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'सब पढ़ो, सब बढ़ो' का सच: चतरा में उफनती नदी पार कर स्कूल पहुंचते हैं मासूम, हादसे का इंतजार कर रहा सिस्टम?

Chatra News: चतरा के मयूरहंड प्रखंड के बाराडीह बेला गांव के स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं. उत्क्रमित मध्य विद्यालय ढोढी पहुंचने के लिए सुरक्षित पुल नहीं होने के कारण बच्चों और शिक्षकों को उफनती नदी की तेज धार पार करनी पड़ती है.

'सब पढ़ो, सब बढ़ो' का सच: चतरा में उफनती नदी पार कर स्कूल पहुंचते हैं मासूम, हादसे का इंतजार कर रहा सिस्टम?
Image Credit: चतरा में उफनती नदी पार कर स्कूल पहुंचते हैं मासूम (वीडियो ग्रैब)

Chatra News: झारखंड सरकार का स्लोगन है'सब पढ़ो, सब बढ़ो', लेकिन चतरा में इसकी हकीकत कुछ और ही है. मयूरहंड प्रखंड के बाराडीह बेला गांव के मासूम हर दिन जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर हैं. उत्क्रमित मध्य विद्यालय ढोढी पहुंचने के लिए कोई सुरक्षित पुल नहीं है, ऐसे में बच्चों को उफनती नदी की तेज धार पार कर स्कूल जाना पड़ता है. आंखों में भविष्य संवारने का सपना लिए घर से निकलने वाले इन बच्चों के सामने बारिश के दिनों में नदी सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है. चुनाव के दौरान नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही बच्चे फिर अपने इस जानलेवा जल-संघर्ष में अकेले रह जाते हैं.

बढ़ते जलस्तर में हर दिन जान का खतरा
स्कूल के शिक्षक वासुदेव दांगी के मुताबिक, विद्यालय में 91 बच्चे नामांकित हैं. इनमें करीब 70 फीसदी छात्र और खुद शिक्षक हर दिन इसी तेज धार को पार कर स्कूल पहुंचते हैं. मौसम बिगड़ते ही बच्चों और शिक्षकों के बीच डर का माहौल बन जाता है. जलस्तर बढ़ने के खतरे को देखते हुए कई बार समय से पहले ही स्कूल की छुट्टी करनी पड़ती है. इतना ही नहीं, कई बार बच्चे स्कूल में ही फंस जाते हैं और शाम ढलने पर परिजनों व शिक्षकों को उन्हें अपनी गोद में उठाकर खतरनाक नदी पार करानी पड़ती है.

गोद में उठाकर नदी पार कराने को मजबूर परिजन
पार्वती, आर्यन और शिवम समेत दर्जनों बच्चों का कहना है कि बारिश के मौसम में उनकी पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो जाती है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर अचानक आई बाढ़ के दौरान कोई हादसा हो गया और किसी घर का चिराग बुझ गया, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? बच्चों की यह मजबूरी अब सिस्टम की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रही है.

अधिकारी बोले, जल्द होगा समाधान
लगातार उठ रहे सवालों के बीच जिला शिक्षा अधीक्षक रामजी कुमार ने कहा कि इस गंभीर समस्या को चतरा उपायुक्त के समक्ष रखा जाएगा. वहीं, शिक्षा पदाधिकारी कंचन कुमारी का दावा है कि जिले के DMFT फंड में पर्याप्त राशि मौजूद है और जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा. अब सवाल यही है कि फाइलों में दर्ज ये वादे जमीन पर कब उतरेंगे और बाराडीह बेला के इन नौनिहालों को सुरक्षित रास्ता कब मिलेगा.

रिपोर्ट: धर्मेंद्र पाठक

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About the Author

Rupak Kumar

Rupak Kumar

रुपक कुमार मिश्रा zee bihar Jharkhand की डिजिटल टीम में बतौर Sub-editor के तौर पर कार्यरत है. वे राजनीति, क्राइम, यूटिलिटी और रुटीन खबरों पर काम करते हैं. इसके अलावा, टेक्नोसिस मीडिया में इन्हें एक साल काम करने का अनुभव है. शिक्षा की बात करें तो राजर्षि टंडन ओपन यूनिवर्सिटी से इन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है.
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