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मध्य प्रदेश फर्जीवाड़ा का गढ़ बन गया है. इंदौर से शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां फर्जी डी.एड. (D.Ed) और बी.एड. (B.Ed) की मार्कशीट के आधार पर लगभग 20 सालों से सरकारी स्कूलों में बच्चों का भविष्य गढ़ रहे शिक्षकों की पोल खुल गई है. मामले की जांच के बाद जिला शिक्षा विभाग ने सांवेर विकासखंड के 51 ऐसे फर्जी शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने के निर्देश दिए हैं, जो सालों से विभाग को चूना लगा रहे थे और 20 साल में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का वेतन भी ले चुके हैं.
एमपी में सरकारी नौकरी में सत्यापन की नाकामी का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि फर्जी डिग्री पर नौकरी करने वाले तकरीबन 74 शिक्षक पकड़े गए है. इन शिक्षकों की वर्तमान मासिक सैलरी 50 हजार से 1 लाख रुपए तक है. इनमें कई प्रमोशन भी पा चुके हैं.
विभाग नौकरी के दौरान टीचर्स को मिले वेतन की गणना कर रहा है. अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, वसूली की राशि करीब 100 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है. मामला सांवेर में 2006-07 की संविदा शाला शिक्षक भर्ती का है, जांच में 51 शिक्षकों की डिग्री-अंकसूची फर्जी पाई गई है, जबकि 23 अन्य संदिग्ध शिक्षकों की जांच जारी है. लोकायुक्त ने 74 शिक्षकों का रिकॉर्ड मांगा है.
इंदौर DEO शौर्य मल्होत्रा के मुताबिक, सांवेर विकासखंड के सरकारी स्कूलों में फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी करने वाले शिक्षकों की शिकायत 2021 में हुई थी. इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने नियुक्ति के समय प्रस्तुत D.Ed और B.Ed की अंकसूचियों का सत्यापन कराया. माध्यमिक शिक्षा मंडल से सत्यापन की जानकारी जून 2022 से अप्रैल 2023 के बीच विभाग को मिली. इसके बाद चार प्राचार्यों की समिति गठित की गई. समिति ने मई 2024 में रिपोर्ट सौंपी. समिति की रिपोर्ट में सामने आया कि संविदा शाला शिक्षक परीक्षा में प्रस्तुत कई अंकसूचियां माध्यमिक शिक्षा मंडल ने जारी नहीं की थीं. कुछ मामलों में एक ही रोल नंबर पर दूसरे परीक्षार्थी की अंकसूची मिली.
समिति की रिपोर्ट के बाद सितंबर 2024 में संबंधित संकुल प्राचार्यों को शिक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे. इसके बावजूद FIR दर्ज नहीं हुई. इस दौरान जांच में जिन शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध या फर्जी पाए गए, वे सरकारी सेवा में बने रहे और वेतन लेते रहे. तत्कालीन अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कार्रवाई नहीं की गई. जिला शिक्षा अधिकारी शौर्य मल्होत्रा ने संकुल प्राचार्यों और BEO को 51 शिक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं. विभाग प्रत्येक शिक्षक की सेवा अवधि और इस दौरान मिले वेतन की गणना कर रहा है. इसी आधार पर नौकरी के दौरान मिले वेतन की वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. फिलहाल अधिकारियों के अनुमान के अनुसार यह राशि करीब 100 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है.