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मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर परिसर में मौजूद श्री सिद्धिविनायक गणेश मंदिर में गणेश उत्सव बहुत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया. भगवान गणेश के जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर मंदिर परिसर को स्वर्ण मंदिर की तर्ज पर भव्य रूप से सजाया गया. सुबह पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार भगवान सिद्धि विनायक का पंचामृत अभिषेक किया गया और उसके बाद उन्हें दिव्य स्वर्ण आभूषणों से भव्य रूप से सजाया गया.
5.51 लाख मोदकों का महाभोग
इस मौके पर भगवान को 5,51,000 मोदक लड्डुओं का महाभोग लगाया गया. गणेश चतुर्थी पर खास रीति-रिवाजों के साथ महा-आरती की गई, जिसमें पंचामृत पूजा, अभिषेक (स्नान) और श्रृंगार शामिल थे. भगवान को केसर, चंदन का लेप और इत्र जैसी चीजों से स्नान कराया गया और मोदक का महाभोग लगाया गया. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बेटे वैभव यादव इस कार्यक्रम में शामिल हुए, उन्होंने महा-आरती की और खुद भक्तों को मोदक का प्रसाद बांटा. गणेश उत्सव के दस दिनों तक भक्तों को मोदक का प्रसाद बांटा जाता रहेगा.
महा-आरती के दौरान भक्तिमय माहौल
महा-आरती के दौरान महाकाल मंदिर परिसर का माहौल भक्तिमय हो गया और वहां ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई देने लगी. भगवान सिद्धि विनायक की आरती के साथ ढोल-नगाड़ों की ताल बज रही थी. दर्शन के लिए आए भक्तों में भारी उत्साह था और वे गणपति बप्पा के जयकारे लगाते हुए आरती में शामिल हुए. वहीं, दूसरी ओर उज्जैन में लगभग 500 जगहों पर भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की गईं. गणेश चतुर्थी के मौके पर शहर की सड़कों, मोहल्लों और बड़े-बड़े पंडालों में गणपति बप्पा के जयकारे गूंज रहे थे.
जानिए मंदिर की मान्यता
माना जाता है कि सिद्धिविनायक की काले पत्थर की मूर्ति लगभग 2,500 साल पुरानी है. इसे मूल रूप से राजा भर्तृहरि ने स्थापित किया था. यह मंदिर मौली धागे की मान्यता के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है, जहां महाकाल आने वाले भक्त रक्षासूत्र बंधवाकर मन्नत मांगते हैं. प्राचीन समय में श्रद्धालु भगवान चिंतामन व सिद्धिविनायक का आशीर्वाद लेने के बाद ही बाबा महाकाल के दर्शन करते थे. बदलते समय और नए रास्तों के बनने के बावजूद, भक्तों की इस पवित्र तीर्थ-स्थल (सिद्ध पीठ) में अटूट आस्था बनी हुई है.
अटूट आस्था का उदाहरण
उज्जैन के मशहूर सिद्धिविनायक मंदिर में गणेश उत्सव का भव्य और दिव्य आयोजन आस्था, परंपरा और आज के दौर की भक्ति का एक अनोखा उदाहरण है. 5.51 लाख मोदकों का विशाल महाभोग, स्वर्ण आभूषणों से सजी भगवान गणेश की अलौकिक प्रतिमा और 'मौली धागे' से जुड़ी भक्तों की अटूट आस्था यह स्पष्ट करती है कि युग बदलने के बावजूद बाबा महाकाल की नगरी में यह प्राचीन सिद्ध पीठ आज भी हर श्रद्धालु के हृदय में एक विशेष और पवित्र स्थान रखता है.