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आजादी के बाद पहली बार देश में जातिगत जनगणना होने वाली है. आगामी 1 अक्टूबर से पहाड़ी राज्यों जैसे- लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फबारी वाले क्षेत्रों से इसकी शुरुआत होगी. वहीं, देश के बाकी हिस्सों में 1 मार्च 2027 यह काम शुरू किया जाएगा. जातीय जनगणना से पहले झारखंड में कांग्रेस पार्टी ने ओबीसी के लिए अलग कोड की मांग की है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि झारखंड जैसे राज्यों के लिए जातिगत जनगणना के आंकड़े अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. यह बेहद जरूरी है कि जनगणना के दौरान अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की जातिगत पहचान और उनकी वास्तविक जनसंख्या का स्पष्ट एवं वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया जाए.
OBC समाज के पिछड़े होने का दावा
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में पिछड़े वर्गों की आबादी बड़ी संख्या में है, लेकिन सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े इस वर्ग को आज भी उनकी जनसंख्या के अनुरूप अधिकार और हिस्सेदारी का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि मंडल कमीशन की सिफारिशों के आधार पर पिछड़े वर्गों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है, लेकिन झारखंड में पिछड़े वर्गों को इसका समुचित लाभ नहीं मिल रहा है. उन्होंने साफ कहा कि जनगणना प्रपत्र में अनुसूचित जनजाति (ST) और अनुसूचित जाति (SC) की तरह ही अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की स्पष्ट एवं अलग पहचान के लिए अलग कोड की व्यवस्था की जाए.
16 सितंबर को लोकभवन तक मार्च का ऐलान
वहीं, झारखंड कांग्रेस विधायक के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि जनगणना में जाति दर्ज करने के लिए पहले से निर्धारित ड्रॉपडाउन सूची या अलग से ओबीसी का विशेष कॉलम उपलब्ध नहीं कराया गया है. उन्होंने कहा कि इस बार की जनगणना में व्यक्ति की ओर से स्वयं घोषित जाति दर्ज करने के लिए एक खुला कॉलम रखा गया है. ऐसे में जातियों की पहचान और आंकड़ों की शुद्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं. प्रदीप यादव ने केंद्र सरकार को जनगणना प्रपत्र में ओबीसी के लिए अलग कोड सुनिश्चित करने की मांग की है. पार्टी ने इसी मांग को लेकर 16 सितंबर को बापू वाटिका से लोकभवन तक मार्च करने का ऐलान किया है.
2011 में हुई जनगणना में भी जातिगत आंकड़े इकट्ठे किए गए थे, जिन्हें आजतक सार्वजनिक नहीं किया गया. केंद्र सरकार की ओर से 2021 में सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर करके कहा गया था कि जनगणना में जातियों से संबंधित आंकड़ों में काफी गलतियां हैं. ऐसे में यह आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जा सकते.- प्रदीप यादव, कांग्रेस विधायक
ओबीसी कोड की जरूरत क्यों पड़ी?
प्रदीप यादव ने कहा कि अगर आगामी जनगणना में उचित व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में भी इसी प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और सभी वर्गों की उचित भागीदारी सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण आधार है. जब तक पिछड़े वर्गों की वास्तविक जनसंख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही एवं विस्तृत आंकड़ा सामने नहीं आएगा, तब तक उनके लिए प्रभावी नीतियां, कल्याणकारी योजनाएं और आरक्षण से जुड़े निर्णय वैज्ञानिक, न्यायसंगत एवं वास्तविक जरूरतों के अनुरूप लेना कठिन होगा.