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भाजपा नेता गौरव भाटिया ने कहा, हम सभी जानते हैं कि राहुल गांधी एक ऐसे नेता प्रतिपक्ष हैं जो कि अराजक हैं. संविधान को पढ़िए और प्रदर्शन करना आपका मौलिक अधिकार है, लेकिन क्या प्रदर्शन का अधिकार अपनी सीमाएं पार करके किसी भी स्थान पर करना है?... प्रदर्शन करने के लिए प्रदर्शन स्थल होते हैं और वह शांतिपूर्ण तरीके से किया जाता है, जिसके लिए हमें पहले ही इजाजत लेनी होती है.
10-11 तारीख को कांग्रेस और राहुल गांधी ने कहा कि हम प्रदर्शन करते हुए सर्वोच्च न्यायालय जाएंगे, हम पूछना चाहते हैं कि यह क्या बात हुई? यह न्याय का मंदिर है और यहां भीड़तंत्र नहीं चलेगा'
'विरोध के नाम पर सुप्रीम कोर्ट में गुंडागर्दी की छूट नहीं'
गौरव भाटिया ने कहा, सबसे पहले, आज जिन विरोध-प्रदर्शनों पर चर्चा हो रही है, उनसे जुड़े कई मामलों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई. एक वरिष्ठ वकील के तौर पर, मैं भी सुप्रीम कोर्ट में पेश हुआ था, वहां क्या हुआ, इस बारे में मैं कुछ तथ्य और जानकारी साझा करूंगा. सबसे पहले, मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ यह कहता हूं, संविधान को पढ़ें. विरोध करने का अधिकार आपका मौलिक अधिकार है, लेकिन क्या विरोध करने का अधिकार किसी को भी अपनी सीमाएं पार करने, संविधान के दायरे से बाहर जाने, और कहीं भी, चाहे वह सार्वजनिक जगह हो, सड़क हो या सुप्रीम कोर्ट परिसर, गुंडागर्दी करने या नारे लगाने की छूट देता है?'
BJP के नेशनल स्पोक्सपर्सन गौरव भाटिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए राहुल गांधी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस भारत की डेमोक्रेसी में राहुल गांधी के अराजकता के सिंबल बनने के बारे में है. मैं इस बारे में फैक्ट्स के साथ बात करूंगा और आज माननीय सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी हुई है. मैं आपके सामने कुछ फैक्ट्स रखना चाहूंगा. हम सब जानते हैं कि विपक्ष के लीडर राहुल गांधी को भारत के लोग कैसे देखते हैं, उन्हें लगता है कि यह देश का दुर्भाग्य है कि ऐसा अराजकतावादी, नासमझ, गैर-जिम्मेदार और संवैधानिक रूप से अनपढ़ व्यक्ति विपक्ष का लीडर है.'
Delhi: BJP National Spokesperson Gaurav Bhatia says, "Today's press conference is about the symbol of anarchy that Rahul Gandhi has become in India's democracy. I will speak about it factually, and hearings have also taken place in the Hon'ble Supreme Court today. I would like to place some facts before you. We all know how Rahul Gandhi, the Leader of the Opposition, is viewed by the people of India. They believe it is the country's misfortune that such an anarchist, immature, irresponsible and constitutionally illiterate person is the Leader of the Opposition..."
— IANS (@ians_india) October 15, 2026
पंजाब बंद के आह्लान पर डीसीपी आदित्य ने बताया कि पंजाब बंद का आह्वान किया गया था. सुबह 7 बजे से ही पूरे जालंधर में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ट्रैफिक सुचारू रूप से चलता रहे. इसके अलावा, कोई भी जबरन बाजार बंद नहीं करवा रहा है. इसके लिए हम वहां गश्त भी कर रहे हैं. कुछ लोग चौराहे के बीचों-बीच बैठे थे. हमने उनके पास जाकर उनसे अनुरोध किया .4-5 लोगों ने हमारी बात नहीं मानी, जबकि बाकी लोगों ने बात मान ली और वे किनारे चले गए या अंदर चले गए. जिन लोगों ने बात नहीं मानी, उन्हें हिरासत में ले लिया गया है.
