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अनूठी मान्यता: दिवाली पर होता है किन्नरों का इंतजार, दुकानों पर ढोलक की थाप से बढ़ती है बरकत, 'दुआ का सिक्का' क्यों खास?

मध्य प्रदेश के दमोह में दिवाली के दो दिन पहले से देवउठनी एकादशी तक लोग किन्नरों का इंतजार करते हैं. लोग आज भी सालों पुरानी मान्यता निभा रहे हैं.

Written By Sumit Rai
Published: Nov 07, 2026, 05:18 PM IST | Updated: Nov 07, 2026, 05:22 PM IST
Image Credit: किन्नरों का आगमन दिन-दूनी रात-चौगुनी बरकत लेकर आता है.
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दिवाली के पावन मौके पर जहां लोग मां लक्ष्मी की आराधना कर धन-धान्य की कामना करते हैं, वहीं मध्य प्रदेश के दमोह जिले में एक ऐसी अनूठी परंपरा निभाई जाती है, जो समाज में आपसी प्रेम और सद्भाव की एक बेहतरीन मिसाल पेश करती है. आमतौर पर किन्नरों का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में कुछ अलग छवि आ जाती है और लोग कहीं न कहीं इन्हें लेकर अपनी अलग राय भी बना लेते है, लेकिन दमोह में दीपावली में किन्नरों का खास महत्व है. लोग धनतेरस से देव उठनी एकादशी तक किन्नरों का इंतजार करते है और लोगों की ये इच्छा होती है कि उनकी दुकान में किन्नरों के कदम पड़े और उनके घर आंगन में किन्नर आकर ढोलक की थाप पर नाच गाना करें.

लोगों का अटूट विश्वास है कि इस त्योहारी सीजन में किन्नरों का आगमन और उनका आशीर्वाद व्यापार में दिन-दूनी रात-चौगुनी बरकत लेकर आता है. मान्यता है कि किन्नर शुभ होते है और दीपावली के इस त्यौहार पर उनका आना और उनकी आवभगत से मिलने वाली दुआओं से व्यापार बढ़ता है और लोगों के घरों में बरक्कत आती है.

किन्नकर की दुआ का सिक्का क्यों खास?

दमोह के बाजारों में बरसों से यह परंपरा चली आ रही है कि दीपावली के इन खास दिनों में किन्नरों की टोलियां शहर की हर एक दुकान और घर तक पहुंचती हैं. इस दौरान धर्म और जाति के बंधनों से ऊपर उठकर हर वर्ग के लोग उनका स्वागत करते हैं. दुकानों और घरों के बाहर ढोलक की थाप के साथ उनका सत्कार किया जाता है, उन्हें आदर से बैठाकर चाय-नाश्ता कराया जाता है और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-दक्षिणा दी जाती है. इसके बदले में किन्नर दुकानदारों को 'दुआ का सिक्का' भेंट करते हैं, जिसे व्यापारी अपनी तिजोरी या गल्ले में संभाल कर रखते हैं ताकि बरकत बनी रहे. इस अनोखी परंपरा को लेकर स्थानीय लोगों और खुद किन्नर समाज में भी गहरा उत्साह देखने को मिलता है.

इस परंपरा पर किन्नरों ने क्या बताया?

दमोह की रहने वाली गुड़िया बुआ बताती हैं, 'हमारे ये शुरू से परंपरा चली आ रही है और हमारे जजमान बहुत खुशी से हमारा सम्मान करते हैं, चाय पिलाते हैं और हमें नेग देते हैं.ट शहरवासियों को आशीर्वाद देते हुए वह कहती हैं, 'भगवान करे हमारे नगरवासी और सभी लोग सुखी रहें, खूब फलें-फूलें और सभी की दिवाली बहुत अच्छी हो.' इसी तरह किन्नर समाज की बेबी ने बताया, 'हम लोग दुकान में आते हैं, नाचते-गाते हैं और खुशियां मनाते हैं. आम जनता के साथ हम भी दिवाली का खूब आनंद उठाते हैं, लोग हमें बहुत सम्मान के साथ बुलाते और बैठाते हैं.'

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इस परंपरा को लेकर क्या है युवा पीढ़ी की सोच?

व्यापारियों और नई पीढ़ी का भी इस परंपरा से गहरा जुड़ाव है. दमोह के व्यापारी संजय कुमार का कहना है कि वे दीपावली पर किन्नरों का इंतजार करते हैं और उनके आने पर ढोलक की थाप के साथ उनका स्वागत होता है. उनका मानना है कि किन्नरों द्वारा दी गई दुआएं और आशीर्वाद हमेशा फलीभूत होते हैं. वहीं, युवा पीढ़ी की वंशी जैन ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया, 'हम बचपन से अपने परिवार को यह परंपरा निभाते देखते आ रहे हैं. जब हमने इसके बारे में बड़ों से पूछा, तो पता चला कि यह हमारे शहर की खास संस्कृति है. वे खुशी से दुकान पर आती हैं, नाचती-गाती हैं और दुआएं देकर जाती हैं.'

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न्यूज़ मीडिया में 13 सालों से अधिक के अनुभव के साथ सुमित राय एक डिजिटल पत्रकार हैं. वर्तमान में सुमित राय Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम के लीड की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, प्रशासनिक फैसलों, क्राइम और हाइपरलोकल मुद्दों के सटीक और गहरे विश्लेषण पर उनकी मजबूत पकड़ है.भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद सुमित ने मीडिया जगत में अपनी पहचान बनाई. अपने करियर के दौरान उन्होंने राजस्थान पत्रिका, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, एनडीटीवी और लोकमत हिंदी जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है. ग्राउंड रिपोर्टिंग के साथ-साथ जटिल राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रमों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' और 'ओपिनियन' लिखना उनकी मुख्य पहचान है. वे न्यूज़ डेस्क मैनेजमेंट और क्वालिटी एश्योरेंस के उच्च मानकों को बनाए रखते हैं, ताकि पाठकों तक प्रामाणिक, निष्पक्ष और तथ्य-आधारित खबरें ही पहुंचे.सुमित राय से संपर्क करने के लिए आप उन्हें sumit2.kumar@zeemedia.com पर ईमेल कर सकते हैं. इसके अलावा, आप एक्स (ट्विटर), फेसबुक और लिंक्डइन पर उनके हैंडल @imSumitKRai के जरिए उनसे सीधे जुड़ सकते हैं.
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