कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत का सच, भूख या जानलेवा 'CDV वायरस'? जानिए कैसे आवारा कुत्तों से जंगलों तक पहुंचा यह संकट
इस साल कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार मौतों ने हलचल मचा दी है. शुरुआती जांच में शावकों की मौत का कारण भुखमरी और कमजोरी बताया गया था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पुष्टि हुई है कि यह मौतें CDV वायरस की वजह से हुई हैं.
मध्य प्रदेश की शान माना जाने वाला कान्हा टाइगर रिजर्व बाघों की रहस्यमयी मौतों के सिलसिले के कारण इन दिनों चर्चा में है. इस साल पार्क में दस बाघों की मौत हो चुकी है, जिससे वन्यजीव प्रेमी, प्रशासन और न्यायपालिका सभी गहरे चिंतित हैं. इस स्थिति के बीच एक अहम सवाल खड़ा होता है कि इन मौतों का असली कारण क्या है- भूख, या फिर जानलेवा 'CDV वायरस'? जानिए, कैसे आवारा कुत्तों से शुरू हुआ यह संकट जंगलों के भीतर तक फैल गया है.
जांच रिपोर्ट से उड़ी प्रशासन की नींद
शुरुआत में यह माना जा रहा था कि शावक कमजोरी और भुखमरी के कारण मर गए. लेकिन बाद की मेडिकल जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो गया है कि इन मौतों का मुख्य कारण बेहद खतरनाक 'कैनाइन डिस्टेंपर वायरस' (CDV) है, जो आवारा कुत्तों से फैलता है. पिछले कुछ महीनों में कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन्यजीव प्रेमियों और प्रशासन की नींद उड़ा दी है.
मौतों की क्रोनोलॉजी
बाघों की मौत का यह सिलसिला अप्रैल में ही शुरू हो गया था. 21 अप्रैल को सरही रेंज में बाघिन अमाही के चार शावकों में से एक की मौत हुई. 29 अप्रैल तक उसी कुनबे में जन्मे चारों शावकों की जान चली गई. इसके बाद मई में मुक्की रेंज में पांच साल के एक नर बाघ की मौत हो गई और फिर जून में तीन साल के एक और बाघ की जान चली गई. माना जा रहा है कि लगातार हो रही इन मौतों के पीछे कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) है. आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार अब तक आठ बाघों की मौत का कारण यही वायरस माना गया है.
क्या है CDV और यह कितना जानलेवा है?
कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) बेहद संक्रामक और जानलेवा वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से श्वसन, पाचन और तंत्रिका तंत्र पर हमला करती है. यह वायरस पैरा-मिक्सो-वायरस परिवार से आता है और आमतौर पर पालतू और आवारा कुत्तों में पाया जाता है. लेकिन जब यह वायरस जंगलों के बफर क्षेत्रों में फैलता है, तो कुत्तों के माध्यम से बाघ, तेंदुए, शेर और लोमड़ियों जैसे मांसाहारी जंगली जानवरों तक पहुंच जाता है. CDV से संक्रमित जानवरों में तेज बुखार, आंखों और नाक से पानी आना, सांस लेने में कठिनाई, दौरे पड़ना और मानसिक असंतुलन जैसे गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं. यदि समय रहते इसकी पहचान न हो तो यह वायरस जानवर के अंगों को फेल कर देता है और कुछ ही दिनों में उसकी जान ले लेता है.
बफर जोन और बायो-सिक्योरिटी में चूक
कान्हा में बजट या सुरक्षा इंतजामों की कोई कमी नहीं है, फिर भी यह संक्रमण जंगलों के भीतर तक कैसे पहुंच गया? विशेषज्ञों के अनुसार, यह पार्क प्रबंधन की एक बड़ी प्रशासनिक चूक और बायो-सिक्योरिटी प्रोटोकॉल की विफलता को दर्शाता है. टाइगर रिजर्व के आस-पास के गांवों में आवारा कुत्तों के टीकाकरण पर ध्यान नहीं दिया गया और कोर जोन में आने-जाने के लिए सख्त स्वच्छता नियमों को भी ठीक से लागू नहीं किया गया, जिसकी कीमत अब ये बेज़ुबान जानवर अपनी जान देकर चुका रहे हैं.
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिस पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गहरी चिंता और नाराजगी जताई है. पार्क प्रबंधन को फटकार लगाते हुए अदालत ने स्थिति को सुधारने के लिए 15 दिनों का सख्त अल्टीमेटम दिया है और प्रशासनिक कर्मचारियों को ठोस तथा प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया है.
समाधान और आगे की राह
खतरनाक वायरस को जंगल में प्रवेश करने से रोकने के लिए एक वैज्ञानिक प्रणाली है, जो मुख्य रूप से तीन स्तरों पर काम करती है. पहला, पार्क के आसपास के गांवों में आवारा और पालतू कुत्तों का 100 प्रतिशत रिंग-वैक्सीनेशन करना, ताकि संक्रमण को जंगल की सीमा के बाहर ही रोका जा सके. दूसरा, संदिग्ध जानवरों के रक्त के नमूने लेकर सीरो-सर्विलांस करना, ताकि बीमारी का शुरुआती चरण में ही पता चल सके. तीसरा, कोर जोन में इंसानों, वाहनों और उपकरणों की आवाजाही पर नजर रखना और वहां सख्त सैनिटाइजेशन सुनिश्चित करना. इन उपायों से टाइगर रिजर्व में रहने वाले बेज़ुबान जानवरों की जान बचाई जा सकती है.
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समीता राजौरा का बयान
चीफ वाइल्डलाइफ वॉर्डन समीता रजौरा का कहना है कि हमने कान्हा में एक विशेष निगरानी टीम बनाई है. फील्ड स्टाफ को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि अगर बाघों में लंगड़ापन, कमजोरी, दिशा का पता न चलना या खाने-पीने के व्यवहार में बदलाव जैसे छोटे-मोटे लक्षण भी दिखें, तो तुरंत इसकी सूचना दें. बफर जोन के गांवों में लगभग 2500 आवारा और पालतू कुत्तों का टीकाकरण (रिंग वैक्सीनेशन) किया है. जल स्रोतों और वन्यजीवों के नमूनों की जांच चल रही है और एहतियात के तौर पर एक पर्यटन मार्ग को बंद कर दिया गया है. स्थिति हमारी निगरानी में है.