झारखंड के गुमला जिले में जमीन की कथित हेराफेरी और फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कराए जाने के आरोपों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. खासकर चैनपुर प्रखंड में रौतिया समाज से जुड़े लोगों की जमीनों को लेकर समय-समय पर विवाद और शिकायतें सामने आती रही हैं. कई मामलों में प्राथमिकी भी दर्ज होने की बात सामने आई है. अब चैनपुर के मौजा छतरपुर की एक जमीन को लेकर ऐसा ही गंभीर मामला सामने आया है, जिसने जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया और भू-अभिलेखों की जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ताजा मामला मौजा छतरपुर, थाना चैनपुर, थाना नंबर 159, खाता नंबर 45 से जुड़ा है.
कैसे हुआ इस खेल का पर्दाफाश?
जमीन की असली रैयत जिरामुनी देवी और उनके तीन बेटे कुलदीप रौतिया, कमलेश रौतिया एवं लखन रौतिया हैं. आरोप है कि इस जमीन को ऐसे व्यक्ति के नाम से रजिस्ट्री करा दी गई, जिसका उक्त खाता और जमीन से कोई संबंध ही नहीं है. मामले में नया मोड़ तब आया, जब वीरेंद्र कुमार रौतिया ने चैनपुर थाना में लिखित शिकायत देने के साथ गुमला न्यायालय में शपथ पत्र दाखिल कर पूरी घटना का खुलासा किया. शपथ पत्र में उसने स्पष्ट रूप से कहा है कि खाता नंबर 45 की जमीन से उसका कोई संबंध नहीं है और वह उक्त जमीन का मालिक या रैयत नहीं हैं.
शराब पिलाकर लिया गया था आधार कार्ड
वीरेंद्र रौतिया के अनुसार, 24 अगस्त 2026 को चैनपुर के कुछ लोग उन्हें लाल रंग की कार से गुमला लेकर आए. आरोप है कि उन्हें एक होटल में ले जाकर भोजन कराया गया और शराब पिलाई गई. इसके बाद उनका आधार कार्ड और फोटो यह कहकर लिया गया कि उन्हें सरकारी राशि दिलाई जाएगी. उन्होंने शपथ पत्र में आरोप लगाया है कि होटल में ही किसी राजकुमार नामक व्यक्ति के माध्यम से उन्हें कुछ रुपये दिए गए. वहां मौजूद लोगों ने रुपये लेते हुए उनकी तस्वीर भी खींची और बाद में यह कहकर राशि वापस लेने की बात कही कि वे नशे में हैं तथा चैनपुर पहुंचने पर पैसे दे दिए जाएंगे.

कैसे चल रहा है पूरा गोरखधंधा?
वीरेंद्र रौतिया का आरोप है कि इसके बाद उनसे कई कागजातों पर हस्ताक्षर कराए गए. फिर उन्हें निबंधन कार्यालय ले जाया गया, जहां उनकी तस्वीर खिंचवाई गई. इसके बाद उन्हें चैनपुर लाकर मात्र तीन हजार रुपये दिए गए और दोबारा शराब पिलाकर घर छोड़ दिया गया. वीरेंद्र के अनुसार, बाद में जब उन्हें पूरे मामले की जानकारी हुई तो वे यह जानकर हैरान रह गए कि खाता नंबर 45 की जमीन में उनके नाम का इस्तेमाल करते हुए रांची की सुनीता देवी के नाम लगभग एक एकड़ दस डिसमिल जमीन का बिक्री-पट्टा/रजिस्ट्री दस्तावेज तैयार कराया गया है.
'मैं जमीन का मालिक नहीं'
अपने शपथ पत्र में वीरेंद्र रौतिया ने कहा है कि उक्त जमीन के वास्तविक मालिक जिरामुनी देवी और उनके पुत्र हैं. उन्होंने यह भी कहा है कि वह सुनीता देवी को नहीं जानते और न ही उन्होंने अपनी जानकारी एवं इच्छा से उक्त जमीन की बिक्री के लिए कोई दस्तावेज तैयार कराया है. उन्होंने न्यायालय में अपनी पत्नी सविता देवी के साथ उपस्थित होकर होशो-हवास में शपथ पत्र देते हुए कहा है कि उक्त जमीन की रजिस्ट्री कराने में उनकी कोई भूमिका नहीं है.
थाने में शिकायत, कार्रवाई का इंतजार
वीरेंद्र रौतिया ने इस संबंध में चैनपुर थाना में लिखित शिकायत भी दी है. हालांकि, समाचार लिखे जाने तक मामले में पुलिस की ओर से किसी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. अब यह जांच का विषय है कि आखिर जमीन की रजिस्ट्री किस आधार पर हुई, दस्तावेजों में किसके नाम और किस क्षमता में हस्ताक्षर कराए गए तथा निबंधन के दौरान प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों का सत्यापन किस प्रकार किया गया.
असली रैयतों ने रजिस्ट्री रद्द करने की मांग की
इधर, जमीन की वास्तविक रैयत जिरामुनी देवी और उनके पुत्र कुलदीप रौतिया, कमलेश रौतिया एवं लखन रौतिया ने कथित रूप से गलत तरीके से कराई गई रजिस्ट्री को तत्काल रद्द करने की मांग की है. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग प्रशासन से की है.
रौतिया समाज ने दी आंदोलन की चेतावनी
मामले को लेकर रौतिया समाज में भी आक्रोश है. समाज के लोगों का कहना है कि यदि किसी की जमीन को गलत तरीके से दूसरे व्यक्ति के नाम हस्तांतरित करने का प्रयास हुआ है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए. समाज ने चेतावनी दी है कि यदि कथित गलत रजिस्ट्री को रद्द नहीं किया गया और मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे.
अब इस पूरे मामले में प्रशासन, पुलिस और निबंधन विभाग की जांच से यह स्पष्ट होगा कि खाता नंबर 45 की जमीन की रजिस्ट्री किन दस्तावेजों और परिस्थितियों में हुई तथा वीरेंद्र रौतिया के नाम का इस्तेमाल किस प्रकार किया गया. मामला गंभीर होने के कारण स्थानीय लोगों की नजर अब प्रशासनिक जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी है.
रिपोर्ट- रणधीर