Explainer: भोपाल, खरगोन, दमोह, सतना, खंडवा... किसानों की लड़ाई सड़क तक आई, क्यों अन्नदाता MP में कर रहे आंदोलन?
मध्य प्रदेश में भोपाल, खरगोन समेत कई जिलों में किसान अलग-अलग मांगों को लेकर सड़क पर उतर गए हैं. कहीं बारिश और कीट प्रकोप से बर्बाद फसल का बीमा और मुआवजा नहीं मिलने की शिकायत है, तो कहीं जमीन अधिग्रहण, MSP, बिजली, खाद और सिंचाई से जुड़े मुद्दे हैं. आखिर क्या हैं किसानों की प्रमुख मांगें और क्यों बढ़ रहा है आंदोलन?
मध्य प्रदेश में एक बार फिर किसान अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर हैं. राजधानी भोपाल से लेकर खरगोन, दमोह, सतना, खंडवा तक किसान के प्रदर्शन कर रहे हैं. खास बात यह है कि हर जिले में आंदोलन का मुद्दा एक जैसा नहीं है. कही फसल का मुआवजा और बीमा राशि अटकी है, तो कही सिंचाई का पानी, जमीन अधिग्रहण के मुआवजे और फसल खरीदी से जुड़ी शिकायतें हैं. यानी अलग-अलग जिलों में किसान अलग समस्याओं के साथ सरकार के सामने अपनी आवाज उठा रहे हैं.
200 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ भोपाल पहुंचे किसान
भारी बारिश और इल्लियों के हमले से फसल बर्बाद होने के बाद भोपाल के नजीराबाद, बैरसिया और हुजूर इलाकों के सैकड़ों किसान भारतीय किसान संघ के बैनर तले 200 से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ शहर पहुंचे. किसानों ने रात इटकहेड़ी में बिताई और बुधवार को कलेक्ट्रेट का घेराव की रणनीति बनाई. इसके बाद उन्होंने उसी रात इटकहेड़ी में डेरा डाल दिया. किसानों के विरोध-प्रदर्शन के कारण कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर बैरिकेड लगा दिए गए थे. किसान रात 10:30 बजे तक अपनी बात पर अड़े रहे, जिसके बाद ADM प्रकाश नायक ने उनकी कलेक्टर प्रियंका मिश्रा से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत करवाई. किसानों और कलेक्टर के बीच लगभग पांच मिनट तक वीडियो कॉल पर बातचीत हुई. कॉल के दौरान कलेक्टर मिश्रा ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई की जाएगी. कलेक्टर के आश्वासन के बाद, किसान सहमत हो गए और उन्होंने कलेक्ट्रेट का घेराव करने की अपनी योजना टाल दी.किसानों ने बताया कि खराब मौसम और इल्लियों के हमले की वजह से सोयाबीन और उड़द जैसी खरीफ फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं, फिर भी उन्हें 2024-25 सीजन के लिए फसल बीमा का पैसा नहीं मिला है.
खरगोन में 500 ट्रैक्टरों के साथ किसानों ने लगाया जाम
खरगोन के भीकनगांव इलाके के किसानों ने भारतीय किसान संघ के बैनर तले अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. ग्रामीण इलाकों के किसान 500 से ज्यादा ट्रैक्टरों के साथ भीकनगांव तहसील मुख्यालय पहुंचे. तांत्या मामा भवन से शुरू हुआ जुलूस शहर की मुख्य सड़कों से होता हुआ कृषि उपज मंडी परिसर पहुंचा, जहां एक जनसभा हुई. प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि देशगांव-जुलवानिया फोरलेन हाईवे बनाने के लिए उनकी उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है. अभी सरकार और प्रशासन सिर्फ दोगुनी दर से मुआवजा दे रहे हैं. किसानों की मां है कि उन्हें चार गुना मुआवजे से क्यों वंचित किया जा रहा है, जो दूसरी जगहों पर दिया जा रहा है. किसानों ने बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा देने की मांग की है.
