रांची में SIR पर बढ़ा सियासी पारा: 6.44 लाख वोटर्स को नोटिस मिलने से हड़कंप, बीजेपी-जेएमएम और कांग्रेस आमने-सामने
Jharkhand Sir: रांची में SIR पर सियासी पारा चढ़ गया है. 6.44 लाख वोटर्स को नोटिस मिला है, जिसके बाद से बीजेपी-जेएमएम और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं.
झारखंड में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) प्रक्रिया चल रही है. इसी के साथ, सभी जिलों में दावे और आपत्तियां दर्ज करने की प्रक्रिया भी जारी है. रांची जिले में लगभग 21.42 लाख मतदाता हैं, जिनमें से करीब 6.44 लाख मतदाताओं (कुल वोटर्स का 24%) को नोटिस जारी किए गए हैं. लगभग 2.08 लाख मतदाताओं ने मैपिंग की प्रक्रिया पूरी नहीं की थी, जबकि 4.35 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों में कमियां पाई गई हैं. जिन मतदाताओं के मामले में आपत्तियां हैं, उन्हें आपत्ति समाधान केंद्रों पर तय मानकों के अनुरूप दस्तावेज साथ ले जाने होंगे. इन आपत्तियों के कारण मतदाताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
हटिया विधानसभा- 1,38 हजार 523 लोगों को नोटिस
कांके विधानसभा- 1,31 हजार 512 लोगों को नोटिस
रांची विधानसभा- 95,581 वोटर्स को नोटिस
मांडर विधानसभा- 1लाख 35 वोटर्स को नोटिस
खिजरी विधानसभा- 95 हजार 581 वोटर्स को नोटिस
तमाड़ विधानसभा- 44 हजार लोगों को नोटिस
सिल्ली विधानसभा- 39 हजार वोटर्स को नोटिस
'वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाने की प्रक्रिया जरूरी'
SIR प्रकिया और नोटिस दिए जाने को लेकर बीजेपी प्रदेश महामंत्री गणेश मिश्रा ने कहा कि चुनाव आयोग का मतदाता संशोधन का जो काम चल रहा है और जिन लोगों को ऑब्जेक्शन दिया गया है. वो या तो अब यहां नहीं हैं, यहां से कहीं और शिफ्ट हो गए हैं. उनकी मृत्यु हो चुकी है या फिर विदेशी नागरिक हैं. इसलिए, वे अभी इस श्रेणी में आते हैं. वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाने की प्रक्रिया जरूरी है और यह चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है. इसे चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं के तहत किया जा रहा है. पहले ऐसी खबरें आई थीं कि गैर-भारतीय नागरिक- जैसे अफगान या बांग्लादेशी नागरिक वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वा रहे हैं. अगर ऐसा है, तो यह सही नहीं है. वोटर लिस्ट में सिर्फ देश के नागरिकों का ही नाम होना चाहिए. यह प्रक्रिया एक अच्छा कदम है.
'ट्राइबल एंड माइनरिटी को टारगेट किया जा रहा है'
झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि ऑब्जेक्शन किस मायने में, आखिर ऑब्जेक्शन क्यों हुआ, क्या ये आपत्तियां खास लोगों के खिलाफ हैं? क्या फॉर्म 7 जो बीजेपी के कार्यकर्ता हर बूथ पर भर कर जमा कर रहे थे , जो कई जगह पकड़े गए, क्या वैसे लोग हैं जिन पर आपत्ति है? क्या बीजेपी के इशारे पर इस तरह की कवायद हो रही है, ये देखना पड़ेगा. जो लोग यहां मौजूद हैं, जिनका वजूद है, घर परिवार है, कहीं नौकरी कर रहे हैं, जिनका प्रॉपर डॉक्यूमेंट है, फिर उन्हें नोटिस क्यों देंगे, क्यों हटाएंगे? ये पूरी प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण है, इसके जरिए खास कर ट्राइबल एंड माइनरिटी को टारगेट किया जा रहा है.
'बीजेपी और उनके एजेंसियों को क्या सुझता है?'
कांग्रेस विधायक राजेश कच्छप ने कहा कि कौन जानता है कि ता नहीं बीजेपी और उनके एजेंसियों को क्या सुझता है? वे अब खुद को छोड़कर बाकी सभी को बाहरी मानते हैं. अगर उनके बस में होता, तो वे मुझे भी बाहरी करार दे देते. अगर वोटर छूट जाएगा तो प्रजातंत्र रहेगा कैसे? प्रजा तंत्र का मतलब है, अंतिम व्यक्ति भी अपना मतदान कर सके. बीजेपी का जो चाल चरित्र है, पॉलिटिकल नफा नुकसान देख रही है. योग्य वोटर्स को हर हाल में शामिल किया जाना चाहिए. देश में एक समान वोटर सिस्टम होना चाहिए. वोटर रजिस्ट्रेशन कोई नई बात नहीं है, यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया रही है जो पहले ठीक-ठाक चलती थी. 'बांग्लादेशी' और 'घुसपैठिए' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके विवाद खड़ा करने और अफरातफरी फैलाने की कोशिश की गई, ऐसा नहीं होना चाहिए था.
रिपोर्ट: कुमार चंदन