Explainer: महाकाल मंदिर में धक्का-मुक्की और मारपीट का विवाद... जानिए प्रोटोकॉल, गर्भगृह प्रवेश के नियम और सुरक्षा के लिए क्या हैं गाइडलाइंस?
Mahakal Temple: उज्जैन महाकाल मंदिर में 26 अगस्त को कांवड़ियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुए विवाद मामले में 30 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. आइए जानते हैं कि यह पूरा विवाद क्या था? इसके अलावा, यह भी जानते हैं, कि मंदिर में दर्शन के क्या नियम है. इसके अलावा, सुरक्षा गाइडलाइन के बारे में भी जानते हैं.
Mahakal Temple VIP Darshan: तारीख 26 अगस्त दिन बुधवार दोपहर तक तो उज्जैन के महाकाल में सब कुछ ठीक चल रहा था. उस दिन लगभग 100 कांवड़िए ओंकारेश्वर के खेड़ीघाट से नर्मदा का जल लेकर महाकाल के दरबार पहुंचे थे, जहां पर उनका मकसद सिर्फ इतना था कि जल चढ़ाना और महाकाल के दर्शन करना था. लेकिन थोड़ी ही देर में मंदिर परिसर में हालात ऐसे बदले कि मारपीट की नौबत आ गई. दरअसल, एंट्री के बाद कुछ कांवड़िए नंदी हॉल की तरफ आगे बढ़े और बैरिकेडिंग को छलांग लगाकर पार करने लगे. इस दौरान सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें तुरंत रोका और समझाने की कोशिश की. लेकिन बात मानने के बजाय विवाद इतना बढ़ गया कि मारपीट शुरू हो गई. इस दौरान सुरक्षाकर्मियों और कांवड़ियों के बीच इस विवाद में लगभग 7 सुरक्षाकर्मी घायल हो गए. इनमें से दो के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं.
मिली जानकारी के मुताबिक, ब्लैक टी-शर्ट पहने कांवड़ियों का एक ग्रुप बैरिकेडिंग को छलांग लगाकर नंदी हॉल की तरफ जाने की कोशिश करने लगा. मंदिर समिति ने बताया कि इस दौरान बैरिकेडिंग तोड़ी गई, व्यवस्था में लगाए गए बैरिकेड्स को नुकसान पहुंचाया. इतना ही नहीं दानपेटियों को भी इधर-उधर किया गया. विवाद गहराने के बाद कुछ लोगों ने सुरक्षाकर्मियों के साथ मारपीट करने लगे. इस घटना में सात सुरक्षाकर्मी घायल हो गए, इनमें अभिषेक, रोहित, सुरेश, विक्रम, जितेंद्र, ममता और निशा शामिल हैं. बताया जा रहा है कि दो की हालत गंभीर बताई जा रही है. सभी घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. मंदिर समिति की शिकायत पर पुलिस ने 30 से 40 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.
किन-किन धाराओं में FIR ?
इस मामले पर महाकाल थाना प्रभारी गगन बादल ने बताया कि, कुछ कांवड़िए जल चढ़ाने और दर्शन करने के दौरान मंदिर परिसर के नंदी कक्ष में जबरन धक्का मुक्की और मारपीट करते हुए अंदर जाने का प्रयास कर रहे थे. इस दौरान गाली-गलौज और सुरक्षाकर्मियों के साथ जमकर मारपीट भी की. उन्होंने बताया कि इंदौर निवासी सचिन मराठा समेत 30-40 लोगों खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. आगे बताया कि इन पर BNS की धाराओं 191(2), 115(2), 296(बी), 351(3), 3(5) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. फिलहाल मामले की जांच की जा रही है.
दर्शन करने के क्या नियम?
महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए दो तरह का कल्चर है, एक तो सामान्य और दूसरा वीआईपी
1. सामान्य दर्शनः इसमें महाकाल मंदिर के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं को किसी भी खास टिकट की जरूरत नहीं पड़ती है. बाबा के दर्शन निर्धारित मार्ग और बैरिकेडिंग के जरिए कराए जाते हैं. इसमें गर्भगृह के अंदर जाकर सीधे पूजा या जल नहीं चढ़ा सकते हैं. हालांकि, इसमें भीड़ और समय के मुताबिक नियम बदल दिए जाते हैं.
