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कौन जेल में...कौन बाहर? 26 मासूमों की मौत के एक साल बाद भी नहीं मिला इंसाफ, जानिए छिंदवाड़ा सिरप कांड के पीड़ितों का दर्द

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कफ सिरप कांड में 26 बच्चों की मौत हो चुकी थी. एक साल बाद अभी भी पीड़ित परिवारों को इंसाफ का इंतजार करना पड़ रहा है. लेकिन इस मामले के कुछ आरोपी तो जेल में हैं, कुछ जमानत पर बाहर आ चुके हैं. वहीं इन पीड़ित परिवारों ने अपना दर्द बयां किया है, आइए आपको विस्तार से बताते हैं.

कौन जेल में...कौन बाहर? 26 मासूमों की मौत के एक साल बाद भी नहीं मिला इंसाफ, जानिए छिंदवाड़ा सिरप कांड के पीड़ितों का दर्द
Image Credit: ZEE News

छिंदवाड़ा में पिछले साल कुछ परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूटा था. इस दुख को शब्दों में कहना आसान नहीं है. सितंबर 2025 में कफ सिरप पीने के बाद कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी थी. देखते ही देखते मामला इतना गंभीर हो गया था कि, इससे 26 बच्चों की मौत हो गई थी.

बताया गया कि बच्चों की मौत किडनी फेल होने के चलते हुई थी. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि  कोल्ड्रिफ कफ सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल यानी DEG की मात्रा 48.6 फीसदी पाए जाने की बात सामने आई. जबकि इस सिरप में इसकी मात्रा 0.1 फीसदी ही बताई गई थी.

SIT का भी गठन
बच्चों की मौत के बाद जब मामले ने तूल पकड़ा तो पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. घरों में मातम सा छा गया. सभी के दिमाग में एक ही सवाल गूंज रहा था कि इन बच्चों की मौत कैसे हुई? सरकार ने मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया. जांच आगे बढ़ी तो एक के बाद एक नाम सामने आए.

11 से ज्यादा गिरफ्तार
इस मामले में 11 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया. इसके साथ ही दो ड्रग इंस्पेक्टरों को भी निलंबित कर दिया गया. उस समय परिवारों को लग रहा था कि आज होगी तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी. इन दोषियों को सजा भी मिलेगी. जिससे इन सभी बच्चों को इंसाफ भी मिल जाएगा.

आरोपियों को जमानत
लेकिन समय बीतता चला गया, एक साल से ज्यादा का समय हो गया. लेकिन इन पीड़ित परिवारों को इंसाफ तो नहीं मिला, लेकिन आरोपियों को जमानत जरूर मिल गई. हालांकि, अभी कुछ आरोपी जेल में ही बंद हैं. इनमें श्रीसन फार्मास्यूटिकल के संचालक, डॉक्टर प्रवीण सोनी और केमिकल एनालिस्ट समेत कुछ आरोपी जेल में बताए जा रहे हैं.

परिवार क्यों हैं परेशान
वहीं प्रवीण सोनी की पत्नी, मेडिकल संचालक ज्योति सोनी, एमआर सतीश वर्मा, दो मेडिकल संचालक और केमिकल सप्लायर शैलेश पांड्या समेत कुछ आरोपियों को जमानत मिल चुकी है. जिससे वह जेल से बाहर आ गए हैं. यही बात अब पीड़ित परिवारों को सबसे ज्यादा परेशान कर रही है.

इंस्पेक्टर फिर बहाल
उधर जिन दो ड्रग इंस्पेक्टरों पर कार्रवाई की गई थी. उनमें ड्रग इंस्पेक्टर गौरव शर्मा और शरद जैन को गुना और जबलपुर में बहाल कर दिया गया. इसके बाद रविवार को कार्यालय खोलकर दोनों को भोपाल अटैच कर दिया गया. इधर बच्चों के परिवार अपनी जगह खड़े हैं. उनका कहना है कि समय के साथ आरोपी धीरे-धीरे जेल से बाहर आ रहे हैं. ऐसे में उन्हें डर लग रहा है कि इन बच्चों की मौतों का इंसाफ मिलने में फिर देर न हो जाए.

परिवारों ने बयां किया दर्द
इन परिवारों का दर्द सिर्फ बच्चों को खोने तक ही नहीं रुका, उनका कहना है कि बच्चों के इलाज के दौरान जीवनभर की जमा पूंजी खर्च हो गई. ऊपर से इलाज के लिए जो कर्ज लिया था, वह आज भी चुकाना पड़ रहा है. यानी घर का चिराग भी चला गया. साथ ही सिर पर कर्ज का बोझ भी लद गया. वहीं योजित के परिवार की हालत भी ऐसी है. योजित की मां और दादी ने बताया कि उनका परिवार ऑटो चलाकर घर का खर्च चला रहा है.

यादों में बीत रहे दिन
वहीं अदनान की मां आफरीन परवीन का कहना है कि घटना को एक साल से ज्यादा समय हो गया है. लेकिन बच्चों को अभी तक इंसाफ नहीं मिला है. आफरीन ने आगे कहा कि हमको लग रहा है. सरकार की तरफ से भी पूरा ध्यान हट गया है. जो जेल में थे, वो भी जेल से बाहर आ रहे हैं. कुछ भी नहीं हुआ है. उन्होंने आगे कहा कि हमको दिलासा दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि हमारा एक-एक पल, एक-एक दिन हमारे बच्चों की यादों में बीत रहा है.

हालांकि, अभी इस मामले में कानूनी लड़ाई चल रही है. वहीं वकील संजय पटोरिया ने बताया कि हाईकोर्ट जबलपुर की तरफ से कुछ आरोपियों को जमानत दी गई है. उन्होंने कहा कि इन आरोपियों में पांच ऐसे हैं, जिन्हें अभी जमानत नहीं मिली है.

किसे-किसे नहीं मिली जमानत
1. जी. रंगनाथन, संचालक, श्रीसन फार्मास्युटिकल्स
2. के. माहेश्वरी, रासायनिक विश्लेषक
3. डॉ. प्रवीण सोनी 
4.  डॉ. अमन सिद्दीकी
5. डॉ. एस.एस. ठाकुर

किसे-किसे मिल चुकी जमानत
1. एमआर सतीश वर्मा
2. शैलेंद्र पांड्या
3. ज्योति सोनी, डॉक्टर प्रवीण सोनी की पत्नी
4.  सौरभ जैन 
5. अनिल रसीला
6. एक अन्य

कब मिलेगा इंसाफ?
वहीं एडवोकेट का कहना है कि वे डॉक्टरों की जमानत का विरोध करेंगे. उन्होंने कहा कि चार साल से कम उम्र के बच्चों को यह सिरप नहीं दी जानी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया है कि संबंधित डॉक्टरों ने यह जानते हुए भी दवा लिखी. वहीं दूसरी तरफ बच्चों के परिवार आस लगाए बैठे हैं कि आगे क्या होगा. एक साल गुजर गया है. लेकिन अभी तक इंसाफ नहीं मिला है.

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About the Author

Manish Kushawah

Manish Kushawah

मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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