इंदौर में अहिल्यापथ के विरोध में किसान
भारतीय किसान एंव मजदूर सेना और अहिल्यापथ संघर्ष समिति ने इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी (IDA) के दफ्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वे अहिल्यापथ योजना का विरोध कर रहे हैं और किसानों की खेती की जमीन पर लगी पाबंदियों को हटाने की मांग कर रहे हैं. किसान नेताओं का कहा है कि इस योजना की वजह से किसानों की खेती की जमीन की खरीद-बिक्री और विकास कार्यों पर रोक लग गई है. इस स्थिति से बड़ी संख्या में किसान प्रभावित हो रहे हैं. किसान मांग कर रहे हैं कि खेती की जमीन के डायवर्जन पर लगी रोक को तुरंत हटाया जाए और विकास कार्यों के लिए मंजूरी दी जाए. इसके अलावा किसान अहिल्यापथ योजना को रद्द करने और जमीन के लेन-देन पर लगी पाबंदियों को हटाने की भी मांग कर रहे हैं.
सतना में 16 सूत्रीय मांगों को लेकर ट्रैक्टर रैली
भारतीय किसान संघ ने सतना में अपनी 16 सूत्रीय मांगों को लेकर एक ट्रैक्टर रैली निकाली. राज्य अध्यक्ष कमल सिंह अंजाना की अगुवाई में किसान लगभग 200 ट्रैक्टरों के साथ कृषि उपज मंडी से निकले. यह रैली बिरला रोड, सेमरिया चौक और सर्किट हाउस चौक से होते हुए सिविल लाइन चौपाटी पर समाप्त हुई. इसके बाद, किसानों ने अपनी 16 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सिटी SDM राहुल सिलादिया को सौंपा, जो जिला कलेक्टर के नाम था. किसान संघ ने धान की खरीद के लिए भावान्तर योजना लागू करने का विरोध किया. संघ ने मांग की कि खरीद केंद्रों पर धान की खरीद पहले की तरह न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर ही जारी रखी जाए. किसानों का तर्क है कि भावान्तर योजना लागू होने से उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा. साथ ही किसानों ने गांवों में कम वोल्टेज, बार-बार बिजली लाइन में खराबी और ट्रांसफार्मर जलने की समस्याओं को उठाया. उन्होंने खराब ट्रांसफार्मर को तुरंत बदलने और पुरानी 25 kVA ट्रांसफार्मर योजना को फिर से शुरू करने की मांग की. इसके अलावा, ज्ञापन में खाद की पर्याप्त उपलब्धता, किसान क्रेडिट सुविधाएं और छोटे किसानों के लिए आर्थिक सहायता की मांगें भी शामिल थीं.
खंडवा में किसानों ने कुत्ते को सौंपा ज्ञापना
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान खंडवा में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे. वे स्थानीय मुद्दों और नीति से जुड़ी शिकायतों पर चर्चा करने के लिए कलेक्टर से व्यक्तिगत रूप से मिलना चाहते थे और उन्होंने अपना ज्ञापन केवल कलेक्टर को ही सौंपने पर जोर दिया. परिसर में लंबे समय तक इंतजार करने के बाद भी जब कलेक्टर नहीं आए, तो किसानों का गुस्सा फूट पड़ा. इसके बाद उन्होंने किसी अन्य प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपने से साफ इनकार कर दिया. जब बात नहीं बनी, तो किसानों ने अपना विरोध जताने का एक अनोखा तरीका निकाला. सिटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में उन्होंने अपना ज्ञापन वहां मौजूद एक कुत्ते को सौंप दिया. किसानों का कहना है कि गांव पानी में डूबे हुए हैं, जिससे लगभग 50 से 60 परिवारों के लोगों को नाव से आना-जाना पड़ रहा है. ग्रामीण लंबे समय से पुल बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक पुल नहीं बना है. अगर पानी का स्तर काफी बढ़ जाता है, तो ग्रामीणों का जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो जाएगा. इसके साथ ही, इंदिरा सागर बांध से प्रभावित और विस्थापित लोगों के लिए न्याय की मांग भी उठाई गई. किसानों का कहना है कि खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर और बड़वानी जिलों में इंदिरा सागर बांध से प्रभावित लोगों को उतना मुआवजा नहीं दिया जा रहा है, जितना सरदार सरोवर बांध के मामले में दिया गया था. राज्य सरकार एक ही राज्य के भीतर मुआवजा बांटने में दोहरा रवैया अपना रही है.