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बड़गाईं जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को PMLA कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने मुख्यमंत्री को अब 21 सितंबर को कोर्ट में पेशी का आदेश दिया है. इतना ही नहीं कोर्ट ने मुख्यमंत्री को वर्चुअल रूप से कोर्ट में पेश होने की छूट दी है. वैसे तो हाईकोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद सीएम हेमंत सोरेन को आज (शनिवार, 19 सितंबर) ही पीएमएलए कोर्ट में पेश होना था, लेकिन उनके अधिवक्ता ने सीएम की व्यस्तता का हवाला देते हुए पेश होने में असमर्थता जताई थी. जिसके बाद न्यायाधीश योगेश कुमार ने पेशी के लिए 21 सितंबर की तारीख तय की है. अधिवक्ता अविनाश पांडेय ने बताया कि 21 सितंबर को सीएम को चार बजे तक पेश होना होगा. उसी दिन आरोप गठन पर बहस होगी.
इसी मामले में हेमंत सोरेन ने हाईकोर्ट में आपराधिक रिवीजन याचिका दाखिल की थी. इसमें PMLA कोर्ट की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी. सीएम हेमंत सोरेन ने अपनी याचिका में कहा था कि जब तक उनकी याचिका पर सुनवाई पूरी नहीं होती, तब तक आरोप तय करने की प्रक्रिया रोकी जाए. हालांकि, हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया.
अन्य आरोपियों पर तय हो चुके हैं आरोप
PMLA की विशेष अदालत ने 8 जून को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के डिस्चार्ज पिटीशन को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने ED की ओर से पेश किए गए तथ्यों के आधार पर कहा था कि इस स्तर पर हेमंत सोरेन के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है. इस मामले में कई अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप पहले ही तय किए जा चुके हैं. अब हेमंत सोरेन के मामले में भी आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होनी है.
ED ने 2024 में हेमंत सोरेन को किया था गिरफ्तार
ED का आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन का अवैध अधिग्रहण और हस्तांतरण किया गया. एजेंसी ने हेमंत सोरेन पर जमीन से जुड़े कथित अवैध कब्जे, मालिकाना हक और मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्तता के आरोप लगाए हैं. इसी मामले में ED ने 2024 में हेमंत सोरेन को गिरफ्तार भी किया था.