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मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से विकास के दावों की असलियत दिखाने वाली एक तस्वीर सामने आई है. यहां बिछुआ इलाके के बंधान माल गांव के लोग बारिश की वजह से काफी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. गांव को श्मशान घाट से जोड़ने वाली कोई पक्की सड़क न होने के कारण, लगभग 1.5 से 2 किलोमीटर लंबा कच्चा रास्ता बारिश के मौसम में कीचड़ और दलदल में बदल जाता है. इस स्थिति से न सिर्फ रोजाना आने-जाने में दिक्कत होती है, बल्कि श्मशान घाट तक जाने वाले अंतिम संस्कार के जुलूसों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि एक पुरानी दिक्कत है जिससे उन्हें सालों से काफी परेशानी हो रही है.
इस गांव में अंतिम यात्रा भी मुश्किल
ग्रामीणों के अनुसार, बंधान माल की आबादी लगभग 800 है और यहां केवल एक ही श्मशान घाट है. यहां पहुंचने के रास्ते की हालत बारिश में इतनी खराब हो जाती है कि शवयात्रा में शामिल लोगों को भी फिसलते और कीचड़ में चलते हुए जाना पड़ता है. हाल ही में सामने आए एक वीडियो ने इस समस्या को फिर से उजागर किया है. ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने श्मशान घाट तक एक पक्की सड़क बनाने की जरूरत के बारे में सरपंच और संबंधित अधिकारियों को कई बार बताया है. लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है. बारिश शुरू होते ही यह रास्ता कीचड़ और दलदल में बदल जाता है.
विकास को दावों की खुली पोल
ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके अंतिम संस्कार के लिए जाने वाले लोगों को भी इस तरह की परेशानी झेलनी पड़ रही है. वहीं, जनपद CEO का कहना है कि यह इलाका वन क्षेत्र में आता है. इसे लेकर छह महीने पहले पेंच नेशनल पार्क को एक प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन अभी भी जवाब का इंतजार है.
पहले भी आ चुके हैं ऐसे मामले
बता दें कि यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों से खराब इंफ्रास्ट्रक्चर और पक्की सड़कों की कमी को लेकर कई दुखद खबरें सामने आई हैं. छिंदवाड़ा की बिछुआ घटना की तरह ही, सीहोर जिले के इछावर ब्लॉक के कचनारिया गांव में भी ग्रामीणों को एक बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार करने के लिए उफनते नाले और कमर तक गहरे पानी से होकर गुजरना पड़ा था. सड़क न होने के कारण शव गांव तक नहीं पहुंच पाया, जिसके बाद ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर शव को कंधों पर उठाया और नाला पार किया.