बेटी को जमीन दान, बैंक से 2 करोड़ का लोन और फिर खुद पर ही फर्जी मुकदमे: 5 पॉइंट में जानें बिल्डर जीशान अली ने कैसे किया फर्जीवाड़ा
भोपाल में बिल्डर जीशान अली और उनकी पत्नी पर बड़ा आरोप लगा है. उन्होंने अपनी बेटियों के नाम दान की हुई जमीन को खुद की बताकर बैंक में गिरवी रख दिया और 2 करोड़ रुपये का लोन ले लिया. इस मामले में EOW ने दोनों के खिलाफ FIR दर्ज की है.
राजधानी भोपाल में एक जाने-माने बिल्डर द्वारा करोड़ों रुपये की बैंक धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. EOW ने 'रॉयल हेरिटेज बिल्डर्स एंड कोलोनाइजर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर जीशान अली और उनकी पत्नी नाजनीन अली के खिलाफ मामला दर्ज किया है. जानकारी के अनुसार, बावड़ियाकलां में स्थित एक कमर्शियल जमीन जिसे 2008 में खरीदा गया था, उसे जीशान अली ने 10 जुलाई 2013 को एक हिबानामा (गिफ्ट डीड) के जरिए अपनी तीन बेटियों के नाम कर दिया था. इसके बाद उन्होंने उसी जमीन को अपनी बताकर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से 2 करोड़ रुपये का लोन ले लिया.
बैंक से 2 करोड़ का लोन और फिर खुद पर ही फर्जी मुकदमे
2017 में लोन NPA बन गया और बैंक ने SARFAESI एक्ट के तहत संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की, तो बिल्डर ने कर्ज चुकाने से बचने के लिए अपनी ही बेटियों से सिविल कोर्ट में मुकदमे दायर करवा दिए कि जमीन उनकी है. बैंक ने अदालत में इसे खुद के खिलाफ फर्जी मुकदमा बताया. इलाहाबाद में DRAT का फैसला बैंक के पक्ष में आने के बाद भी 2 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बकाया है. अब EOW इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है.
5 पॉइंट में जानें बिल्डर जीशान अली ने कैसे किया फर्जीवाड़ा
शादाब गृह निर्माण सहकारी समिति टेंडर
साल 2007 में शादाब गृह निर्माण सहकारी समिति ने एक टेंडर जारी किया. जीशान अली अकेले बोली लगाने वाले थे. 5 फरवरी 2008 को बावड़ियाकलां में 526.83 वर्ग मीटर का एक कमर्शियल प्लॉट उनके नाम पर रजिस्टर किया गया.
बेटियों को दान की जमीन
10 जुलाई 2013 को जीशान ने एक हिबानामा (गिफ्ट डीड) तैयार किया और यह जमीन अपनी तीन बेटियों के नाम कर दी. उस समय इनमें से दो बेटियां नाबालिग थीं. दूसरे शब्दों में कहें तो, यह जमीन कानूनी तौर पर बेटियों की संपत्ति बन गई थी. खुद जीशान ने 2018 में बैंक को लिखे पत्र में यह बात मानी भी थी.
दान छिपाकर लोन लिया
जीशान ने बैंक से हिबानामा (गिफ्ट डीड) के बारे में जानकारी छिपाई और बताया कि जमीन पर किसी तरह का कोई कानूनी बोझ या विवाद नहीं है. कानूनी रिपोर्ट में नाबालिगों से जुड़े कॉलम में none लिखा गया था. इसके आधार पर 24 सितंबर 2015 को उनकी कंपनी रॉयल हेरिटेज बिल्डर्स को 2 करोड़ रुपये की ओवरड्राफ्ट लिमिट दे दी गई.
नियम जानते थे, फिर भी नियमों का उल्लंघन किया
फरवरी 2015 में जीशान और उनकी पत्नी नाजनीन ने अपनी नाबालिग बेटी की जमीन का दूसरा प्लॉट बेचने के लिए जिला अदालत से अनुमति ली थी. इससे यह साबित होता है कि उन्हें पता था कि अदालत की मंजूरी के बिना किसी नाबालिग की संपत्ति नहीं बेची जा सकती. इसके बावजूद छह महीने बाद उन्होंने चुपके से उस जमीन को बैंक के पास गिरवी रख दिया.
फर्जी केस दाखिल
यह लोन 2017 में NPA बन गया. 3 जनवरी 2018 को बैंक ने SARFAESI नोटिस जारी किया. इससे ठीक पहले 4 अक्टूबर 2017 को कर्ज लेने वाले की बेटियों के जरिए सिविल कोर्ट में एक मामला दायर किया गया. इसमें दावा किया गया कि जमीन उनकी है, इसलिए बैंक उसे जब्त नहीं कर सकता.