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'शरीर थक सकता है, लेकिन हौसला नहीं… हम चल नहीं सकते, लेकिन हम रुकेंगे नहीं.' ये सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि उस जज्बे की आवाज है, जिसने भिंड के छोटे से गांव गाता से निकलकर दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण समुद्री तैराकी अभियानों में अपनी पहचान बनाई है. भिंड के दिव्यांग पैरा तैराक सत्येंद्र लोहिया ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है. इंग्लैंड के डोवर से फ्रांस के तट तक उन्होंने 21 घंटे 20 मिनट तक लगातार तैरते हुए करीब 58 किलोमीटर का सफर पूरा किया और तीसरी बार इंग्लिश चैनल पार करने की उपलब्धि हासिल की.
24 सितंबर 2026 की सुबह 8 बजकर 58 मिनट पर डोवर तट से शुरू हुआ यह सफर आसान नहीं था. सामने था बेहद ठंडा समुद्र, तेज समुद्री धाराएं और हर पल बढ़ती शारीरिक थकान. डोवर से फ्रांस की सीधी दूरी भले ही करीब 36 किलोमीटर हो, लेकिन समुद्री धाराओं ने तैराकी का रास्ता घुमावदार कर दिया. नतीजा यह हुआ कि करीब 58 किलोमीटर तक समुद्र की लहरों से जूझते हुए सत्येंद्र आगे बढ़ते रहे. घंटे गुजरते गए, दिन ढला, रात ने समुद्र को अपने आगोश में ले लिया. ठंडे पानी में शरीर सुन्न पड़ने लगा, मांसपेशियां जवाब देने लगीं, लेकिन सत्येंद्र के हौसले ने हार नहीं मानी.
हर लहर के साथ एक ही लक्ष्य था फ्रांस का तट
इस चुनौतीपूर्ण सफर में गैलीबेंट नौका के चालक माइकल ओराम और पर्यवेक्षक मिस्टर पॉल लगातार उनके साथ रहे. अभियान CSPF यानी चैनल स्विमिंग एंड पायलट फेडरेशन के अंतर्गत पूरा किया गया. आखिरकार 25 सितंबर की सुबह 6 बजकर 18 मिनट पर वह ऐतिहासिक पल आया, जब 21 घंटे 20 मिनट के अथक संघर्ष के बाद सत्येंद्र फ्रांस के तट तक पहुंच गए. यह इंग्लिश चैनल पर उनकी तीसरी सफल पार यात्रा है. इससे पहले 24 जून 2018 को पहली बार और 19 जुलाई 2023 को दूसरी बार दोतरफा रिले के रूप में उन्होंने यह चुनौती पूरी की थी. गांव गाता की छोटी सी नदी बैसली से तैराकी का सफर शुरू करने वाले सत्येंद्र लोहिया का यह कारनामा आज दुनिया के समुद्र तक पहुंच चुका है.
फ्रांस के तट पर पहुंचने का भावुक पल
58 किलोमीटर का सफर 21 घंटे 20 मिनट का संघर्ष और तीसरी बार इंग्लिश चैनल पार करने की उपलब्धि यह सिर्फ एक तैराक की सफलता नहीं, बल्कि उस अदम्य साहस की कहानी है, जो शरीर की सीमाओं से कहीं आगे निकल जाती है. सत्येंद्र ने अपनी जीत टीम, परिवार, प्रायोजकों और देशभर के शुभचिंतकों को समर्पित किया.