#WATCH Jalandhar, Punjab: On the state bandh call, DCP Aditya says, "A call for Punjab bandh was given. Since 7 AM, police force has been deployed across Jalandhar... We are ensuring that the flow of traffic remains smooth. Additionally, no one is forcibly shutting down the markets. For this, we are also patrolling there... Some people were sitting in the middle of the chowk. We approached them and made a request. 4-5 people did not heed the request, while the rest complied and moved to the sides or went inside. Those who did not heed the request have been taken into custody..."
— ANI (@ANI) October 15, 2026
राहुल गांधी के मार्च के दौरान नारेबाजी , हंगामें ,पत्रकार के साथ बदसलूकी के आरोपों वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को नोटिस जारी किया. कुछ वकीलों ने यह याचिका दायर की थी. इसके अलावा राहुल गांधी के साथ सह याचिकाकर्ता बनाए गए दूसरे विपक्षी नेताओ को भी नोटिस जारी किया.
लद्दाख के कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज लद्दाख में कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया है. इन परियोजनाओं से लोगों का जीवन आसान होगा, बिजली की उपलब्धता बेहतर होगी, पानी की आपूर्ति बढ़ेगी और हमारी प्राचीन विरासत को सहेजने में मदद मिलेगी. मैं इन परियोजनाओं के लिए लद्दाख के सभी लोगों को हार्दिक बधाई देता हूँ. मैं उन सभी इंजीनियरों, श्रमिकों और स्थानीय सहयोगियों को भी बधाई देता हूँ जिन्होंने इन कार्यों में अपना योगदान दिया है. मैं विशेष रूप से बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) की टीम की सराहना करना चाहता हूँ. कुछ समय पहले, मैंने लेह के कुशोक बकुला रिम्पोछे हवाई अड्डे पर टर्मिनल बिल्डिंग की आधारशिला रखी थी, और यह मेरा सौभाग्य है कि अब मुझे इस महत्वपूर्ण परियोजना का उद्घाटन करने का अवसर मिला है. लगभग 650 करोड़ रुपये की लागत से बना यह टर्मिनल, हवाई अड्डे की सालाना यात्री क्षमता को 10 लाख से बढ़ाकर 35 लाख कर देगा. यहाँ उड़ानों की संख्या भी तीन गुना तक हो सकती है. इस टर्मिनल की एक और खास बात यह है कि लद्दाख के कठिन मौसम को ध्यान में रखते हुए, इसमें जियोथर्मल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है और साथ ही सौर ऊर्जा का भी उपयोग होता है. यह भारत का पहला हवाई अड्डा टर्मिनल है जिसमें जियोथर्मल हीटिंग सिस्टम लगा है.
#WATCH | Prime Minister Narendra Modi says, "Today, several significant development projects have been inaugurated in Ladakh. These projects will make life easier for many people—improving access to electricity, increasing water availability, and providing a boost to the preservation of our ancient heritage... I extend my heartiest congratulations to all the people of Ladakh on these projects. I also congratulate all the engineers, workers, and local partners who have contributed to these initiatives. I would like to especially commend the team from the Border Roads Organization (BRO). Some time ago, I laid the foundation stone for the terminal building at the Kushok Bakula Rimpochee Airport in Leh, and it is my good fortune that I now have the privilege of inaugurating this vital project. Built at a cost of approximately Rs 650 crore, this terminal will increase the airport's annual passenger capacity from 10 lakh to 35 lakh. The number of flights could also potentially triple. This terminal has another unique feature: considering Ladakh’s challenging climate, it incorporates geothermal technology and also utilizes solar energy. It is the first airport terminal in India to feature a geothermal heating system...." (Video: DD News)
— ANI (@ANI) October 15, 2026
प्रदर्शन के दौरान ज्यादती को लेकर खड़े हो रहे सवाल के बीच सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस प्रदर्शनस्थल से जुड़े सभी CCTV फुटेज सुरक्षित रखें. इसके साथ ही SC ने कहा कि प्राइवेट पर्सन भी फुटेज सुरक्षित रखें ताकि आगे चलकर वो सबूत के तौर पर काम आ सके.
