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एशियन गेम्स 2026: सलीमा टेटे की अगुवाई में 44 साल बाद हॉकी में भारत ने जीता गोल्ड, झारखंड की इन 4 बेटियों का कमाल

कप्तान सलीमा टेटे की अगुवाई में भारतीय हॉकी टीम ने फाइनल मुकाबले में चीन को 1-0 से हराकर न सिर्फ गोल्ड मेडल अपने नाम किया. इसके साथ ही एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला हॉकी टीम ने इतिहास रचते हुए 44 साल के लंबे इंतजार को खत्म कर दिया है.

Written By Shailendra
Published: Oct 02, 2026, 08:28 PM IST | Updated: Oct 02, 2026, 08:52 PM IST
Image Credit: एशियन गेम्स में 44 साल बाद महिला हॉकी टीम ने जीता गोल्ड मेडल (Photo- AI)
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झारखंड की माटी में कुछ ऐसा जादू है कि जब यहां की बेटियां हाथ में हॉकी की स्टिक थामती हैं, तो इतिहास अपने आप लिखा जाने लगता है. निक्की प्रधान, सलीमा टेटे, ब्यूटी डुंगडुंग और दीपिका सोरेंग ये चार नाम सिर्फ खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि यह उस जिद की मिसाल हैं, जिसने झारखंड के नाम को दुनिया के नक्शे पर चमका दिया. जी हां, एकदम सही कह रहे हैं हम. दरअसल, एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला हॉकी टीम ने इतिहास रचते हुए 44 साल के लंबे इंतजार को खत्म कर दिया है. कप्तान सलीमा टेटे की अगुवाई में भारतीय हॉकी टीम ने फाइनल मुकाबले में चीन को 1-0 से हराकर न सिर्फ गोल्ड मेडल अपने नाम किया, बल्कि 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक्स के लिए भी सीधे क्वालीफाई कर लिया है. भारत की इस ऐतिहासिक जीत की पटकथा में झारखंड की चार जांबाज बेटियों- कप्तान सलीमा टेटे, निक्की प्रधान, संगीता कुमारी और ब्यूटी डुंगडुंग की अहम भूमिका रही. चलिए इन बेटियों के संघर्ष की कहानी को जानते हैं.

सिमडेगा की सलीमा टेटे के संघर्ष को सलाम
27 दिसंबर, 2001 में झारखंड के सिमडेगा जिले के बेहद गरीब परिवार में जन्मीं सलीमा टेटे की कहानी हर उस इंसान को हिम्मत देती है, जो अभावों से जूझ रहा है. सलीमा टेटे के घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. फिर भी परिवार का भरण-पोषण करने और सलीमा को हॉकी स्टिक और गेंदें दिलाने के लिए उनकी मां सुभानी टेटे और बड़ी बहन अनीमा टेटे ने दूसरों के घरों में बर्तन मांजने और खाना बनाने का काम किया. पिता सुलक्षण टेटे और मां सुभानी टेटे ने मुश्किलों के बावजूद अपनी बेटी के खेल के जुनून को कभी कम नहीं पड़ने दिया.

सिमडेगा के बड़की छापर गांव की रहने वाली सलीमा टेटे ने बांस की खपच्चियों और हाथ से बनी गेंदों से प्रैक्टिस किया है. सलीमा टेटे की फुर्ती और मैदान पर समझ का ही नतीजा था कि वे जूनियर भारतीय टीम की कप्तान बनीं और उड़ीसा की तरफ से खेलते हुए अपनी अलग पहचान बनाई. आज वह भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान हैं, जिनके नेतृत्व में भारत ने 44 साल बाद एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता.

खूंटी की निक्की प्रधान को जानिए
निक्की प्रधान का जन्म 8 दिसम्बर, 1993 को खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड अंतर्गत हेसेल गांव में हुआ है. इनके पिता नाम सोमा प्रधान और माता का नाम जीतन देवी है. यह 2016 ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक में भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा हैं. यह पहली बार भारत के लिए बैंकॉक में हो रहे एशिया कप 2011 में खेली थी, जिसमें यह रजत पदक जीती थीं. मगर, साल 2015 के शुरू में चोट लगने के कारण टीम से बाहर हो गई थी.

