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मध्य प्रदेश के बैतूल में एकीकृत माध्यमिक शाला बेहड़ा में पिछले 12 दिनों से पढ़ाई ठप पड़ी है. इसके चलते पहली से आठवीं तक पढ़ने वाले 114 बच्चों ने 31 अगस्त से स्कूल का बहिष्कार कर दिया है. वहीं ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जब तक स्कूल में शिक्षकों को हटाया नहीं जाता है, तब तक उन बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे. इस दौरान ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल के शिक्षक लालाराम कास्दे और कमल सोनी मनमर्जी से स्कूल आते हैं और चले जाते हैं. इसके अलावा, कई-कई दिनों तक शिक्षक अनुपस्थित रहते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इसका सीधा असर बच्चों की पढाई पर देखने को मिल रहा है.
जिले के बेहड़ा स्कूल विवाद में एक छात्रा का हाथ भी टूटने की घटना भी विवाद की बड़ी वजह बताई जा रही है. वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि घटना के बाद शिक्षक ने इसकी जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया. इसी बात को लेकर गांव वालों का गुस्सा तेज हो गया. ग्रामीणों ने स्कूल की बिजली, बच्चों के बैठने की व्यवस्था, साफ-सफाई जैसी सुविधाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को पढ़ाई का बेहतर माहौल मिलना चाहिए. वहीं जिन शिक्षकों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उनका कहना है कि पूरा विवाद अतिथि शिक्षक की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ है. उन्होंने कहा कि जलन से ग्रामीण उन पर आरोप लगा रहे हैं.
अतिथि शिक्षक की नियुक्ति पर बढ़ा विवाद
बैतूल जिले के इस स्कूल मामले की जानकारी मिलने के बाद ब्लॉक और जिला स्तर के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने ग्रामीणों और शिक्षकों के बीच बातचीत कर मामला शांत कराने की कोशिश की. अधिकारियों की ओर से जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया गया है. साथ ही बच्चों के एक-दो दिन में दोबारा स्कूल लौटने की बात भी कही गई है. हालांकि ग्रामीण अभी शिक्षकों को हटाने की मांग पर अड़े हुए हैं. ग्रामीण हर्रे सिंह चौहान ने कहा, बच्चों को स्कूल गए हुए 10 दिन से अधिक समय हो गया है. इससे पहले बच्चे रोजाना स्कूल जा रहे थे. लेकिन एक छात्रा का हाथ टूटने के बाद जब हम इसकी शिकायत करने मैडम साहब के पास गए, तो उन्होंने कहा कि इसमें हमारी कोई जवाबदारी नहीं है. वहीं, एक मास्टर भी अक्सर छुट्टी पर रहते हैं. इसलिए हमें ऐसे शिक्षक नहीं चाहिए.
ग्रामीणों ने रखी शिक्षकों को हटाने मांग
वहीं शिक्षक लालाराम कास्देकर ने ग्रामीणों की मांग को लेकर कहा, गांव वालों का कहना है कि हमें राकेश कुमार मालवी ही चाहिए. अगर उन्हें नहीं रखा गया तो हम बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे. यह जलन की भावना है. जो अतिथि शिक्षक था, उसने कहा था कि अगर मेरा नहीं हुआ तो मैं सोनी जी को भी नहीं रहने दूंगा. दोनों बैतूल के रहने वाले हैं और दोनों के बीच लंबे समय से विवाद भी चल रहा है. शिक्षक के इस बयान से साफ है कि बैतूल के बेहड़ा स्कूल में विवाद केवल पढ़ाई और स्कूल की व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि अतिथि शिक्षक की नियुक्ति भी पूरे मामले का एक अहम हिस्सा बनी हुई है.