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झारखंड में छात्र आंदोलन को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है. बीजेपी ने छात्रों पर दर्ज FIR को वापस करने के लिए राज्य सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है. इसके बाद बीजेपी ने सभी जिलों में आंदोलन की घोषणा की है. बीजेपी ने 8 सितंबर से सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन के साथ एसपी और डीसी कार्यालय के घेराव करने का ऐलान किया है. प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि भाजपा हर कदम पर छात्रों के इस न्याय की लड़ाई में मजबूती से खड़ी रहेगी. उन्होंने 8 तारीख से प्रतिदिन 6 जिलों में घेराव कार्यक्रम करने की बात कही है. इसी तमाम मुद्दों पर ज़ी बिहार-झारखंड के संवाददाता कुमार चंदन ने बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी से बातचीत की.
सवाल- बीजेपी को क्यों लगता है कि छात्रों की आवाज को मजबूती से आगे लाना चाहिए?
जवाब- नहीं, आप सबने देखा होगा कि विद्यार्थी शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को लेकर के धरना पर बैठे हुए थे और सरकार उस समय संज्ञान नहीं ले रही थी. 6 तारीख से विधानसभा प्रारंभ होना था, तो हम 5 तारीख को छात्रों के बीच गए थे और उनकी समस्याओं को हमने सुना था. बच्चों ने हमें बताया था कि बहालियों में कैसे और क्या-क्या गड़बड़ियां हुई हैं. सरकार उस पर कोई ध्यान नहीं दे रही थी. बच्चों ने जैसा बताया उससे मैं कह सकता हूं कि झारखंड के बच्चों के लिए, यहां के लोगों के लिए जो हक था, यहां के लोगों को जॉब नहीं मिलती. JSSC और JPSC ने उसको बेच दिया. स्वाभाविक है कि बच्चों आक्रोश में थे. उस आक्रोश के बाद भी सरकार कोई संज्ञान नहीं ले रही थी. बच्चों की एक ही मांग थी कि सीबीआई से इसको जांच कराया जाए. बच्चों ने जब 10 तारीख को विधानसभा का मार्च किया, तो उनके ऊपर लाठियां भी चलीं, वाटर कैनन भी छोड़ा गया, आंसू गैस भी छोड़े गए, ब्लेडयुक्त कंटेले तार भी लगाए गएय. सरकार एक प्रकार से बच्चों को झुनझुना ही देती रही. उसके बाद भी जब बच्चे फिर धरना पर बैठे, भूख हड़ताल की और फिर से मुख्यमंत्री के आवास को घेरने का ऐलान किया. तो सरकार ने आनन-फानन में JPSC की कई नियुक्तियों को रद्द किया. उसमें भी JSSC का मात्र एक CGL को रद्द किया. उस दिन भी मैंने कहा था कि भाई ये लोग बच्चों की आंखों में सिर्फ धूल झोंक रहे हैं. बच्चे उतना समझे नहीं. बच्चे बड़ी खुशी मनाए, उत्सव मनाए. फिर कोर्ट ने उस पर तुरंत स्टे कर दिया, जो होना भी था. उसके बाद फिर 21 तारीख को बच्चों ने पुतला दहन का कार्यक्रम रखा था. उस समय जो JMM के गुंडों ने बाहर निकल कर मारपीट की. ये किसी से छुपा हुआ नहीं है. बच्चियों तक को नहीं छोड़ा. उनके साथ किस प्रकार से दुर्व्यवहार किया गया, वो सब आज वीडियो में सब कैद भी है. उन लोगों के ऊपर सरकार ने कोई केस नहीं किया, उल्टे इन बच्चों के ऊपर केस किया. इसलिए हम सब लोगों ने शुरू से ही कहा है कि बच्चों की मांग हम वाजिब मानते हैं और सरकार को उनकी मांगों को स्वीकार करना चाहिए. सरकार अगर केस नहीं हटाएगी तो हम लोग सड़कों पर उतर करके आंदोलन करेंगे.
सवाल- सरकार के लोग तो कह रहे हैं कि उत्पात मचाने वाले लोग बीजेपी के थे. छात्रों की आड़ में उन लोगों ने ऐसा किया है.
जवाब- नहीं, मैंने कहा है कि आप वीडियो फुटेज देख लीजिए. गिरिडीह और हजारीबाग में JMM के जिला अध्यक्ष डंडे लेकर छात्रों को पीट रहे हैं. रामगढ़ में उनके जिला अध्यक्ष कह रहे हैं कि कोई पुतला दहन करेगा तो पटक-पटक कर मारेंगे. वो भी आप देख लीजिए. रांची में कौन-कौन लोग थे, जिन्होंने FIR किया है. हम गए थे, हमने लोगों से पूछा कि सरकार का क्यों विरोध कर रहे हो? इतने सारे प्रमाण के बाद भी अगर कोई कह रहा है कि बीजेपी के गुंडे हैं, तो ये और भी डबल गुंडागर्दी है. इससे बड़ी गुंडागर्दी और क्या होगी? अगर वो सड़क पर ही निपटना चाहते हैं, तो पुलिस को बोल दें, किनारे कर दें. हम लोग निपट लेंगे इन लोगों से. कितना उन लोगों के पास डंडे में ताकत है.
