मध्य प्रदेश के अशोकनगर में भक्ति और भव्यता का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. यहां श्री जिंदाबाबा समिति पिछले 38 वर्षों से लगातार मां जगदम्बा की एक भव्य झांकी सजाती आ रही है. इस बार माता रानी का स्वरूप इतना अलौकिक है कि उसे देखकर भक्त भावविभोर हो रहे हैं. माता को सजाने के लिए लगभग 60 लाख रुपये मूल्य के 44 तोला सोने और साढ़े तीन किलो चांदी के आभूषण पहनाए गए हैं. भक्तों द्वारा अर्पित किए गए नथ, पायल और करधनी जैसे आभूषणों से माता का दरबार जगमगा उठा है.
देवी के बहुमूल्य आभूषणों और गहनों की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन ने हथियारों से लैस गार्डों (चार लोगों की एक टीम) को तैनात किया है. 24 घंटे सशस्त्र प्रहरी मुस्तैदी के साथ निगरानी कर रहे हैं, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न हो सके. साथ ही सीसीटीवी की निगरानी के साथ माता के दरबार में AC भी लगाए गए हैं.
समिति के अध्यक्ष महेंद्र भारद्वाज का कहना है कि भक्तों की अटूट आस्था और समर्थन के कारण यह परंपरा लगातार आगे बढ़ रही है. नवरात्रि के पावन अवसर पर देवी के इस दिव्य और भव्य रूप के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं. आस्था, सुरक्षा और भव्यता का यह अनूठा संगम पूरे जिले में चर्चा का मुख्य विषय बन गया है.
इस बीच, आगर मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में महाअष्टमी के अवसर पर आज सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ जमा हो गई है. देश भर से श्रद्धालु मां बगलामुखी का आशीर्वाद लेने और प्रार्थना करने के लिए यहां पहुंच रहे हैं. मंदिर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और पुलिस बल तैनात किया गया है. प्रशासन पूरी तरह सतर्क है ताकि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो और उनकी यात्रा सुरक्षित रहे.
रतलाम के प्राचीन कालिका माता मंदिर में सुबह 4:00 बजे से 6:00 बजे के बीच आयोजित होने वाला पारंपरिक गरबा इस उत्सव का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. भक्त इसकी तैयारी एक रात पहले से ही शुरू कर देते हैं. पूरी रात जागरण और देवी की प्रार्थना करने के बाद भक्त सुबह-सुबह पूरे उत्साह और जोश के साथ मंदिर पहुंचते हैं. सुबह 4:00 बजे जब मंदिर परिसर में गरबा शुरू होता है, तो भक्ति, संगीत और आस्था का एक अद्भुत संगम देखने को मिलता है. खास बात यह है कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे दूर-दराज के राज्यों से भी भक्त इस परंपरा में शामिल होने के लिए रतलाम आते हैं. पूरी रात प्रार्थना और जागरण में बिताने के बावजूद उनके चेहरों पर थकान का कोई नामोनिशान नहीं होता, बल्कि उनके चेहरों पर भक्ति का तेज और देवी के आशीर्वाद की गहरी उम्मीद साफ झलकती है.