In the protest cases, the Supreme Court passes an order directing all law enforcement agencies to preserve and submit all CCTV footage of protest-related incidents, after various counsels sought the same. https://t.co/1OJRa7jn4d
— ANI (@ANI) October 15, 2026
जंतर मंतर के डीनोटिफाई किए जाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार.से पूछा कि क्या यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की कुछ मौखिक टिप्पणियों की वजह से लिया गया, या फिर सरकार ने सोच समझकर लिया. इसके जवाब में SG मेहता ने कोर्ट को बताया कि सिर्फ सुप्रीम कोर्ट का आदेश इस निर्णय का आधार नहीं है. इस मसले पर कमेटी का गठन बहुत पहले ही कर दिया गया था. कमेटी ने एक विस्तृत रिपोर्ट दी है. उस आधार पर यह फैसला लिया गया. इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान BNSS की धारा 172 और 163 लगाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है.
सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और अन्य को नोटिस जारी किया है. यह नोटिस लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के अन्य नेताओं की याचिका पर दिया गया है, जिसमें चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी और अन्य की याचिका पर ECI, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञान कुमार, और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी से जवाब मांगा है.
Supreme Court issues notice to Election Commission of India (ECI) and others on plea filed by Opposition leaders led by Lok Sabha Leader of the Opposition Rahul Gandhi and the INDIA bloc, challenging the poll panel’s Special Intensive Revision (SIR) of electoral rolls and alleged voter deletions. Supreme Court seeks response from ECI, CEC Gyanesh Kumar, Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu and Vivek Joshi on Gandhi and others' plea.
— ANI (@ANI) October 15, 2026
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की ओर से गठित बेंच (जिसमें जस्टिस सूर्यकांत भी शामिल थे) ने पहले ही कहा था कि उनके सामने मुख्य रूप से चार तरह के मामले हैं (जो सभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े हैं).
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा था, ताकि वे विरोध प्रदर्शनों के दौरान महिला पत्रकारों को परेशान करने और उनके साथ दुर्व्यवहार करने के आरोपों पर स्पष्टीकरण दे सकें. बेंच ने कहा कि उन्हें इन आरोपों की जानकारी है और उन्होंने कोर्ट में मौजूद पुलिस अधिकारियों से इस मामले की जांच करने को कहा था.
यह सुनवाई तब हो रही है जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस अपील को मान लिया है, जिसमें उन्होंने दो याचिकाओं पर जवाब देने के लिए गुरुवार तक का समय मांगा था. इन याचिकाओं में से एक, कोर्ट के 8 अक्टूबर के आदेश की कथित अवहेलना (contempt) के लिए अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करती है. 8 अक्टूबर के उस आदेश में दिल्ली मेट्रो, रेलवे सेवाओं और अन्य नागरिक सुविधाओं पर लगे पूर्ण प्रतिबंध को हटा दिया गया था. इसके अलावा, पुलिस द्वारा लोगों को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने को चुनौती देने वाली कई अन्य याचिकाएं भी शामिल हैं.
याचिकाकर्ताओं ने बच्चों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कुछ गुंडों द्वारा किए गए कथित हमलों का भी जिक्र किया है. उन्होंने यह भी बताया कि इन गुंडों को गिरफ्तार किए जाने के महज एक दिन बाद ही जमानत मिल गई और जमानत मिलने पर कुछ समर्थकों ने उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया.
केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने बताया कि अधिकारियों द्वारा कोर्ट में दी गई माफी, केवल अवमानना (contempt) की कार्यवाही के नियमों के अनुरूप है. SG ने मीडिया की उन खबरों पर आपत्ति जताई, जिनकी हेडलाइंस में कहा गया है कि अधिकारियों ने कोर्ट के आदेशों की अवमानना के लिए माफी मांगी है. कोर्ट ने कहा, "हम बिना किसी शर्त वाली (unconditional) माफी पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. आपके तर्कों की वजह से, यह माफी 'शर्तों के साथ' (qualified) हो जाएगी." कोर्ट ने कहा: "DMRC के जवाब के अलावा, हम (अधिकारियों द्वारा दाखिल किए गए) बाकी जवाबों को अभी तक पढ़ नहीं पाए हैं."
