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ग्वालियर ओवरलोडिंग केसः 14 साल बाद भी नहीं लगी लगाम, बच्चों की सुरक्षा पर HC सख्त; RTO-SP तलब

ग्वालियर में एक बार फिर से 2012 के मामले पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. जहां कोर्ट ने RTO और पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति को स्पष्ट करने के निर्देश दिए.

Written By Manish Kushawah
Published: Oct 17, 2026, 03:46 PM IST | Updated: Oct 17, 2026, 03:56 PM IST
Image Credit: ZEE NEWS
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मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में स्कूली बच्चों को क्षमता से अधिक बैठाकर ले जाने के मामले में हाईकोर्ट ने एक बार फिर से कड़ी नाराजगी जताई है. 14 साल बाद भी स्कूली वाहनों में ओवरलोडिंग की समस्या खत्म नहीं होने पर कोर्ट ने RTO और पुलिस अधीक्षक को तलब किया है. कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति को स्पष्ट करें. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूर्व आदेशों के पालन पर भी सवाल उठाए हैं.

दरअसल, यह मामला अधिवक्ता अवदेश सिंह भदौरिया की ओर से साल 2012 में दायर जनहित याचिका से जुड़ा बताया जा रहा है. याचिका में आरोप लगाया गया था कि स्कूली बच्चों को ऑटो और अन्य वाहनों में तय क्षमता से कई गुना ज्यादा संख्या में बैठाकर ले जाया जाता है. इससे बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है. याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 12 दिसंबर 2013 को स्कूली वाहनों में ओवरलोडिंग रोकने के निर्देश दिए थे.

हाईकोर्ट ने क्या कहा था
कोर्ट ने भी स्पष्ट किया था कि वाहनों की क्षमता बढ़ाने के लिए लकड़ी की पट्टियां नहीं लगाई जाएं. साथ ही, अगर कोई वाहन ओवरलोडिंग करते पाया जाता है, तो उस वाहन के ड्राइवर का लाइसेंस तत्काल निरस्त कर दिया जाए. हाईकोर्ट ने इस समस्या की निगरानी के लिए जिले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेटों को निरीक्षण करने और हर दो महीने में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में पेश करने के भी निर्देश दिए थे.

फिर से ओवरलोडिंग हुई
याचिकाकर्ता ने बताया कि कुछ दिनों तक कोर्ट के आदेशों का पालन हुआ, लेकिन बाद में स्कूली वाहनों में फिर से ओवरलोडिंग शुरू हो गई. इसके बाद साल 2026 में अवमानना याचिका दायर की गई. 7 सितंबर 2017 को हाईकोर्ट ने पहले से बड़ा आदेश जारी किया. मौजूद मामले में RTO की तरफ से पालन प्रतिवेदन पेश किया गया. लेकिन कोर्ट ने रिपोर्ट में पहले आदेशों को प्रभावी रूप से पालन होता दिखाई नहीं देने पर असंतोष जताया.

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4 नवंबर को बुलाया गया
बता दें कि याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अवधेश भदौरिया ने दलील दी कि रिपोर्ट में कार्रवाई का उल्लेख तो है, लेकिन ओवरलोडिंग करने वाले वाहनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई. इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए ग्वालियर के RTO और पुलिस अधीक्षक को 4 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति को स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं. अब इस मामले में अगली सुनवाई पर यह देखना होगा कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं. (रिपोर्टः करतार सिंह राजपूत, ग्वालियर)

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मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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