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इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने दिल्ली हॉस्टल हादसे का भी जिक्र किया. वहीं उन्होंने इस कार्यक्रम में दिल्ली हॉस्टल हादसे में एमपी के देवास के एक मृतक छात्र अर्पित जाज की फैमिली को मंच पर बुलाया. इस दौरान अर्पित जाज के दादा, पिता, बड़ी बहन से बातचीत की. परिवार ने राहुल गांधी के सामने हादसे की पूरी कहानी के बारे में बताते हुए सिस्टम की खामियां समेत घटना के बाद तक की कार्रवाई को लेकर अपना दर्द बयां किया.
राहुल गांधी को परिवार ने बताया कि अर्पित जाज 2 साल के थे. दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र थे. दिल्ली में बेहतर पढ़ाई के साथ अपने भविष्य का सपना लेकर रह रहे थे. परिवार ने बताया कि 6 सितंबर को दिल्ली में हुए हादसे में अर्पित जाज की मौत हो गई थी. वहीं परिवार ने आरोप लगाया है कि हादसे के बाद उन्हें काफी देर तक अपने बच्चे के बारे में सही जानकारी नहीं दी गई.
क्या बोले अर्पित जाज के दादा?
वहीं अर्पित के दादा ने राहुल गांधी को बताया कि हादसे के समय बच्चे खाना खाने के लिए टेबल पर बैठे थे. इसी दौरान बिल्डिंग का हिस्सा गिर गया. इसमें दोनों बच्चे मलबे के नीचे दब गए. उन्होंने बताया कि मलबे में दबे बच्चों की आवाजें सुनाई दे रही थीं. बच्चे लगातार बचाओ-बचाओ की आवाज लगा रहे थे. दादा ने आरोप लगाया है कि पुलिस और एंबुलेंस मौके पर करीब आधे घंटे बाद पहुंची. उन्होंने कहा कि उस दौरान आसपास के लोग बच्चों को बचाने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन मलबे में फंसे होने की वजह से उन तक मदद नहीं पहुंच सकी.
पिता ने भी दर्द बयां किया
छात्रों की गूंज कार्यक्रम के मंच पर अर्पित जाज के पिता ने भी अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि उन्हें अपने बेटे के बारे में कई घंटों तक जानकारी नहीं दी गई. उन्होंने कहा कि करीब 12 घंटे तक बच्चे के बारे में जानकारी नहीं मिली. उन्होंने कहा कि करीब 12 घंटे तक परिवार परेशान होकर इधर-उधर भटकता रहा. उन्होंने कहा कि उनका बेटा कोचिंग पढ़ने गया था.
बढ़ी मुश्किल से दिल्ली भेजा था
उन्होंने कहा कि परिवार ने बड़ी मुश्किलों से अर्पित को पढ़ने के लिए दिल्ली भेजा था. परिवार की आर्थिक स्थिति आसान नहीं थी, लेकिन बेहतर शिक्षा और भविष्य के लिए वे अपने बेटे की पढ़ाई का खर्च उठा रहे थे. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने बेटे को पढ़ाने के लिए बहुत मेहनत की थी, लेकिन आज ऐसा हादसा उनके परिवार के साथ हो गया.
सिस्टम पर भी उठाए सवाल
अर्पित की बड़ी बहन प्रियांशी जाज ने राहुल गांधी के सामने सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं. प्रियांशी जाज ने कहा कि फेल सिस्टम की वजह से निर्दोष बच्चों की जान जा रही है. उनका सवाल था कि आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है? प्रियांशी ने आगे कहा कि बच्चे उच्च शिक्षा के लिए अपने घर और होमटाउन से दूर जाते हैं. परिवार महंगी फीस के बावजूद अपने बच्चों को इसलिए पढ़ाता है, ताकि वे अच्छा करियर बना सकें और अपने सपने पूरे कर सकें. उन्होंने कहा कि मिडिल क्लास परिवार बड़ी मुश्किल से बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं, लेकिन अगर उन्हें सुरक्षित माहौल ही नहीं मिलेगा तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
कई परिवारों ने बच्चों को खोया
प्रियांशी जाज ने दावा किया कि हादसे के बाद सामने आया कि जिस बिल्डिंग में घटना हुई, उसका निर्माण कथित तौर पर नियमों के अनुरूप नहीं था. प्रियांशी का कहना है कि अगर बिल्डिंग के जरूरी वैधानिक ऑडिट और समय-समय पर सुरक्षा जांच होती, तो इस तरह की घटना को रोका जा सकता था. प्रियांशी ने बताया कि हादसे को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन परिवारों को अब भी कार्रवाई का इंतजार है. उन्होंने कहा कि इस हादसे में कई परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है. वे नहीं चाहतीं कि भविष्य में किसी दूसरी फैमिली को ऐसी पीड़ा से गुजरना पड़े.
इंफ्रास्ट्रक्चर कमजोर क्यों?
परिजनों की बात सुनने के बाद राहुल गांधी ने दिल्ली हॉस्टल हादसे को सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि अगर छात्रों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित सरकारी सुविधाएं उपलब्ध होतीं, तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था. राहुल गांधी ने कहा कि जब शिक्षा में सरकार का बजट कम होता है और इंफ्रास्ट्रक्चर कमजोर होता है, तो इसका असर सीधे छात्रों पर पड़ता है. उन्होंने हॉस्टल की सुविधा और छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया. राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों को सुरक्षित रहने की जगह और बेहतर सरकारी सुविधाएं मिलनी चाहिए.