Supreme Court commences hearing on a batch of pleas linked to the October 10 protests in Delhi, including petitions challenging the alleged detention and harassment of peaceful protesters, including lawyers and journalists. The Centre and other authorities have filed their responses before the Court to the pleas on which the Court had earlier sought responses. The bench led by Chief Justice of India (CJI) Surya Kant had earlier noted that there were essentially four sets of matters before it (all directly or indirectly connected with the October 10 protests). The Court had also sought the personal presence of a senior Delhi Police officer to explain allegations of harassment and manhandling of women journalists during the ongoing protests, after the bench said it was aware of the allegations and had asked police officers present in Court to inquire into the matter. The hearing comes after the Supreme Court agreed to the Centre’s request for an extension until Thursday to respond to two pleas — one seeking contempt action against authorities for alleged disobedience of the Court’s October 8 order, which had virtually lifted a “complete ban” affecting Delhi Metro and railway services and other civic services during the protests, and a batch of other pleas challenging alleged detentions by the police. Petitioners to also mention alleged attacks and assaults on children and peaceful protesters by certain goons, and their garlanding by some supporters after they were granted bail just one day after being arrested. SG Tushar Mehta, appearing for the Centre, explains that the apologies tendered before the Court by the authorities are only in keeping with the manner in which contempt proceedings work. SG objects to media reports with headlines saying authorities have apologised for contempt of court orders. “We are not taking cognisance of unconditional and unqualified apologies. Because of your submission, it will become qualified,” the Court says. Court: “Apart from the DMRC response, we have not been able to read any other responses (submitted by the authorities).”
— ANI (@ANI) October 15, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के मार्च को लेकर भी अहम टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश के शीर्ष न्यायालय पर कोई दबाव नहीं बना सकता है. SC ने कहा कि इस तरह के प्रयास बहुत कमजोर हैं और इनसे कोर्ट पर कोई असर नहीं पड़ता. SC ने कहा कि कोर्ट के बाहर क्या कहा जा रहा है और कोर्ट के अंदर क्या कहा जा रहा है, हमें सब पता है. हम जमीनी हकीकत से अनजान नहीं हैं और हमें हर चीज की जानकारी रहती है.
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई शुरू कर दी है. इनमें वे याचिकाएं भी शामिल हैं, जिनमें शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों (जिनमें वकील और पत्रकार भी हैं) को कथित तौर पर हिरासत में लेने और परेशान करने को चुनौती दी गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के नेताओं की ओर से दायर एक याचिका में शामिल 13 याचिकाकर्ताओं में से एक के बर्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई है. इस याचिका में मतदाता सूची (voter rolls) के संबंध में ECI (चुनाव आयोग) की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है.कोर्ट ने 'इंडिया' गठबंधन के नेताओं की इस याचिका पर ECI से जवाब मांगा है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हम इस याचिका पर नोटिस जारी कर रहे हैं, लेकिन हम याचिकाकर्ताओं में से एक के बर्ताव को लेकर स्पष्टीकरण भी मांगेंगे.
Supreme Court commences hearing on a batch of pleas linked to the October 10 protests in Delhi, including petitions challenging the alleged detention and harassment of peaceful protesters, including lawyers and journalists Supreme Court has strongly objected to the conduct of one of the thirteen petitioners of INDIA bloc leaders who have moved a plea challenging the manner of ECI’s SIR of voter rolls. The Court has sought ECI’s response on the INDIA bloc leaders' plea. “We are issuing notice on the plea, but we will seek explanation of the conduct of one of the petitioners.”, the court remarked.
— ANI (@ANI) October 15, 2026
SIR के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है. सीजेआई सूर्यकांत की बेंच मामले की सुनवाई कर रही है. विपक्ष की याचिका पर सुनवाई को दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी किया है. इसके साथ ही चुनाव आयोग के दोनों आयुक्तों को भी नोटिस जारी किया है.
