चलाता ड्राइवर... ये हालिया घटनाएं यह बताने के लिए काफी हैं कि रोजाना मासूमों की जिंदगी किस तरह खतरे में डाली जा रही है. सुप्रीम कोर्ट और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहद सख्त नियम बनाए हैं. अगर आपके बच्चे भी स्कूल बस या वैन से जाते हैं, तो आपको 3 सबसे जरूरी कानूनी पॉइंट्स और पेरेंट्स चेकलिस्ट के बारे में जरूर जानना चाहिए.
1. स्पीड गवर्नर, नशा जांच और ड्राइवर-स्टाफ के कड़े नियम
40-50 किमी/घंटा की गति सीमा: सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार, हर स्कूल बस में स्पीड गवर्नर (Speed Governor) लगा होना अनिवार्य है. किसी भी स्थिति में स्कूल बस की गति 40 से 50 किमी प्रति घंटा से अधिक नहीं होनी चाहिए. हाईवे पर 100 की रफ्तार से बस चलाना मोटर वाहन अधिनियम का सीधा उल्लंघन है.
ड्राइवर के पास 5 साल का अनुभव और सत्यापन: किसी भी स्कूल बस को चलाने के लिए ड्राइवर के पास भारी वाहन चलाने का कम से कम 5 साल का अनुभव होना जरूरी है. इसके साथ ही उसका सालाना पुलिस वेरिफिकेशन भी अनिवार्य है. इनका पालन करना स्कूल की जिम्मेदारी है.
नशा और ड्रंक एंड ड्राइव पर सख्त कार्रवाई: सक्ति जिले में पुलिस ने शराबी ड्राइवर पर धारा 185 के तहत ₹20,000 का जुर्माना लगाया. नियम के मुताबिक, स्कूल प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि वह रोजाना बस चलाने से पहले ड्राइवर की ब्रीथ एनालाइजर से जांच करे. अगर कोई ड्राइवर नशे में पाया जाए तो उसके ऊपर कार्रवाई करे.
महिला अटेंडेंट अनिवार्य: यदि बस में गर्ल्स स्टूडेंट्स सफर कर रही हैं, तो बस में एक ट्रेंड महिला अटेंडेंट या कंडक्टर का होना कानूनी रूप से जरूरी है. यह लड़कियों की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी कदम है.
2. बस की फिटनेस: पीला रंग, जीपीएस, पैनिक बटन और इमरजेंसी एग्जिट
चमकीला पीला रंग: स्कूल में बच्चों को लाने और ले जाने वाली बसों का रंग अनिवार्य रूप से चमकीला पीला होना चाहिए और उसके आगे-पीछे स्पष्ट शब्दों में 'स्कूल बस' लिखा होना चाहिए. अगर बस किराए की है, तो ऐसी गाड़ियों पर 'ऑन स्कूल ड्यूटी' लिखा होना जरूरी है.
जीपीएस और सीसीटीवी: स्कूल बस में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD/GPS) और सीसीटीवी कैमरे चालू हालत में होने चाहिए, ताकि स्कूल प्रबंधन और जरूरत पड़ने पर पैरेंट्स बस की लाइव लोकेशन देख सकें.
सेफ्टी फीचर्स: स्कूल बस की खिड़कियों पर लोहे की हॉरिजॉन्टल ग्रिल, फर्श पर नॉन-स्लिप मैट, इमरजेंसी एग्जिट डोर, फर्स्ट एड बॉक्स और अग्निशामक यंत्र होना भी अनिवार्य है. किसी गंभीर एक्सीडेंट के समय ये सभी सेफ्टी फीचर बहुत काम आते हैं.
ओवरलोडिंग पर पाबंदी: नियमों के अनुसार, स्कूल बस में स्वीकृत सीटों से एक भी बच्चा ज्यादा नहीं बैठाया जा सकता. इसके साथ ही स्कूल बस के पास वैध परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट भी होना अनिवार्य है. बिना वैध परमिट या फिटनेस सर्टिफिकेट के स्कूल बस चलाना अपराध है.
3. 'पेरेंट्स सेफ्टी चेकलिस्ट': अभिभावक खुद कैसे जांचें अपने बच्चे की सुरक्षा?
केवल आरटीओ (RTO) या पुलिस के भरोसे रहने के बजाय अभिभावकों को खुद इन 3 बातों की पड़ताल करनी चाहिए.
स्कूल ट्रांसपोर्ट कमेटी से सेफ्टी चेक की मांग: सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हर स्कूल में 'स्कूल-पेरेंट्स ट्रांसपोर्ट सेफ्टी कमेटी' का होना अनिवार्य है. पेरेंट्स स्कूल जाकर बस के स्पीड गवर्नर, जीपीएस और ड्राइवर के पुलिस वेरिफिकेशन डाक्यूमेंट्स मांग सकते हैं.
ड्राइवर और बस का भौतिक सत्यापन: समय-समय पर बस स्टॉप पर खुद जाकर देखें कि क्या ड्राइवर शराब या किसी नशे के प्रभाव में तो नहीं है? क्या बस में महिला अटेंडेंट मौजूद है?
आपातकालीन नंबरों की जांच: बस के बाहर और अंदर स्कूल प्रशासन, आरटीओ, पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन का नंबर स्पष्ट लिखा होना चाहिए. यदि बस ओवरस्पीड में चलती दिखे, तो तुरंत इन नंबरों और स्कूल प्रिंसिपल से लिखित शिकायत करें.