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33 साल का इंतजार...न जमीन मिली, न घर बना पाए, इंदौर में हजारों परिवार परेशान, क्या है IDA की योजना 171?

IDA Scheme 171: इंदौर की IDA योजना 171 में अपना घर बनाने का सपना देख रहे हजारों परिवार अनुमति की इंतजार कर रहे हैं. 33 साल बीत जाने के बाद भी अभी तक इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया है. ग्राउंड जीरो पर जब ZEE न्यूज की टीम पहुंची, तो पीड़ितों ने अपना दर्द बयां किया.

Written By Manish Kushawah
Published: Aug 30, 2026, 07:40 AM IST | Updated: Aug 30, 2026, 07:43 AM IST
Image Credit: इंदौर में हजारों परिवार परेशान
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Indore IDA Scheme: इंदौर विकास प्राधिकरण की 171 एक ऐसी योजना है, जिसने सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों लोगों की जिंदगी पर लगभग 30 साल के लिए ब्रेक लगा दिया है. पुष्प विहार और अलग-अलग नामों से स्थित इस इलाके में जमीन का मामला साल 1993 से चला आ रहा है और 2026 में भी इसकी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है. बताया गया कि 13 सहकारी संस्थाओं से जुड़े 6 हजार से ज्यादा भूखंड धारक आज भी अपनी जमीन पर निर्माण की अनुमति और स्पष्ट स्थिति का इंतजार कर रहे हैं. पीड़ितों का कहना है कि उनकी जवानी निकल गई, बुढ़ापा आ गया, लेकिन जमीन पर घर बनाने का सपना आज भी अधूरा है.

इंदौर में विकास की रफ्तार के बीच एक ऐसा मामला भी है, जहां जमीन के मालिक अपनी ही जमीन पर निर्माण करने के अधिकार के लिए वर्षों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं. मामला इंदौर विकास प्राधिकरण यानी आईडीए की योजना क्रमांक 171 का है. पीड़ितों ने बताया कि वर्ष 1993 से वर्ष 2009 तक इस क्षेत्र में योजना क्रमांक 132 प्रभावी रही. लेकिन निर्धारित समय सीमा में विकास कार्य नहीं होने के चलते योजना क्रमांक 132 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा निरस्त कर दिया गया. इसके बाद वर्ष 2009 से इसी क्षेत्र में नई योजना 171 लागू कर दी गई. पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि 33 साल के इस लंबे अंतराल में न तो उनकी जमीन का अधिग्रहण किया गया और न ही जमीन को योजना से मुक्त किया गया. यानी जमीन मालिक अपनी जमीन के मालिक तो हैं, लेकिन उस पर निर्माण को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है.

सालों बाद भी समाधान नहीं
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल उन हजारों परिवारों का है, जिनका जीवन इस इंतजार में गुजर गया. 13 सहकारी संस्थाओं से जुड़े करीब 6 हजार से अधिक भूखंड और 200 से ज्यादा व्यक्तिगत भू-स्वामी इस समस्या से प्रभावित बताए जा रहे हैं. पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाए. निर्माण की अनुमति के लिए आवेदन दिए और अपनी समस्या को लेकर अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन वर्षों गुजरने के बाद भी कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया. कई ऐसे भूखंड धारक और जमीन मालिक भी हैं, जो न्याय और अपनी जमीन पर निर्माण की उम्मीद लगाए दुनिया से चले गए, लेकिन उनकी जमीन पर उनका घर बनाने का सपना पूरा नहीं हो सका.

ग्राउंड जीरो पर जी मीडिया
ZEE मीडिया की टीम जब ग्राउंड जीरो पर पहुंची और आईडीए की योजना 171 से प्रभावित लोगों से बातचीत की, तो उनके दर्द में सिर्फ नाराजगी नहीं, बल्कि 33 साल का इंतजार साफ नजर आया. पीड़ितों का कहना है कि जब यह मामला शुरू हुआ था, तब वे जवान थे. आज उनकी उम्र का बड़ा हिस्सा गुजर चुका है. किसी ने बच्चों के लिए घर बनाने का सपना देखा था, तो किसी ने अपने बुढ़ापे का सहारा इसी जमीन को माना था. लेकिन साल दर साल बीतते गए और निर्माण की अनुमति का इंतजार खत्म नहीं हुआ. पीड़ितों का कहना है कि मामला अब सिर्फ जमीन का नहीं है, बल्कि उनके जीवन का वह अमूल्य समय भी है, जो सरकारी प्रक्रिया और लगातार इंतजार में निकल गया.

पीड़ितों ने सुनाई हकीकत
वहीं ZEE Media की टीम को एक युवती ने बताया कि उनके पिता ने कई साल पहले प्लॉट लिया था, लेकिन उनका निधन हो गया. इसके बावजूद उन्हें आज तक उस प्लॉट पर घर बनाने का मौका नहीं मिल पाया. इसी बीच, बीते कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव भी इंदौर पहुंचे थे. पीड़ितों का कहना है कि एक कार्यक्रम के दौरान मंच से स्कीम में शामिल जमीनों को लेकर भी विचार किए जाने की बात कही गई थी. ऐसे में प्रभावित लोगों को उम्मीद जगी थी कि शायद अब 33 साल पुरानी समस्या का समाधान होगा. लेकिन पीड़ितों ने यह भी बताया कि घोषणा और उम्मीद के बावजूद जमीनी स्तर पर अभी तक कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दिया है.

कब होगा इसका समाधान?
आगे यह भी पता चला कि बीते कुछ समय पहले इन्हीं जमीन मालिकों की तरफ से तख्तियां लेकर प्रदर्शन भी किया गया था. वहीं कॉलोनियों की जगह बड़े-बड़े होर्डिंग और पोस्टर भी लगाए गए हैं. इनके जरिए जमीन मालिक अपनी समस्या की तरफ प्रशासन और सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन अब कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं. क्या 33 सील से लंबित इस मामले का कोई ठोस समाधान निकलेगा या नहीं? क्या योजना 171 से प्रभावित भूखंड धारकं और जमीन मालिकों को अपनी जमीन पर निर्माण की अनुमति मिल पाएगी? क्या जमीनों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर उन्हें योजना से मुक्त करने या किसी अन्य वैधानिक समाधान की दिशा में कदम उठाया जाएगा? इसके अलावा इन परिवारों का 33 साल पुराना इंतजार कब खत्म होगा?

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About the Author

मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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