क्या सरकार ने जवाबदेही तय करने के अपने कर्तव्य को पूरी तरह से त्याग दिया है कि अब वह जवाब मांगने वालों की आवाज दबाने के लिए उन्हें हिरासत में लेने का सहारा ले रही है? जंतर-मंतर पर, शांतिपूर्ण विरोध के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल कर रहे युवा नागरिक, जो अपने हाथों में तिरंगा भी थामे हुए थे, आज न्यायिक हिरासत में हैं. इंडिया गेट पर, अंकिता भंडारी के दुखी माता-पिता, जो अपनी बेटी के लिए न्याय मांग रहे थे, उन्हें सुबह 4 बजे हिरासत में ले लिया गया. उनके साथ कांग्रेस के वे कार्यकर्ता भी हिरासत में लिए गए, जो उनके समर्थन में खड़े थे. विरोध करने वाला कोई अपराधी नहीं होता. शोक में डूबे माता-पिता कोई खतरा नहीं होते. जो लोग सत्ता चला रहे हैं, उन्हें यह बुनियादी फर्क समझाने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए.
Has the Government so completely abandoned its duty of accountability that it now relies on detention to silence those who demand it? At Jantar Mantar, young citizens exercising their democratic right to peaceful protest, even while waving the national Tricolour, find themselves in judicial custody. At India Gate, the grieving parents of Ankita Bhandari, seeking justice for their daughter, are detained at 4 in the morning, alongside Congress workers who stood in solidarity with them. A protester is not an offender. A grieving parent is not a threat. The distinction should not need explaining to those entrusted with governing. What threat to public order do peaceful protesters pose? What purpose is served by subjecting bereaved parents, already enduring an unimaginable tragedy, to such indignity? The Constitution does not guarantee citizens the right to protest only when their questions are convenient to those in power. That right is not conditional upon the Government’s approval. Nor can it be restricted merely because its exercise causes discomfort. The power to detain is not the power to silence. The demand for justice does not end at the gates of a police station. Nor does the courage to speak out disappear at the threat of arrest. The people of this country have never needed permission to stand up for what is right. And they must never be made to believe otherwise. @INCIndia
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) October 15, 2026
इनर मणिपुर से कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम को महिला छात्रों के यौन उत्पीड़न के आरोपों के चलते जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से बर्खास्त किए जाने पर, BJP सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस पार्टी हमेशा उन लोगों का पक्ष लेती है जो महिलाओं का शोषण करते हैं. जब कांग्रेस पार्टी के मौजूदा सांसद बिमोल अकोइजम ने 11 महिला छात्रों का यौन उत्पीड़न किया, तो JNU की आंतरिक समिति ने पाया कि उनके खिलाफ छात्राओं की शिकायतें सच थीं और तथ्यों से साबित होती थीं. इसके परिणामस्वरूप, 9 अक्टूबर 2026 को बिमोल अकोइजम को JNU में उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया. फिर भी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, खड़गे जी और सोनिया गांधी की ओर से पूरी तरह से खामोशी है... आज, हमारी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और साथी सांसद रूपकुमारी चौधरी के नेतृत्व में, हमने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की. हमने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी अपील की है. कल, एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष विजया राहटकर से मुलाकात की थी, और आज हमने ओम बिरला को एक ज्ञापन सौंपा. हमारी बहुत सार्थक चर्चा हुई.
#WATCH | Delhi: On Congress MP from Inner Manipur, Angomcha Bimol Akoijam's dismissal from Jawaharlal Nehru University (JNU) over allegations of sexually harassing female students, BJP MP Bansuri Swaraj says, "It is highly unfortunate that the Congress party consistently sides with those who exploit women. When Bimal Akoijam—a sitting MP from the Congress party — sexually harassed 11 female students, JNU’s internal committee found that the complaints filed by these students against him were truthful and substantiated by facts. Consequently, on October 9, 2026, Bimal Akoijam was dismissed from his position at JNU. Yet, there is an absolutely deafening silence from Rahul Gandhi, Priyanka Gandhi, Kharge ji, and Sonia Gandhi... Today, under the guidance and leadership of our Mahila Morcha National President and fellow MP, Rupkumari Choudhary, we met with the Speaker of the Lok Sabha, Om Birla.... We appealed to the President, Droupadi Murmu. Yesterday, a delegation met with the Chairperson of the National Commission for Women (NCW), Vijaya Rahatkar, and today, we submitted a memorandum to Om Birla. We had a very productive discussion..."
