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इंदौर के एक 24 साल पुराने चर्चित केस में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. स्पेशल कोर्ट ने PHE विभाग के तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर कैलाशचंद्र परवाल को आय से ज्यादा संपत्ति के मामले में दोषी पाया है. कोर्ट ने उन्हें 5 साल की जेल और 25 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है. इस फैसले की सबसे बड़ी बात इसकी तारीख है. लोकायुक्त ने इस इंजीनियर के खिलाफ 8 सितंबर 2002 को केस दर्ज किया था और ठीक 24 साल बाद उसी तारीख यानी 8 सितंबर को कोर्ट ने उसे सजा सुनाई.
₹50,000 की रिश्वत लेते पकड़ा गया था
मामले की शुरुआत 6 सितंबर 2002 को हुई थी, जब लोकायुक्त पुलिस ने शैलेंद्र जोशी की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए तत्कालीन कार्यपालन इंजीनियर कैलाश चंद्र को ₹50,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था. इस कार्रवाई के बाद लोकायुक्त ने आरोपी के इंदौर, खरगोन और देवास स्थित घरों के साथ-साथ उसके बैंक खातों और इंश्योरेंस पॉलिसी की भी जांच की, जिसमें आय से अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ.
8 सितंबर 2002 को दर्ज हुआ था केस
इस मामले की सबसे खास बात तारीख को लेकर है. इस इंजीनियर पर आय से ज्यादा संपत्ति का केस 8 सितंबर 2002 को दर्ज हुआ था. और ठीक 24 साल बाद उसी तारीख यानी 8 सितंबर को अदालत ने उसे सजा सुनाई. जांच में 1 अगस्त 1981 से 8 सितंबर 2002 तक की कमाई और खर्च देखा गया. जांच में पता चला कि इन 21 सालों में इंजीनियर की कुल कमाई 34 लाख 64 हजार रुपये थी, जबकि उसने 1 करोड़ 8 लाख 70 हजार रुपये खर्च कर दिए. मतलब उसकी कमाई से 74 लाख 5 हजार रुपये ज्यादा की संपत्ति मिली, जिसका वो हिसाब नहीं दे पाया.
अब जानिए पूरा मामला
एसपी डॉ. राजेश सहाय ने बताया कि, इस मामले की शुरुआत 6 सितंबर 2002 को हुई थी. शैलेन्द्र जोशी नाम के एक शख्स ने शिकायत की थी कि कार्यपालन यंत्री कैलाशचंद्र परवाल 50 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहे हैं. शिकायत मिलते ही लोकायुक्त की टीम ने जाल बिछाया और इंजीनियर को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया. इसके बाद जब उसकी संपत्ति की जांच शुरू हुई तो कई बड़े खुलासे हुए. टीम ने इंदौर, खरगोन और देवास में उसके घरों की तलाशी ली. बैंक खाते, बीमा पॉलिसी और बाकी निवेश के कागज देखे गए तो पता चला कि उसके पास आय से अधिक संपत्ति है.