इसके बाद साल 2016 में जब ब्राजील ओलंपिक के लिए भारतीय टीम की घोषणा हुई, तो उसमें निक्की प्रधान का नाम था. वे ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली झारखंड की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी बनीं. अब एशियन गेम्स में भारत की हॉकी विरांगना निक्की प्रधान ने देश को गोल्ड मेडल दिलाया.

सिमडेगा की ब्यूटी डुंगडुंग के खून में हॉकी का हुनर
21 जुलाई, 2003 को सिमडेगा के करंगागुरी गांव में जन्मी ब्यूटी डुंगडुंग के तो खून में ही हॉकी दौड़ती है. पिता एम्ब्रोस, मां नीलिमा, दादा गुलम डुंगडुंग, जो खुद नेशनल प्लेयर रहे और तीनों भाई जुवेल, शक्ति और सचिन सबके हाथ में हॉकी की स्टिक रही. ऐसे में ब्यूटी डुंगडुंग का हॉकी की तरफ खिंचाव स्वाभाविक था.

सिमडेगा के एसएस बालिका हाई स्कूल से निकलकर आगे बढ़ीं ब्यूटी ने दिसंबर 2022 में स्पेन के वालेंसिया में हुए FIH विमेंस नेशंस कप में भारत की सीनियर टीम के लिए अपना डेब्यू किया. यहां उन्होंने दिखा दिया कि वे अपनी पारिवारिक विरासत को बहुत आगे ले जाने वाली हैं.

दीपिका सोरेंग: नई पीढ़ी की गोल मशीन
दीपिका सोरेंग का जन्म 17 दिसंबर, 2003 को सिमडेगा जिले के केरसई प्रखंड के करंगागुड़ी सेमरटोली में हुआ. इन्होंने यहां तक पहुंचने के लिए बहुत संघर्ष किया. दीपिका सोरेंग के पिता का साया बचपन में सिर से उठ गया था. जब वह छोटी थीं तब दीपिका के पिता दानिएल सोरेंग की हत्या कर दी गई थी. उनकी मां फ्रिस्का सोरेंगे ने राऊरकेला में दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का गुजारा किया. दीपिका सोरेंग ने गरीबी देखी और विपरीत हालात में भी ऊंची उड़ान हासिल की.

दीपिका सोरेंग आज भारतीय हॉकी की सबसे होनहार युवा फॉरवर्ड्स में से एक हैं. जून 2023 में जापान के काकामिगाहारा में हुए विमेंस जूनियर एशिया कप में जब दीपिका उतरीं, तो उन्होंने 6 मैचों में 7 गोल दागकर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. भारत ने वह टूर्नामेंट जीता और दीपिका दूसरी सबसे ज्यादा गोल करने वाली खिलाड़ी बनीं. इसके बाद डसेलडोर्फ, सैंटियागो जूनियर वर्ल्ड कप और ओमान में हुए FIH हॉकी5 विश्व कप में भारत ने रजत पदक जीता. इसमें उन्होंने कमाल दिखाया. अब एशियन गेम्स में जलवा देखने को मिला.

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शैलेंद्र जी न्यूज के रीजनल चैनल, जी बिहार झारखंड की डिजिटल टीम में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम करते हैं. वह बिहार और झारखंड की सियासत और क्राइम समेत कई समसामयिक मुद्दों पर न्यूज लिखते हैं. वह कभी-कभी राष्ट्रीय मुद्दों पर भी लिखते हैं. उनको मीडिया के तीनों प्रारूप प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल में काम करने का अनुभव. जनसंदेश टाइम्स, स्वतंत्र चेतना, टीवी 100, साधना न्यूज, एफएम न्यूज आदि न्यूज चैनलों से होते हुए न्यूज नेशन, इंडिया अहेड, ईटीवी भारत और न्यूज स्ट्रीट मीडिया (NYOOOZ) में अहम जिम्मेदारी निभाई. मीडिया जगत में सफर पिछले 12 सालों से बिना रुके जारी है.
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