— ANI (@ANI) October 15, 2026
CEC के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कुछ दिनों बाद अभिनेता इमरान खान को मिले 'भारत छोड़ो नोटिस' पर, BJP MLC परिणय फुके ने कहा कि इमरान खान अमेरिकी नागरिक हैं. इस देश में आकर विरोध प्रदर्शन करना और SIR (NRC/NPR) से नाम हटाने की बात करना ऐसे लोग 'आस्तीन के सांप' हैं. मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार जानती है कि ऐसे 'सांपों' को कैसे कुचलना है. सरकार और पुलिस इन्हें देश से बाहर निकाल रही हैं. मैं इसका स्वागत करता हूं. मैरी मिलबेन ने कल बताया था कि भारत में अराजकता फैलाने और देश को बदनाम करने के लिए इन विरोध प्रदर्शनों को कैसे फंड किया जा रहा है. ऐसे 'आस्तीन के सांप', जो अमेरिका, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आकर इन विरोध प्रदर्शनों में शामिल हो रहे हैं, उन्हें कुचल देना चाहिए.
#WATCH | Nagpur, Maharashtra: On ‘Leave India Notice' to actor Imran Khan days after his participation in anti-CEC protest, BJP MLC Parinay Fuke says, "Imran Khan is a US citizen. Coming to this country and agitating and speaking of name deletion in SIR — such people are 'aasteen ka saanp'. Mumbai Police and Maharashtra Govt know how to crush such 'snakes'. The Govt and Police are driving them out of the country. I welcome this. Mary Millben explained yesterday how these protests are being funded to spread anarchy in India and defame the country. Such 'aasteen ka saanp', people who have come from US, Pakistan and Bangladesh to participate in such protests should be crushed..."
— ANI (@ANI) October 15, 2026
बीजेपी सांसद दग्गुबाती पुरंदेश्वरी ने कहा कि हमने एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें बताया गया है कि कांग्रेस सांसद बिमोल को आंतरिक समिति ने दोषी पाया है. इसलिए, हमने स्पीकर से अनुरोध किया है कि वे इस मामले को एथिक्स कमिटी (आचार समिति) को सौंपें और इसकी जांच करवाएं. हमने यह भी मांग की है कि इस बात पर विचार किया जाए कि क्या उन्हें लोकसभा सांसद बने रहना चाहिए या नहीं. यह लोकतंत्र का सबसे पवित्र सदन है. जिस व्यक्ति ने महिलाओं के साथ बहुत बुरा बर्ताव किया है, उसे लोकतंत्र के इस सर्वोच्च सदन में रहने का कोई हक नहीं है. स्पीकर ने हमें आश्वासन दिया है कि वे इस मामले को देखेंगे और कानूनी तौर पर जो भी संभव होगा, वह करेंगे. वे इस बात पर विचार करेंगे कि क्या इसे एथिक्स कमिटी के पास भेजा जाना चाहिए... कांग्रेस की चुप्पी यह साबित करती है कि वे बिमोल का समर्थन कर रहे हैं. हमारी मांग है कि कांग्रेस पार्टी को भी देश की महिलाओं के साथ खड़ा होना चाहिए. राहुल गांधी पितृसत्ता के खिलाफ बोलते हैं; प्रियंका गांधी खुद एक महिला हैं. उन्हें इस मुद्दे पर अपनी आवाज़ उठानी चाहिए.
#WATCH | BJP MP Daggubati Purandeswari says, "We filed a memorandum that Congress MP Bimol had been found to be guilty by the internal committee. So, we requested the Speaker to refer this to the Ethics Committee and look into it; we also demanded to look into whether he should still continue as a Lok Sabha MP. This is the most sacred House of democracy. A man who has behaved very badly with women does not belong in the highest House of democracy. The Speaker assured us that he will look into it and see what can be done legally. He will consider whether this is to be sent to the Ethics Committee...Their (Congress) silence proves that Congress party is supporting Bimol. Our demand is that even the Congress party should stand with the women of the country. Rahul Gandhi speaks against patriarchy; Priyanka Gandhi is a woman. They must raise their voice..."