सवाल- MMDR पर सरकार आंदोलन की तैयारी में हैं. सत्तापक्ष का कहना है कि बीजेपी को राज्य हित में सोचना चाहिए.
जवाब- बीजेपी राज्य हित में ही सोच रही है. भारत सरकार ने जो MMDR एक्ट बनाया, वो सब राज्यों के हित में है. मैंने कई एक बार कहा है कि MMDR एक्ट क्या है, इसको समझना चाहिए. वो एक्ट देश के लिए बना है, अकेले झारखंड के लिए नहीं है. वो कानून संपूर्ण भारतवर्ष में समान रूप से लागू होगा. 9B में एक थोड़ा-सा संशोधन किया है कि कोई भी राज्य सरकार मनमानी तरीके से अतिरिक्त कोई टैक्स नहीं लगा सकती है. यहां कोयला है तो कहीं न कहीं वो पावर प्लांट में जाता होगा. अगर कोयला महंगा बेचा जाएगा तो वहां बिजली भी महंगी पैदा होगी. फिर यहां के लोग भी महंगी बिजली लेंगे. सामान्य भाषा में मैं समझा देता हूं कि झारखंड में कोयला पर अतिरिक्त सेस कितना लगाया, ₹450 प्रति टन. अगर एक हाइवा में 30 टन कोयला जाता है, तो उस कंपनी या खरीदार को ₹13,500 अतिरिक्त सेस देना पड़ेगा. फिर वो कंपनी झारखंड से कोयला क्यों खरीदेगी? विदेश से या उड़ीसा से क्यों नहीं मंगाएगी? छत्तीसगढ़ से क्यों नहीं मंगाएगी? देश के किसी भी हिस्सों से कोयला मंगाएगी. इसका नतीजा क्या हुआ, इसका परिणाम क्या होगा? CCL और BCCL का कोयला बिकना बंद हो जाएगा. प्रोडक्शन कम हो जाएगा, क्योंकि यहां से कोई ले नहीं रहा होगा. यहां जितना कोयला का कारोबार अवैध रूप से हो रहा है, वह और भी बढ़ जाएगा. इसी तरह से आयरन और अन्य सारी खदानें बंद हो जाएंगी. तो कहने का अर्थ है कि ये लोग इसलिए विरोध कर रहा हैं कि झामुमो-कांग्रेस के लोगों की तिजोरी में पैसा आना बंद हो जाएगा. इसलिए ये लोग सबकुछ लीगल नहीं होने देना चाहते. साढ़े छह साल में कितना बालू घाट की इन्होंने नीलामी किया? इन साढ़े छह वर्षों में कितनी पत्थर के खदानों की लीज दिया है? सब लोगों को पता है कि खदान को लीज में लेने के लिए ₹1 करोड़ की घूस देनी पड़ती है.
सवाल- SIR को लेकर भी आप पर आरोप लग रहे हैं कि उनके वोटर्स के नाम कटवाए जा रहे हैं. निर्वाचन पदाधिकारी के पास कम्प्लेन तक गई है.
जवाब- देखो, SIR क्या है? जो वैध मतदाता है, उसके नाम सूची से हटे नहीं, इसकी फिक्र करना और जो गड़बड़ मतदाता है, उसे बाहर करना. अगर गलत हो रहा है कि तो कोई भी व्यक्ति उसकी कम्प्लेन कर सकता है. ऑनलाइन भी कर सकता है, ऑफलाइन भी कर सकता है. इसमें क्या गुनाह है भाई? बाकी तो जो इलेक्शन कमीशन है, वो देखेगी, जांचेगी, परखेगी. हमको लगेगा कि नहीं चंदन जी गड़बड़ हैं, इनका दो-दो जगह वोटर लिस्ट में नाम है, तो हम कम्प्लेन करेंगे. इसमें क्या बुराई है भाई? बाकी तो इलेक्शन कमीशन फिर देखेगा कि चंदन जी का जो आरोप है, वो सही है या गलत. यह जांच वो करेगी. इन लोगों के पेट में दर्द क्यों हो रहा है भाई? अगर कोई नाम गलत तरीके से चढ़ा हुआ है, तो उसकी कम्प्लेन करना चाहिए. फॉर्म-7 को भर करके जमा करने में क्या दिक्कत है? आज मैंने अखबार में कहीं पढ़ा है कि पाकुड़ या साहिबगंज में कहीं अपात्र थे चार लोग, जिसके ऊपर FIR भी हुई है. मैंने तो बार-बार कहा है कि यहां जिस प्रकार से डेमोग्राफी बदलाव हुआ है, तो उससे तो साफ लगता है कि यहां पर इल्लीगल माइग्रेट हो करके बांग्लादेश से, बंगाल और फिर झारखंड में आकर के मतदाता सूची में लोगों ने नाम दर्ज कर रखा है. तो उसकी जांच होनी ही चाहिए.