झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो स्टील प्लांट में सभी गेट बंद कर उत्पादन ठप किए जाने के मामले में कड़ी नाराजगी जताई है. अदालत ने आज यानी रविवार (18 अक्तूबर, 2026) को छुट्टी के दिन इस मामले की विशेष सुनवाई की और बोकारो के उपायुक्त को प्लांट के सभी गेट खुलवाने और कर्मचारियों की सुचारु रूप से प्लांट के अंदर आवाजाही सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया.
बता दें कि जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान बोकारो डीसी ऑनलाइन माध्यम से अदालत में पेश हुए. कोर्ट ने उनसे पूरे मामले पर जवाब देने के लिए कहा. वहीं, इस मामले की अगली सुनवाई अब 28 अक्टूबर को होने वाली है. सुनवाई के दौरान सेल (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने बहस की.
बोकारो स्टील प्लांट में विस्थापित अप्रेंटिस संघ के बैनर तले नियोजन की मांग को लेकर पिछले नौ दिनों से भूख हड़ताल और आंदोलन चल रहा है. शनिवार (17 अक्टूबर, 2026) को आंदोलनकारियों ने प्लांट के सभी मुख्य द्वार और प्रवेश मार्ग को पूरी तरह से जाम कर दिया था, जिससे करीब पांच हजार कर्मचारी प्लांट के अंदर ही फंसे रह गए थे और उत्पादन और ढुलाई का काम पूरी तरह ठप हो गया था.
बोकारो जिला प्रशासन ने करीब 24 घंटे बाद सभी गेट को खाली कराया और प्लांट के मुख्य द्वार के 200 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू कर दी है. वहीं, उपायुक्त ने अदालत को बताया कि गेट खाली कराकर स्थिति को सामान्य कर दिया गया है. प्रशासन ने प्लांट के आसपास पांच या उससे अधिक लोगों के जुटने, प्रदर्शन, या रैलियों पर रोक लगा दी है.
बीते दिन, शनिवार को झारखंड के मंत्री राधाकृष्ण किशोर और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर विस्थापितों की मांगों का समर्थन किया था. विस्थापित संगठनों की मुख्य मांगों में अप्रेंटिस प्रशिक्षित युवाओं की नियमित नियुक्ति, चतुर्थ वर्गीय पदों पर बहाली और विस्थापित परिवारों के लिए स्पष्ट रोजगार नीति बनाना शामिल है.
-आईएएनएस