उम्र 21 साल, 7 महीने की मेहनत और एक जंग... बिट्टू तबाही नाम क्यों रखा? जानिए किसके दम पर बदल दी अजनार नदी की सूरत
मध्यप्रदेश के राजगढ़ के रहने वाले 21 साल के सुरेंद्र सिंह चौधरी ने अकेले दम पर ब्यावरा में अजनार नदी का कायाकल्प कर दिया है और नया रूप दे दिया है. सोशल मीडिया पर बिट्टू तबाही के नाम से फेमस सुरेंद्र के नाम के पीछे भी पॉजिटिव थिंकिंग है, जिसका खुलासा Zee News के साथ बात करते हुए उन्होंने किया है.
बिट्टू तबाही... यह वो नाम है, जो सोशल मीडिया पर हर तरफ छाया हुआ है और आज एक दृढ़ निश्चय, कड़ी मेहनत और जज्बे की मिसाल बन चुका है. आज हर कोई बिट्टू की तारीफ कर रहा है. अक्सर कहा जाता है कि जब इरादे पक्के हों और कुछ बेहतर करने का जुनून सिर पर सवार हो, तो अकेला इंसान भी नदी की धारा बदल सकता है. मध्यप्रदेश के राजगढ़ के रहने वाले 21 साल के बिट्टू तबाही ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. बिट्टू तबाही का असली नाम सुरेंद्र सिंह चौधरी है, लेकिन सोशल मीडिया आज इन्हें 'बिट्टू तबाही' के नाम से ही जानती है.
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में जिस अजनार नदी के किनारे फैली बदबू और गंदगी के कारण लोग पास से गुजरना भी पसंद नहीं करते थे, उस नदी का बिट्टू तबाही ने अकेले दम पर कायाकल्प कर दिया है और नया रूप दे दिया है. सफाई करने दौरान जो लोग बिट्टू को पागल कहते थे, आज वही लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं. इतना ही नहीं, बिट्टू तबाही की तारीफ खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी कर चुके हैं.
'बिट्टू तबाही' नाम के पीछे क्या है अनोखी सोच?
'बिट्टू तबाही' नाम सोशल मीडिया पर जितना वायरल है, उसके पीछे की सोच उतनी ही पॉजिटिव है. सुरेंद्र उर्फ बिट्टू का कहना है, 'मैंने यह नाम खुद रखा था. मेरी सोच यही थी कि नाम ऐसा हो, जिसका मतलब तबाही हो, लेकिन यह तबाही किसी नुकसान के लिए नहीं, बल्कि समाज में कुछ अच्छा काम करके मचाई जाए.'
अजनार नदी की सफाई का विचार कहां से आया?
राजगढ़ में मंदिर के पीछे बहने वाली अजनार नदी कचरे और प्रदूषण के कारण दम तोड़ रही थी. स्थिति यह थी कि जहरीले पानी और गंदगी की वजह से मछली और केकड़े जैसे जलीय जीव मर रहे थे. बीएससी सेकेंड ईयर के छात्र बिट्टू ने जब अपनी आंखों के सामने इस नदी को मरते देखा, तो उन्होंने तय किया कि इसे नया जीवन देना ही होगा. Zee News से बात करते हुए बिट्टू ने बताया कि गंदगी देखकर इस साल 26 जनवरी को उन्होंने बिना किसी बड़े तामझाम के अकेले ही अजनार नदी में उतरकर सफाई का मिशन शुरू कर दिया.
पढ़ाई और सफाई को एक साथ कैसे मैनेज किया?
बिट्टू ने बताया कि जब उन्होंने जनवरी में सफाई की शुरुआत की, तब ठंड का मौसम था. इस वजह से वो दोपहर में सफाई करते थे और शुरुआत में रोज 4 से 5 घंटे नदी की सफाई में बिताते थे. फिर जब मौसम बदला तो सुबह और शाम का वक्त सफाई के लिए तय किया. पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए भी बिट्टू ने समय का सही तालमेल बिठाकर काम किया. यहां तक कि घरवाले सवाल न करें, इसलिए क्रिकेट खेलने या घूमने जाने का बहाना बनाकर नदी पर चले जाते थे.
इतनी बड़ी नदी को कैसे किया साफ?
बिट्टू ने 7 महीने के लंबे सफर में नदी को कई हिस्सों में बांट लिया था और एक-एक करके 3 बड़े घाटों को पूरी तरह चमका दिया. हालांकि, गंदगी के बीच घंटों काम करने की वजह से उनके पूरे शरीर में स्किन इन्फेक्शन भी हो गया, लेकिन उनका जज्बा कम नहीं हुआ.
शुरू में लोग कहते थे पागल, लेकिन अब...
जब बिट्टू ने अकेले नदी साफ करना शुरू किया, तो आसपास के लोगों और सोशल मीडिया पर कमेंट करने वालों ने उनका जमकर मजाक उड़ाया. बिट्टू ने बताया कि लोगों ने उन्हें 'पागल' तक कह दिया और ताने मारे कि यह अकेले कुछ नहीं कर पाएगा. बिट्टू बताते हैं कि जब उन्होंने काम शुरू किया तो घरवालों तक को इसकी भनक नहीं थी, लेकिन उन्होंने मन में ठान लिया था कि चाहे कितना भी वक्त लगे, नदी साफ करके ही रहेंगे. बिट्टू ने बताया कि शुरू में मजाक उड़ाने वाले लोग, आज जब अजनार नदी के साफ-सुथरे घाटों पर बैठते हैं, तो काम की तारीफ करते हैं. इसके बाद बिट्टू अपनी मेहनत पर गर्व होता है.
किसके दम पर बदली सूरत?
बिट्टू ने Zee News से बात करते हुए बताया कि शुरुआत भले ही उन्होंने इस जंग की शुरुआत अकेले की थी, लेकिन उनके इस काम को देखकर धीरे-धीरे दोस्तों और स्थानीय नागरिकों का साथ मिलने लगा. बाद में जब नदी के गहरे हिस्सों और भारी कचरे को हटाने में मशीनरी की जरूरत पड़ी, तो स्थानीय प्रशासन ने भी आगे बढ़कर मदद की. जेसीबी और कचरा गाड़ियों की व्यवस्था प्रशासन की ओर से की गई, जिससे काम में और तेजी आई.
अब विदेश से मिलने लगा नौकरी का ऑफर
बिट्टू की मेहनत की गूंज अब देश ही नहीं विदेश तक पहुंच चुकी है. हाल ही में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिट्टू को बुलाकर उनसे मुलाकात की, उनका सम्मान किया और हर संभव प्रशासनिक मदद का भरोसा दिया. इतना ही नहीं, बिट्टू के इस जज्बे को देखते हुए उन्हें विदेशों से भी काम और जॉब के ऑफर आ रहे हैं. हालांकि, बिट्टू का कहना है कि वे फिलहाल अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं और भविष्य में नदियों के संरक्षण के लिए बड़ा काम करना चाहते हैं.
लोगों को क्या देना चाहते हैं संदेश?
नदी की सूरत बदलने के बाद अब बिट्टू को एक ही बात की चिंता सता रही है कि लोग इसे दोबारा गंदा न करें, क्योंकि सफाई के दौरान भी कई लोग लगातार नहीं में कचरा फेंकते थे. उनका कहना है कि नदियां और पर्यावरण साफ रहेंगे, तभी हमारी आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित रहेगा. सरकार के साथ-साथ यह हम सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है कि हम नदियों में कचरा और प्लास्टिक न फेंकें.