— ANI (@ANI) October 15, 2026
बीजेपी की महिला सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने संसद पहुंचा. उन्होंने कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम के खिलाफ एक ज्ञापन सौंपा, जिन पर JNU में कथित यौन उत्पीड़न के मामले में आरोप हैं.
#WATCH | Delhi: A delegation of women MPs of the BJP arrived at the Parliament to meet Lok Sabha Speaker Om Birla and submit a memorandum over Congress MP Bimol Akoijam, who is accused in an alleged sexual harassment case at JNU. https://t.co/PpSXV65p2x
— ANI (@ANI) October 15, 2026
महाराष्ट्र में SIR के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया. पहले से लंबित मामलों के साथ कोर्ट करेगा सुनवाई। मामला 26 तारीख को लिस्ट होगा. याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि महाराष्ट्र में लगभग 33% वोटरों के नाम कटने का खतरा है. वकील ने दावा किया कि मुंबई और पुणे में 40% वोटर्स के नाम हट रहे हैं.
सुबह के 4 बजे, जब दुनिया सो रही थी, तब अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में ले लिया गया. उनका गुनाह? वे इंडिया गेट पर चुपचाप बैठे थे- बोझिल कंधों के साथ, बिना किसी हंगामे के और सिर्फ इतना मांग रहे थे कि CBI जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल न बनाया जाए. कल मैं और प्रियंका इन माता-पिता से मिले थे. जिस जांच का नतीजा आया नहीं, उसके पहले ही नियुक्ति की जल्दी और सवाल पूछने वाले मां-बाप को रात के अंधेरे में उठा लिया गया. इस सरकार की पहचान यही है: पीड़ितों की आवाज दबा दो, सवाल करने वालों को हटा दो. पर न्याय की लड़ाई न दबेगी, न रुकेगी. कांग्रेस अंकिता भंडारी के परिवार के साथ खड़ी है और खड़ी रहेगी - जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता.
सुबह के 4 बजे। जब दुनिया सो रही थी, तब अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में ले लिया गया। उनका गुनाह? वे इंडिया गेट पर चुपचाप बैठे थे - बोझिल कंधों के साथ, बिना किसी हंगामे के और सिर्फ़ इतना माँग रहे थे कि CBI जाँच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल न बनाया जाए। कल मैं और प्रियंका इन माता-पिता से मिले थे। जिस जाँच का नतीजा आया नहीं, उसके पहले ही नियुक्ति की जल्दी और सवाल पूछने वाले माँ-बाप को रात के अंधेरे में उठा लिया गया। इस सरकार की पहचान यही है: पीड़ितों की आवाज़ दबा दो, सवाल करने वालों को हटा दो। पर न्याय की लड़ाई न दबेगी, न रुकेगी। कांग्रेस अंकिता भंडारी के परिवार के साथ खड़ी है, और खड़ी रहेगी - जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता। #JusticeForAnkitaBhandari
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 15, 2026
NSUI कार्यकर्ता और कानून की छात्रा अथिरा विजयन की शिकायत पर म्यूजियम पुलिस स्टेशन में एक 'जीरो FIR' दर्ज की गई है. अथिरा का आरोप है कि नई दिल्ली में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के जवानों ने उनके साथ मारपीट की. यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 74, 76, 115, 117, 126, 351(3), 296(b) और 3(5) के तहत दर्ज किया गया है। FIR के अनुसार, इस मामले की आधिकारिक तौर पर जांच शुरू कर दी गई है.
Thiruvananthapuram, Keralam: Police register a Zero FIR at Museum Police Station following a complaint by NSUI activist and law student Athira Vijayan, who alleged she was assaulted by Delhi Police personnel during a protest in New Delhi. The case has been registered under Sections 74, 76, 115, 117, 126, 351(3), 296(b), and 3(5) of the Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS). According to the FIR, the matter has been officially taken up for investigation.
