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आगर-मालवा में गेंदा किसानों पर दोहरी मार, 1-2 रुपये/किलो बिक रहे फूल, उठाना पड़ रहा बड़ा कदम

मध्य प्रदेश के आगर मालवा में फूलों की खेती करने वाले किसानों के लिए बड़ा संकट खड़ा है. फूल की तुड़ाई के लिए मजदूरों तक का खर्च नहीं निकल रहा है. आइए इसके पीछे की वजह के बारे में जानते हैं.

Written ByManish Kushawah
Published: Oct 22, 2026, 01:09 PM IST|Updated: Oct 22, 2026, 01:12 PM IST
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आगर-मालवा में गेंदा किसानों पर दोहरी मार, 1-2 रुपये/किलो बिक रहे फूल, उठाना पड़ रहा बड़ा कदम
Image Credit: ZEE NEWS

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Manish Kushawah

Manish Kushawah

मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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खेतों में खिले गेंदा के फूल… रंग ऐसा कि देखने वाले का मन खुश हो जाए, लेकिन इन्हीं फूलों को उगाने वाले किसानों की आंखों में आज मायूसी है. जिस गेंदा की खेती से अच्छी आमदनी की उम्मीद थी, वही अब किसानों के लिए घाटे का सौदा बन गई है. मध्यप्रदेश के आगर-मालवा में फूलों की बंपर पैदावार और बाजार में कमजोर मांग ने किसानों की कमर तोड़ दी है. तापमान बढ़ने से फूल समय से पहले खिल गए, दूसरी तरफ मंडियों में आवक बढ़ने से भाव एक रुपये से दो रुपये किलो तक सिमट गए.

हालात ऐसे हैं कि फूलों की तुड़ाई के लिए मजदूर लगाने, उन्हें बोरियों या पोटलियों में भरने और मंडी तक पहुंचाने का खर्च भी नहीं निकल पा रहा. किसान के सामने संकट यह है कि फूल तोड़ें तो मजदूरी कहां से दें और मंडी ले जाएं तो भाड़ा कैसे निकालें? लिहाजा कई किसान तैयार गेंदा फूलों को बेचने के बजाय खेतों में फेंकने को मजबूर हैं. जिस फसल में उन्होंने अपनी मेहनत, पूंजी और उम्मीदें लगाई थीं, आज वही आंखों के सामने बर्बाद हो रही है.

खेतों में गेंदा फूलों की भरमार

आगर-मालवा के खेतों में इन दिनों गेंदा फूलों की भरमार है. दूर से देखने पर खेत पीले और नारंगी रंग की चादर जैसे नजर आते हैं, लेकिन इस खूबसूरती के पीछे किसानों की परेशानी छिपी है. फूलों की अच्छी पैदावार देखकर किसानों को उम्मीद थी कि त्योहारों के सीजन में मांग बढ़ेगी और उन्हें बेहतर दाम मिलेंगे. लेकिन बाजार का गणित ऐसा बिगड़ा कि फूलों की अधिकता ही किसानों के लिए मुसीबत बन गई. मंडियों में फूलों की आवक बढ़ी, खरीदारों की मांग उस अनुपात में नहीं बढ़ी और देखते ही देखते गेंदा के भाव औंधे मुंह गिर गए.

कितने रुपए किलो बिक रहे फूल

किसान रूपनारायण माली की कहानी भी इसी संकट का उदाहरण है. उन्होंने करीब दो बीघा जमीन पर गेंदा फूल की उन्नत किस्म की खेती की. महंगे बीज और पौधे खरीदे, खेत तैयार किया, रोपाई की, खाद और सिंचाई पर खर्च किया. फसल को तैयार करने में लगातार मेहनत की और उम्मीद लगाई कि अच्छी पैदावार से घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. लेकिन जब फसल बेचने का समय आया, तो बाजार में गेंदा के दाम महज एक से दो रुपये किलो रह गए. हजारों रुपये खर्च करने के बाद अब उनके सामने यह सवाल है कि आखिर लागत कैसे निकलेगी?

घाटे का सौदा रही ये फसल

किसान रूप नारायण पहलवान का कहना है कि किसानों की परेशानी सिर्फ कम भाव मिलने तक सीमित नहीं है. फूलों को खेत से तोड़ने के लिए मजदूर लगाने पड़ते हैं. फिर उन्हें इकट्ठा करना, पोटलियों में भरना और मंडी तक पहुंचाना होता है. इस पूरी प्रक्रिया में पैसा और समय दोनों खर्च होते हैं. लेकिन जब करीब दस किलो फूल बेचने पर महज 30 से 40 रुपये मिलें, तो किसान के लिए यह सौदा घाटे का ही साबित होता है. किसान ने आगे बताया कि कई बार मंडी तक पहुंचने में लगने वाले पेट्रोल या परिवहन का खर्च भी बिक्री से मिलने वाली रकम से ज्यादा पड़ जाता है. ऐसे में किसान के सामने तैयार फसल को तोड़ने का खर्च उठाने और उसे खेत में ही छोड़ देने के बीच मुश्किल फैसला लेने की नौबत आ गई है.

1 बीघा में कितना खर्चा आता है

किसानों का कहना है कि आगर-मालवा जिले में करीब तीन हजार बीघा जमीन पर गेंदा फूल की खेती की गई है. वहीं थोक मंडी में करीब दस टन फूल पहुंच रहे हैं. तापमान बढ़ने से फूल समय से पहले खिलने, उत्पादन ज्यादा होने और बड़े शहरों की मंडियों में मांग कमजोर रहने के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ा है. एक बीघा गेंदा फूल की खेती पर करीब 25 हजार रुपये खर्च करने वाले किसान अब अपनी लागत वसूलने के लिए परेशान हैं. फूलों की खेती में कमाई की उम्मीद लेकर निवेश करने वाले किसानों के सामने अब नुकसान की भरपाई करने की चुनौती है.

किसानों पर बड़ा आर्थिक संकट

नगर पालिका कर्मचारी संतोष का कहना है कि गेंदा के फूलों का इस्तेमाल पूजा-पाठ, सजावट और त्योहारों में होता है. किसानों को उम्मीद थी कि इन फूलों की मांग उनकी मेहनत का अच्छा मूल्य दिलाएगी. लेकिन आगर-मालवा में तस्वीर उलट है. खेतों में फूल खिले हैं, मंडियों में आवक है, फिर भी किसान की जेब खाली है. एक से दो रुपये किलो के भाव में अपनी उपज बेचने से बेहतर कई किसानों को फूल फेंकना पड़ रहा है. सवाल यह है कि जब किसान की मेहनत और लागत का उचित मूल्य ही नहीं मिल पाएगा, तो वह अगली फसल के लिए पूंजी कहां से जुटाएगा? गेंदा के इन खेतों में आज सिर्फ फूल नहीं खिले हैं, बल्कि किसानों के सामने खड़ा एक बड़ा आर्थिक संकट भी साफ दिखाई दे रहा है.

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