सर्दी-खांसी-निमोनिया से सावधान! बैतूल में बीमारियों का डबल अटैक, OPD में बढ़े 600 से सीधे 1200 मरीज, जानें वजह
मध्य प्रदेश के बैतूल में लगातार मौसम के बदलने से लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है. वहीं मौसमी बीमारियों ने बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को जकड़ रखा है. वहीं अस्पताल में सैंकड़ों की संख्या मरीज पहुंच रहे हैं. आइए जानते हैं, कि डॉक्टरों ने मरीजों से क्या कहा है?
बैतूल जिले में बदलता मौसम और कम बारिश अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ती नजर आ रही है. मौसम में लगातार बदलाव के बीच जिले में मौसमी बीमारियों और वायरल फीवर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इसका सीधा असर अब जिला अस्पताल की ओपीडी में दिखाई दे रहा है.
बैतूल जिला अस्पताल में सामान्य दिनों में जहां करीब 500 से 600 मरीज प्रतिदिन इलाज के लिए पहुंचते थे, वहीं अब मरीजों की संख्या बढ़कर 1200 से ज्यादा प्रतिदिन बताई जा रही है. यानी सामान्य दिनों की तुलना में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है. सुबह से ही जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ दिखाई दे रही है, जो देर शाम तक बनी रहती है. अस्पताल के वार्डों में भी मरीज भर्ती हैं. इनमें बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की बताई जा रही है, जो वायरल फीवर और मौसमी बीमारियों की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं. मरीजों में सर्दी, खांसी, बुखार, सिरदर्द और बदन दर्द जैसे लक्षण प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं.
बच्चों पर दिख रहा असर
वायरल फीवर का असर बच्चों पर भी देखने को मिल रहा है. कई मामलों में घर के एक सदस्य के बीमार पड़ने के बाद धीरे-धीरे परिवार के दूसरे सदस्य भी इसकी चपेट में आने की बात सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि वायरल फीवर का असर कई मरीजों में चार दिन से लेकर करीब एक सप्ताह तक रह सकता है. हालांकि, बीमारी की गंभीरता और अवधि व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करती है. डॉक्टरों की सलाह है कि लगातार बुखार या अन्य लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय जांच और उपचार कराया जाए.
सावधानी बरतने की अपील
बदलते मौसम में संक्रमण से बचाव को लेकर डॉक्टर लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं. बुखार या वायरल जैसे लक्षण होने पर मास्क का इस्तेमाल करने, हाथों को बार-बार धोने और संक्रमण की स्थिति में दूसरों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है. फिलहाल, जिला अस्पताल में बढ़ी मरीजों की संख्या ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा दिया है. ऐसे में बदलते मौसम के बीच लोगों के लिए सावधानी, साफ-सफाई और समय पर उपचार जरूरी है.
सितंबर में बढ़ती है संख्या
सिविल सर्जन डॉ. रानू वर्मा का कहना है कि सामान्य दिनों में जिला अस्पताल की ओपीडी करीब 600 से 800 के बीच रहती थी, लेकिन जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर के दौरान मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी है. वर्तमान में प्रतिदिन करीब 1200 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं. इनमें मुख्य रूप से सर्दी-खांसी, बुखार और लूज मोशन के मरीज शामिल हैं. उन्होंने बताया कि मौसम में बदलाव और ह्यूमिडिटी बढ़ने के कारण वायरल इंफेक्शन के साथ ही वेक्टर-बॉर्न इंफेक्शन के मामले भी सामने आते हैं. मक्खी, मच्छर और अन्य कीड़ों के जरिए फैलने वाली बीमारियों के मरीज भी इस दौरान देखने को मिलते हैं.
डॉक्टर ने लोगों को सलाह
डॉ. रानू वर्मा ने बताया कि स्वाइन फ्लू इन्फ्लूएंजा वायरस से होता है. इससे बचाव के लिए अस्पताल या भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क का इस्तेमाल करने और समय-समय पर हाथों की सफाई रखने की सलाह दी जाती है. उन्होंने कहा कि अगर घर में किसी व्यक्ति को सर्दी-खांसी या बुखार है तो उसे डॉक्टर को जरूर दिखाएं. कई मामलों में सामान्य सर्दी-खांसी एक-दो दिन बाद वायरल निमोनिया में बदल सकती है, जो गंभीर हो सकता है. इसलिए ऐसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें और समय पर चिकित्सकीय सलाह लें.