— ANI (@ANI) October 15, 2026
मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई हो रही है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों आयुक्तों को नोटिस जारी किया है. ये सुनवाई कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की ओर से दाखिल याचिका पर हो रही है. सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच मामले की सुनवाई कर रही है.
इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और अन्य को नोटिस जारी किया है. यह नोटिस लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के अन्य नेताओं की याचिका पर दिया गया है, जिसमें चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी और अन्य की याचिका पर ECI, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञान कुमार, और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी से जवाब मांगा है.
जंतर मंतर के डीनोटिफाई किए जाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार.से पूछा कि क्या यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की कुछ मौखिक टिप्पणियों की वजह से लिया गया, या फिर सरकार ने सोच समझकर लिया. इसके जवाब में SG मेहता ने कोर्ट को बताया कि सिर्फ सुप्रीम कोर्ट का आदेश इस निर्णय का आधार नहीं है. इस मसले पर कमेटी का गठन बहुत पहले ही कर दिया गया था. कमेटी ने एक विस्तृत रिपोर्ट दी है. उस आधार पर यह फैसला लिया गया. इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान BNSS की धारा 172 और 163 लगाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है.
गुरुवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने लद्दाख को बड़ी सौगात दी है. पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लद्दाख में लगभग 3,350 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया. पीएम मोदी ने कहा कि आज लद्दाख की प्रगति और विकास में एक और अध्याय जुड़ रहा है. मुझे खुशी है कि मैं technology के माध्यम से इस अवसर का हिस्सा बन रहा हूं. आज लद्दाख में कई अहम विकास परियोजनाओं का लोकार्पण हुआ है. इनसे कई लोगों का सफर आसान होगा, कहीं बिजली की सुविधाएं बेहतर होंगी, कहीं पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और हमारी प्राचीन विरासत के संरक्षण को भी नई ताकत मिलेगी. मैं इन परियोजनाओं के लिए लद्दाख के सभी लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं. मैं इन प्रोजेक्ट्स में लगे सभी इंजीनियरों, श्रमिकों और स्थानीय साथियों को भी बधाई देता हूं. मैं BRO के साथियों की भी विशेष सराहना करता हूं.
बीजेपी के महिला सांसदों ने आज संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और इनर मणिपुर से कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम के खिलाफ ज्ञापन सौंपा. कांग्रेस सांसद को महिला छात्रों के यौन उत्पीड़न के आरोपों के चलते जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से बर्खास्त किया गया है.
गुरुवार को मुंबई पुलिस ने एक बड़ा एक्शन लेते हुए बॉलीवड अभिनेता आमिर खान के भांजे इमरान खान को भारत छोड़ने का आदेश दिया है. इमरान खान को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ना होगा. इससे पहले हुए सीईसी ज्ञानेश कुमार खिलाफ प्रदर्शन के मामले में डिटेन किया गया था. बता दें कि इमरान खान अमेरिका नागरिक हैं और वह बॉलीवुड के एक्टर भी हैं.
पंजाब में आज एंटी ड्रग एक्टिविस्ट की हत्या के विरोध में लोगों ने बंद का आह्वान किया है. पंजाब बंद का सीधा असर नजर आ रहा है. दुकाने, मॉल और प्रतिष्ठान बंद हैं. पंजाब के कई शहरों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर हैं और एंटी ड्रग एक्टिविस्ट की परमिंदर सिंह के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा आज दिन भर हमारी नजर पंजाब पर भी रहेगी. पंजाब के मनसा में एंटी ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर झोटा की हत्या के विरोध में आज यानी 15 अक्टूबर को बंद का ऐलान किया गया है. सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक इस बंद का असर नजर आए. इस दौरान स्कूल-कॉलेज, बाजार और हाईवेज बंद रहेंगे. बंद के दौरान केवल अस्पतालों, मेडिकल स्टोर, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस जैसी इमरजेंसी सेवाओं को छूट रहेगी. पीड़ित परविंदर के पिता भीम सैन ने लोगों से अपील है कि कोई भी अपनी गाड़ियां लेकर सड़क पर न निकलें.