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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 2020 में कमलनाथ सरकार गिरने की असली वजह बताई है. उन्होंने कहा कि सरकार किसी बाहरी दबाव की वजह से नहीं, बल्कि कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच अहंकार की लड़ाई (ईगो क्लैश) के कारण गिरी थी. दिग्विजय के मुताबिक, सिंधिया शुरू में खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते थे. बाद में उन्होंने मांग की कि तुलसी सिलावट को पीसीसी चीफ और गोविंद राजपूत को उपमुख्यमंत्री बनाया जाए, लेकिन कमलनाथ ने इन मांगों को ठुकरा दिया. सरकारी बंगले को अपने पास रखने और ग्वालियर में तबादलों को लेकर हुए विवादों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया, जिसके चलते आखिरकार सरकार गिर गई.
सिंधिया खुद बनना चाहते थे सीएम- दिग्विजय सिंह
दरअसल, उज्जैन से अयोध्या तक निकाली जा रही 'शिवधाम से रामधाम सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने दैनिक भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि, 2018 में 114 विधायकों में से 90 से ज्यादा ने कमलनाथ का समर्थन किया था, जबकि 20-22 विधायक ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ थे. सिंधिया मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, लेकिन उनके पास जरूरी संख्याबल नहीं था. कमलनाथ ने उन्हें PCC अध्यक्ष का पद देने की पेशकश की, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया. इसके बाद दोनों नेताओं के बीच तनाव बढ़ता गया.
बंगले को लेकर विवाद
दिग्विजय सिंह ने बताया कि लोकसभा चुनाव हारने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश कोटे से लुटियंस दिल्ली में 23 सफदरजंग रोड स्थित अपना सरकारी बंगला अपने पास ही रखना चाहते थे. कमलनाथ इसके लिए तैयार नहीं थे. इस विवाद को सुलझाने के लिए मैंने एक डिनर रखा. ये डिनर शोभना भरतिया के घर पर था, जिसमें सुनील मित्तल भी मौजूद थे. इस दौरान कमलनाथ और सिंधिया के बीच तीखी नोकझोंक हुई. कमलनाथ जी ने सिंधिया से कहा, "व्हाट डू यू थिंक ऑफ योरसेल्फ ज्योतिरादित्य? आई एम द चीफ मिनिस्टर!" जब मैंने मामला शांत कराने की कोशिश की तो कमलनाथ ने मुझे भी चुप करा दिया.
ईगो की वजह से गिरी सरकार
दिग्विजय सिंह ने कहा कि ग्वालियर संभाग में तबादलों को लेकर उन्होंने और ज्योतिरादित्य ने मिलकर एक सहमति वाली लिस्ट तैयार की थी, उस पर साइन किए थे और उसे कमलनाथ को सौंपा था. लेकिन डेढ़ महीने तक कोई आदेश जारी नहीं हुआ. जब उन्होंने कमलनाथ से इस बारे में पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया, "दिग्विजय, क्या मैं बेवकूफ हूं? अगर तुम दोनों एक हो जाओगे, तो मेरी क्या स्थिति रह जाएगी?" बस इसी आपसी ईगो की वजह से सरकार गिर गई.
सिंधिया की कांग्रेस में वापसी पर दो टूक
इस बीच, ज्योतिरादित्य सिंधिया की कांग्रेस में वापसी की संभावना पर बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने साफ किया कि हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. राहुल गांधी पक्के उसूलों वाले व्यक्ति हैं और वे अतीत की तरह अब राजनीतिक समझौतों या जोड़-तोड़ में विश्वास नहीं रखते.