2. VIP दर्शनः इस व्यवस्था में भक्तों को नॉर्मल लाइन की बजाय निर्धारित सुविधाओं के तहत जल्दी दर्शन कराए जाते हैं. इसके लिए मंदिर समिति की तरफ से जल्दी दर्शन करने की ऑनलाइन सुविधा दी जाती है. इसे मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in के माध्यम से बुक कर सकते हैं. बेवसाइट पर शीघ्र दर्शन का ऑप्शन चुनकर तारीख और सेवा के अनुसार बुकिंग की जाती है.
कैसे बुक करें?
1. ऑनलाइन बुकिंग के लिए ऑफिशियल वेबसाइट www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in पर जाए
2. होम पेज पर जाकर Mahakal Darshan/Bhasm Aarti Booking पर आपको क्लिक करना होगा.
3. इसके बाद दर्शन या आरती के लिए तारीख सिलेक्ट करें.
4. यहां अपना रजिस्ट्रेशन करें.
5. बुकिंग के बाद आपको मोबाइल पर मैसेज के जरिए रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड दे दिया जाएगा.
6. ध्यान रहे यहां महिलाओं और बच्चों के दर्शन की बुकिंग के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा. साथ ही पति-पत्नी अपने साथ चार बच्चे ले जा सकते हैं.
क्या हर श्रद्धालु गर्भगृह में जा सकता है?
1. हर समय प्रवेश की अनुमति नहीं
2. समय और व्यवस्था के अनुसार प्रवेश
3. भीड़, सावन, सोमवार व विशेष अवसरों पर प्रतिबंध
4. सामान्य दर्शन निर्धारित स्थान से
5. जबरन प्रवेश की अनुमति नहीं
भस्म आरती का ड्रेस कोड
पुरुष: धोती + अंगवस्त्र
महिला: पारंपरिक साड़ी
मंदिर में सुरक्षा के इंतजाम
बता दें कि महाकाल मंदिर में भक्तों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक तरीके से निगरानी रखी जाती है. इसके लिए मंदर परिसर, महाकाल लोक और मंदिर के आसपास के रास्तों पर लगभग 500 से ज्यादा AI सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो लोगों की पहचान, गाड़ी नंबर और भीड़ पर नजर रखते हैं. इसके लिए एक कंट्रोल रूम भी बनाया गया है. इसका नाम फीड इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) है. मंदिर परिसर के अंदर बैरिकेडिंग की सुविधा भी की गई है. अगर मंदिर में कभी भारी भीड़ होती है, तो ड्रोन, जिगजैग बैरिकेडिंग और सुरक्षाबलों की तैनाती की जाती है.
मंदिर में क्यों होते हैं विवाद?
अक्सर आपने देखा होगा कि बड़े मंदिरों में विवाद की शुरुआत अक्सर किसी एक बड़ी घटना से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी बातों से हो जाती है. श्रद्धालुओं का कहना होता है कि वे घंटों लाइन में खड़े रहते हैं. ऐसे में जब सुरक्षाकर्मी बुरा व्यवहार करने लगते हैं या फिर सख्ती से बात करते हैं तो नाराजगी बढ़ जाती है. दूसरी तरफ सुरक्षाकर्मियों के सामने भी हजारों श्रद्धालुओं को संभालने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की चुनौती होती है. कई बार ऐसा होता है कि लोग नियम तोड़कर नो एंट्री जोन में जाने लगते हैं. ऐसी स्थिति में सुरक्षाकर्मी सख्ती दिखाते हैं, तो माहौल गर्म हो जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह होता है कि संवाद की कमी और सुरक्षाकर्मियों की सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग का अभाव रहता है.
क्या-क्या हो सकते हैं समाधान?
मंदिरों में बढ़ती भीड़ और उससे जुड़े विवादों को रोकने के लिए सिर्फ सुरक्षा बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा. सबसे पहले सुरक्षाकर्मियों और बाउंसरों को धार्मिक स्थलों के माहौल के हिसाब से सॉफ्ट स्किल और इमोशनल इंटेलिजेंस की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए, ताकि नियम लागू करते समय भाषा और व्यवहार संयमित रहे. दूसरी तरफ भीड़ को नियंत्रित करने के लिए डिजिटल स्लॉट और टाइम-बेस्ड दर्शन व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है, जिससे श्रद्धालुओं को घंटों कतार में खड़े रहने की परेशानी कम हो. साथ ही मंदिर परिसर में शिकायत निवारण के लिए हेल्प डेस्क या नोडल अधिकारी हो, जहां श्रद्धालु तुरंत अपनी शिकायत दर्ज करा सकें. इससे छोटी नाराजगी के बड़े विवाद में बदलने की संभावना कम होगी.