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राम, सीता, लक्ष्मण और दशरथ... मंडला में पहली बार 25 महिलाओं ने निभाए किरदार, जानें 64 साल पुरानी परंपरा

मंडला जिले के सर्री गांव में 64 साल पुरानी परंपरा में नया इतिहास गढ़ा गया है. इस बार हर साल से अलग तरीके से रामलीला का मंचन किया गया है. बताया जा रहा है कि पुरुषों की जगह महिलाओं ने नारी शक्ति की अनूठी मिसाल पेश की है.

Written By Manish Kushawah
Published: Oct 19, 2026, 09:59 PM IST | Updated: Oct 19, 2026, 10:03 PM IST
Image Credit: ZEE NEWS
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मध्य प्रदेश की मंडला के सर्री गांव में रामलीला की 62 साल पुरानी परंपरा आज भी कायम है. इस बार हर साल से काफी अलग तरह से निभाई गई है. 62 साल बाद मंडला में पहली बार पुरुषों की जगह महिलाओं ने रामलीला के सभी किरदारों की जिम्मेदारी संभाली है. इसमें करीब 25 महिलाओं ने राम, सीता, लक्ष्मण और राजा दशरथ समेत कई किरदार निभाकर आस्था, संस्कृति और नारी शक्ति की अनूठी मिसाल पेश की है.

इस दौर में जहां पारंपरिक लोककलाएं धीरे-धीरे पीछे छूटती जा रही हैं. वहीं मंडला जिले के नैनपुर विकासखंड के सर्री गांव में रामलीला की परंपरा आज भी जीवंत है. वर्ष 1964 से चली आ रही इस परंपरा में पहली बार महिलाओं ने मंच संभालकर एक नया अध्याय जोड़ दिया है.

25 महिलाओं ने किया मंचन

मिली जानकारी के मुताबिक, गांव की 18 से 50 वर्ष तक की करीब 25 महिलाओं ने पखवाड़े भर की तैयारी के बाद रामायण के अलग-अलग नाटकों का मंचन किया. इनमें साक्षी हरदहा ने राम, शिवानी जंघेला ने लक्ष्मण और शीतल जंघेला ने माता सीता की भूमिका निभाई. वहीं, अन्य महिलाओं ने राजा दशरथ, राजा जनक, भरत और शत्रुघ्न सहित कई पात्रों को मंच पर जीवंत किया.

सन 1964 से चली आ रही परंपरा

नवयुवक मंडल समिति के अध्यक्ष आनंद सिंगोर ने बताया कि सर्री गांव में वर्ष 1964 से रामलीला की परंपरा चली आ रही है. गांव के बड़े-बुजुर्गों और पुराने कलाकारों की संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए इस बार महिलाओं को रामलीला में भूमिका निभाने का अवसर दिया गया. महिलाओं ने भी सहजता से इसके लिए सहमति जताई. इसलिए उन्होंने रामलीला में हिस्सा लिया है.

महिलाओं ने पूरे उत्साह से सीखा

व्यास अयोध्या प्रसाद जंघेला का कहना है कि यहां का इतिहास रहा है, कि हर साल पुरुष मंडल ही रामलीला करता था, लेकिन इस बार महिलाओं में इसे लेकर उत्साह दिखाई दिया. उन्हें सिखाने में ज्यादा परेशानी नहीं आई, हालांकि धुन, दोहे, लावनी और छंद याद कराने में थोड़ी मेहनत करनी पड़ी. इसके बावजूद महिलाओं ने तेजी से सीखा और पूरे उत्साह के साथ अपनी भूमिकाएं निभाईं.

सभी का भरपूर सहयोग मिल रहा

राजा दशरथ का किरदार निभा रहीं चित्रलेखा सिंगोर ने बताया कि रामलीला में करीब 35 से 40 महिलाएं और बच्चियां हिस्सा ले रही हैं. उन्होंने कहा कि जब नवयुवक मंडल के सदस्यों ने दो दिन रामलीला मंचन का प्रस्ताव दिया, तो महिलाओं ने खुशी-खुशी इसे स्वीकार कर लिया. गांव में पिछले 64 वर्षों से पुरुष रामलीला का मंचन करते आ रहे हैं, लेकिन इस बार महिलाओं को यह जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिला है. चित्रलेखा ने कहा कि इस आयोजन को लेकर सभी में उत्साह है और गांव के पुरुषों, महिलाओं व बुजुर्गों का भरपूर सहयोग मिल रहा है.

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मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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