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ड्रोन उड़ा...नक्शा बना, सरकारी जमीन के बदल गए रिकॉर्ड, छतरपुर में स्वामित्व योजना पर क्यों उठे सवाल?

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्वामित्व योजना में भारी गड़बड़ी सामने आई है. आरोप है कि पटवारी की मिलीभगत के चलते सरकारी जमीनों को किसी निजी व्यक्ति के नाम पर दर्ज की गई है. अब इस योजना पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. आइए जानते हैं, कि पूरा मामला क्या है?

Written By Manish Kushawah
Published: Sep 25, 2026, 06:21 PM IST | Updated: Sep 25, 2026, 06:27 PM IST
Image Credit: Zee Media
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मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से स्वामित्व योजना की शुरुआत की गई है. इस योजना का मकसद गांवों की जमीन का मालिकाना हक तय करना और लोगों को उनके अधिकार का रिकॉर्ड उपलब्ध कराना था. लेकिन छतरपुर जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसके चलते अब स्वामित्व योजना पर ही गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं.

सवाल यह उठ रहा है कि जिस जमीन पर सरकारी चौकी बनी थी, वह निजी नामों तक कैसे पहुंच गई? पड़ताल के दौरान एक सरकारी विद्यालय के शिक्षक सदन की जमीन का रिकॉर्ड भी सामने आया. खास बात यह है कि इन दोनों सरकारी उपयोग वाली जमीनों की रजिस्ट्री का कनेक्शन एक ही परिवार से जुड़े नामों से सामने आया है.

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यह मामला राजनगर तहसील इलाके के शिवराजपुर हल्के का बताया जा रहा है. यहां स्वामित्व योजना के तहत तैयार किए गए सर्वे और जमीन के रिकॉर्ड को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. आरोप है कि छतरपुर-पन्ना नेशनल हाईवे-39 पर चंद्रनगर चौराहे के पास स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व की पुरानी चौकी की बिल्डिंग और जमीन शिवराजपुर निवासी दुर्गादत्त पाठक और उत्कर्ष पाठक के नाम पर दर्ज कर दी गई है.

दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई
मामला सामने आने के बाद पन्ना टाइगर रिजर्व की चंद्रनगर रेंज की तरफ से राजस्व विभाग को पत्र लिखा गया और आपत्ति दर्ज कराई गई. इसके अलावा, मामले की जांच के साथ-साथ दोषियों पर कार्रवाई की मांग भी गई. लेकिन मामला यहीं नहीं रुका. पड़ताल के दौरान सीएम राइज उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के दौरान चंद्रनगर सीएम राइज उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक सदन की भूमि का मामला भी उजागर हुआ.

पटवारी की मिलीभगत आई सामने
आरोप यह भी है कि इस भूमि को निजी नामों पर दर्ज किया गया है. इसमें पटवारी की मिलीभगत भी सामने आई है. बताया जा रहा है कि टाइगर रिजर्व की चौकी वाली जमीन जिन नामों पर दर्ज की गई हैं, उन्हीं से जुड़े परिजनों के नाम पर शिक्षक सदन की भूमि भी दर्ज कर दी गई है. सवाल यह नहीं है कि रिकॉर्ड की एक गलती हुई है. सवाल यह उठ रहा है कि क्या स्वामित्व योजना के तहत रिकॉर्ड तैयार करने से पहले जमीन का सच में वेरीफिकेशन हुआ था या नहीं. क्या राजस्व विभाग की तरफ से विभागों के दस्तावेजों का मिलान किया गया था. इस मामले को लेकर जिला कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं.

किन लोगों के नाम पर दर्ज
पन्ना टाइगर रिजर्व के रेंजर राम प्रसाद प्रजापति ने बताया कि राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में टाइगर रिजर्व के वनरक्षक क्वार्टर और चंद्रनगर बस स्टैंड के पास बने परचेस सहायक क्वार्टर की जमीन को कुछ लोगों के नाम पट्टे पर दर्ज कर दिया गया है. ये दोनों पुरानी बिल्डिंग हैं, जिनमें से एक 1952-53 और दूसरी 1954-55 की बनी हुई है. अभी भी हमारे कब्जे में हैं. मिली जानकारी के मुताबिक सूजपुरा के पाठक परिवार के उत्कर्ष पाठक, दुर्गादत्त पाठक और अन्य लोगों के नाम इन जमीनों का पट्टा बनाया गया है.

संबंधित अधिकारियों को पत्र
उन्होंने कहा कि इस मामले में आशंका है कि इसमें पटवारी की मिलीभगत हो सकती है. इसको लेकर हमने तहसीलदार राजनगर, हल्का पटवारी और थाना प्रभारी बमीठा को पत्र लिखा है. साथ ही सहायक संचालक और उप संचालक को भी जानकारी दी है कि यह हमारी जमीन है, इसलिए बनाए गए पट्टे को निरस्त कर संबंधित लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाए.

कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए 
सीएम राइज उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य धीरेंद्र त्रिपाठी का कहना है कि जिसने भी यह किया है, वह गलत है. उन्होंने आगे कहा कि विद्यालय स्तर पर जितनी कड़ी कार्रवाई संभव होगी, वह की जाएगी. प्राचार्य ने कहा कि यह शिक्षक सदन है, जो शिक्षकों के आंशिक सहयोग से बनाया गया था, वह काफी पुराना है. इसे पूर्व शिक्षकों ने अपनी मेहनत की कमाई से बनवाया था. ऐसे में कोई भी व्यक्ति इस जमीन या भवन को अपने नाम नहीं करा सकता. उन्होंने कहा कि दोषी के खिलाफ राजस्व विभाग समेत संबंधित स्तर पर कार्रवाई होनी चाहिए.

मामले की जांच की जा रही
वहीं तहसीलदार धीरज गौतम का कहना है कि इस मामले में जांच की जा रही है. उन्होंने बताया कि स्वामित्व योजना के दौरान कई जगह छोटी-मोटी त्रुटियां सामने आई हैं, जिन्हें सुधारा जा रहा है. इसके अलावा, जिम्मेदारी भी तय की जा रही है. आगे तहसीलदार ने बताया कि संबंधित स्कूल करीब 20-25 साल से बंद था. उसकी बिल्डिंग भी जर्जर थी. स्कूल से लगी आबादी की जमीन और निजी मकानों के कारण ड्रोन सर्वे के बाद तैयार हुए नक्शे में जमीन की पहचान को लेकर गलती हुई. इसी वजह से स्कूल की जमीन को आसपास की निजी आबादी वाली जमीन का हिस्सा समझ लिया गया. अब मामले की जांच के बाद रिकॉर्ड में जरूरी सुधार किया जा रहा है.
(रिपोर्टः हरीश गुप्ता, छतरपुर)

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मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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