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कैमोर में जमीन के नीचे दबा है 10 लाख टन एस्बेस्टस कचरा? उमंग सिंघार ने जताई लोगों की सेहत पर चिंता

कटनी जिले के कैमोर में जहरीले कचरे को लेकर उमंग सिंघार ने स्थानीय लोगों से मुलाकात की. इस दौरान स्थानीय लोगों ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं. वहीं उन्होंने जिम्मेदारों से जवाब और कार्रवाई की मांग की है.

Written By Manish Kushawah
Published: Oct 09, 2026, 07:51 PM IST | Updated: Oct 09, 2026, 07:55 PM IST
Image Credit: ZEE NEWS
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कटनी जिले के कैमोर में खतरनाक और जहरीला कचरा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है. मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार कैमोर पहुंचे, जहां पर उन्होंने जहरीले एस्बेस्टस कचरे से प्रभावित होने का दावा कर रहे लोगों से मुलाकात की. इस दौरान स्थानीय लोगों ने उमंग सिंघार को बताया कि एवरेस्ट कंपनी के जहरीले फाइबर कचरे को खेल मैदान में फेंके जाने से इलाके के कई लोग बीमार हो गए हैं. जबकि कुछ लोगों की मौत भी हो चुकी है. इस मामले को लेकर लोगों ने जिम्मेदारों से जवाब और कार्रवाई की मांग उठाई है.

इसको लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली थी कि कैमोर में दशकों पुराने एस्बेस्टस कचरे और उसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर जांच की गई है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कैमोर में करीब 10 लाख टन एस्बेस्टस-दूषित कचरा आज भी अलग-अलग इलाकों में मौजूद है. वहीं, स्थानीय स्तर पर हजारों लोगों के एस्बेस्टस से जुड़ी बीमारियों से प्रभावित होने की बात सामने आई है.

उमंग सिघार से की मुलाकात
वहीं, लंदन से आए मुखर्जी से भी उमंग सिंघार ने मुलाकात की और बातचीत की. उन्होंने बताया कि मुखर्जी से मिली जानकारी के मुताबिक, फैक्ट्री के करीब 700 मजदूरों और उनके परिवारों के करीब 800 लोगों का चेकअप कराया गया, जिसमें सभी के कैंसर से पीड़ित होने की बात सामने आई है. उन्हें मुआवजा भी मिला है.

सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल
उमंग सिंघार ने आगे कहा कि ब्रिटेन की पूर्व औद्योगिक कंपनी टर्नर एंड न्यूऑल से जुड़े कैमोर के एस्बेस्टस कचरे की कहानी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में है. ब्रिटेन से मीडिया टीम कैमोर पहुंची है. शहर के उन इलाकों का जायजा लिया, जहां एस्बेस्टस से दूषित मिट्टी, धूल और मलबा मौजूद होने का दावा किया गया है. मिली जानकारी के मुताबिक, कैमोर के खेल मैदानों, आवासीय इलाकों और खुली जमीन पर एस्बेस्टस के टुकड़े आज भी दिखाई देते हैं. जांच के दौरान टीम ने संभावित खतरे को देखते हुए श्वसन सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल किया.

रिपोर्ट में क्या दावा किया
विदेशी मीडिया की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कैमोर में 5 हजार से ज्यादा लोग एस्बेस्टस से जुड़ी बीमारियों से प्रभावित हुए हैं. वहीं, पिछले साल आयोजित मेडिकल कैंप में करीब 1200 और लोगों में एस्बेस्टस से संबंधित बीमारी के लक्षण सामने आने की बात कही गई है. विशेषज्ञ डॉक्टर का कहना है कि कैमोर में एस्बेस्टस के संपर्क का असर बेहद गंभीर है. सांस की बीमारी, इलाज का भारी खर्च और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा यहां के लोगों के सामने है. रिपोर्ट में कैमोर के 40 वर्षीय सोमेश की कहानी भी सामने आई है. परिवार का दावा है कि बचपन में खेल मैदान में एस्बेस्टस के संपर्क में आने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी. उन्हें गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा.

परिवार ने क्या बताया?
वहीं परिवार का कहना है कि आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे कैमोर छोड़कर कहीं और जा सकें. जांच के दौरान पूर्व फैक्ट्री कर्मचारियों के परिवारों से भी बात की गई. आरोप है कि काम के दौरान कर्मचारियों को एस्बेस्टस के खतरे से बचाव के पर्याप्त साधन और जानकारी नहीं दी गई. विदेशी मीडिया ने 1970 के दशक के कंपनी के कुछ आंतरिक दस्तावेज भी सामने रखे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इन दस्तावेजों में कंपनी के एक डॉक्टर ने भारतीय श्रमिकों को एस्बेस्टस के खतरों से बेहतर तरीके से बचाने और उन्हें जोखिम के बारे में जानकारी देने की जरूरत बताई थी.

कचरे की समस्या आज भी
टर्नर एंड न्यूऑल का बाद में पतन हुआ, लेकिन कैमोर में छोड़े गए एस्बेस्टस कचरे की समस्या आज भी बनी हुई है. रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया है कि इस पुराने औद्योगिक कचरे को हटाने और प्रभावित लोगों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है. रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों ने कैमोर को सुरक्षित बनाने की लागत 100 मिलियन पाउंड से अधिक होने का अनुमान जताया है. वहीं, कॉरपोरेट जवाबदेही और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर ब्रिटेन में भी कानून और जिम्मेदारी पर बहस जारी है.

कौन कर रहा था कारोबार
बताया जा रहा है कि एस्बेस्टस से जुड़ा यह कारोबार बाद में दूसरी कंपनियों के हाथों में गया. अब इससे जुड़ी औद्योगिक संपत्ति सोमानी ग्रुप के पास होने की बात कही जा रही है. हालांकि, कैमोर में मौजूद पुराने कचरे की जिम्मेदारी और उसके निस्तारण को लेकर स्थिति अब भी सवालों के घेरे में है. वहीं, 8 अक्टूबर को बैरिस्टर और डॉक्टरों की टीम के कैमोर पहुंचने की बात सामने आई है. माना जा रहा है कि टीम स्थानीय लोगों से मुलाकात कर एस्बेस्टस के स्वास्थ्य और कानूनी पहलुओं को समझेगी. कैमोर की एस्बेस्टस समस्या अब सिर्फ स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई है. ब्रिटेन से आई जांच के बाद यह मामला एक बार फिर पर्यावरण, स्वास्थ्य, मुआवजे और कॉरपोरेट जवाबदेही के बड़े सवाल खड़े कर रहा है.

मटेरियल दबाने के निर्देश
इस मामले में कटनी कलेक्टर का कहना है कि कैमोर इलाके में पहले जिस स्थान पर फैक्ट्री थी, वहां का वेस्ट मटेरियल खेल मैदान में फेंका गया था, जिसे पहले ही मिट्टी में दबा दिया गया था. यदि इस मामले में दोबारा ऐसी कोई शिकायत आती है, तो वे इलाके का निरीक्षण करेंगे. साथ ही संबंधित विभाग को उस मटेरियल को दबाने के निर्देश देंगे. उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति इससे बीमार हो रहा है, तो शिकायत मिलने के बाद लोगों का मेडिकल परीक्षण जरूर कराया जाएगा.  उनका इलाज कराया जाएगा. (रिपोर्टः नितिन चावरे, कटनी)
 

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मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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